बतुकम्मा त्योहार का महत्व: फूलों से बनी देवी, लोकगीत और तेलंगाना

बतुकम्मा त्योहार का महत्व: फूलों के बतुकम्मा के चारों ओर घेरे में गीत गाती महिलाओं का मूल इलस्ट्रेशन

तेलंगाना में दशहरे से पहले गलियां और आंगन फूलों के रंग से भर जाते हैं. यह रौनक बतुकम्मा की होती है, जो इस साल 11 अक्टूबर के आसपास शुरू होगा. लेकिन बतुकम्मा त्योहार का महत्व सिर्फ सजावट तक सीमित नहीं है. इसमें आस्था, मौसम और महिलाओं की सामूहिकता, तीनों की झलक मिलती है.

बतुकम्मा त्योहार का महत्व क्या है

बतुकम्मा त्योहार का महत्व प्रकृति और मातृशक्ति के उत्सव में है. तेलुगु में इसका अर्थ जीवन देने वाली मां या मां, जीवित हो उठो माना जाता है. महिलाएं मौसमी फूलों से देवी गौरी का रूप बनाती हैं. फिर नौ दिन गीत गाती हैं और आखिर में उसे जल में विसर्जित करती हैं.

पर्व से जुड़े बुनियादी तथ्य

  • यह तेलंगाना का नौ दिन का लोक पर्व है, जो नवरात्रि के साथ चलता है.
  • परंपरा के मुताबिक शुरुआत महालया अमावस्या से और समापन दुर्गाष्टमी पर होता है.
  • 2026 में राज्य की छुट्टियों की सूची में 11 अक्टूबर इसका पहला दिन है.
  • राज्य का राजकीय फूल तंगेडु इस पर्व में खास जगह रखता है.

नाम के पीछे का अर्थ और लोककथा

दरअसल बतुकम्मा शब्द दो हिस्सों से बना माना जाता है. बतुकु यानी जीवन और अम्मा यानी मां. इसलिए इसे जीवन की मां का पर्व भी कहा जाता है. वहीं कई विवरणों में इसका अर्थ मां, जीवित हो उठो बताया गया है. यह पर्व देवी पार्वती यानी गौरी को समर्पित माना जाता है.

इसके अलावा इससे जुड़ी कथाएं भी कई हैं. एक प्रचलित लोककथा के मुताबिक चोल वंश के राजा धर्मांगद को बरसों की प्रार्थना के बाद बेटी हुई. बाद में उसका नाम बतुकम्मा रखा गया. हालांकि यह आस्था और लोक स्मृति का हिस्सा है, इतिहास का प्रमाणित तथ्य नहीं.

मौसम, फूल और पानी का रिश्ता

दरअसल बतुकम्मा मानसून के खत्म होने और शरद ऋतु की शुरुआत के समय आता है. आमतौर पर इस मौसम में खेतों, मेड़ों और तालाबों के आसपास जंगली फूल खिलते हैं. इसलिए यह पर्व प्रकृति के प्रति आभार जैसा भी देखा जाता है.

अब फूलों की बात. तेलंगाना टूरिज़्म की सूची में इस पर्व के लिए 20 से ज़्यादा फूलों के नाम हैं. इनमें गुनुगु, तंगेडु, गुम्मडी यानी कद्दू का फूल, बंती और चामंती शामिल हैं. साथ ही राज्य का पर्यटन विभाग कहता है कि विसर्जन से फूलों के औषधीय गुण पानी तक पहुंचते हैं. ध्यान रहे, यह परंपरा से जुड़ी मान्यता है, वैज्ञानिक जांच का नतीजा नहीं.

तंगेडु क्यों खास है

दरअसल तंगेडु पीले रंग का फूल है, जिसका वानस्पतिक नाम कैसिया ऑरिकुलाटा है. तेलंगाना टूरिज़्म के मुताबिक राज्य सरकार ने 2014 में इसे राजकीय फूल घोषित किया. यही नहीं, ग्रामीण तेलंगाना में इसे देवी दुर्गा जितना सम्मान दिया जाता है.

महिलाओं का पर्व, गीतों की परंपरा

बतुकम्मा मुख्य रूप से महिलाओं का पर्व है. फिर शाम को महिलाएं अपने सजाए बतुकम्मा बीच में रखती हैं. इसके बाद घेरा बनाकर ताली की लय पर लोकगीत गाती हैं. दरअसल इन गीतों में परिवार की खुशहाली और अच्छी सेहत की कामना होती है.

खास बात यह है कि नौ दिनों में हर दिन का अलग नाम और अलग प्रसाद होता है. पहले दिन को एंगिली पूला बतुकम्मा कहते हैं. वहीं नौवां दिन सद्दुला बतुकम्मा कहलाता है, जो सबसे बड़ा उत्सव होता है.

सद्दुला बतुकम्मा और गौरम्मा

विकिपीडिया पर दर्ज विवरण के मुताबिक आखिरी दिन पांच तरह के स्वाद वाले चावल यानी सद्दी बनते हैं. इनमें दही चावल, इमली चावल, नींबू चावल, नारियल चावल और तिल चावल शामिल हैं. इसी विवरण के मुताबिक हल्दी से गौरम्मा यानी देवी गौरी का छोटा प्रतीक भी बनाया जाता है.

तेलंगाना की पहचान बना पर्व

साल 2014 में अलग राज्य बनने के बाद बतुकम्मा तेलंगाना की सांस्कृतिक पहचान के रूप में और उभरा. अब राज्य सरकार इसे आधिकारिक स्तर पर मनाती है. इसलिए शहरों से लेकर गांवों तक सामूहिक आयोजन होते हैं. साथ ही अमेरिका, कनाडा और ऑस्ट्रेलिया में बसे तेलुगु परिवार भी अपने संगठनों के ज़रिए यह पर्व मनाते हैं. यही वजह है कि बतुकम्मा त्योहार का महत्व अब राज्य की पहचान से भी जुड़ गया है.

पर्व को समझने और मनाने के आसान तरीके

अगर आप पहली बार यह पर्व देख रहे हैं, तो ये सुझाव काम आएंगे.

  • किसी सामूहिक आयोजन में पहले दर्शक बनकर शामिल हों और परंपरा समझें.
  • घर पर छोटा बतुकम्मा बनाना हो, तो सिर्फ प्राकृतिक फूल और पत्ते इस्तेमाल करें.
  • विसर्जन में प्लास्टिक, पन्नी या सजावटी सामान पानी में न डालें.
  • गीतों का अर्थ किसी बुज़ुर्ग से पूछें, इससे पर्व की भावना बेहतर समझ आएगी.

बतुकम्मा से जुड़े आम सवाल

क्या बतुकम्मा त्योहार का महत्व सिर्फ धार्मिक है?

नहीं. इसमें आस्था के साथ प्रकृति, मौसम, खेती और महिलाओं की सामूहिकता का जश्न भी शामिल है.

इस साल सद्दुला बतुकम्मा कब है?

कुछ कैलेंडर और रिपोर्ट इसे 18 अक्टूबर बताते हैं, जबकि कुछ 19 अक्टूबर. इसलिए अपने इलाके के पंचांग या आयोजन समिति से पुष्टि करें.

बतुकम्मा और दशहरे में क्या संबंध है?

दरअसल दोनों एक ही मौसम के पर्व हैं. बतुकम्मा दुर्गाष्टमी के आसपास पूरा होता है और इस साल 20 अक्टूबर को विजयादशमी है.

नोट: यह लेख परंपराओं और लोक मान्यताओं पर आधारित सामान्य जानकारी देता है. तारीखें 2 अक्टूबर 2026 को सरकारी छुट्टियों की सूची पर आधारित रिपोर्टों से जांची गई हैं और स्थानीय स्तर पर अलग हो सकती हैं.

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