पानी के नीचे की दुनिया शांत लगती है, पर असल में वह आवाज़ों से भरी होती है. ऐसे में सवाल उठता है कि शार्क कैसे सुनती हैं. फ्लोरिडा अटलांटिक यूनिवर्सिटी (FAU) के एक नए शोध ने इसका एक अहम हिस्सा समझाया है. इसके मुताबिक ब्लैकटिप शार्क दूर से आती धीमी आवाज़ की दिशा भी पहचान लेती हैं.
शार्क कैसे सुनती हैं, नए शोध का जवाब
शार्क में हड्डी वाली मछलियों जैसा हवा से भरा स्विम ब्लैडर नहीं होता. FAU के मुताबिक वे अंदरूनी कान से पानी के कणों की हलचल महसूस करती हैं. नए शोध में ब्लैकटिप शार्क ने 74 मीटर दूर तक की धीमी आवाज़ पर प्रतिक्रिया दी. वे आवाज़ से उलटी दिशा में मुड़ गईं.
शोध की बुनियादी जानकारी
- शोध पत्र: ब्लैकटिप शार्क का पानी के अंदर की आवाज़ की ओर रुख, जर्नल Integrative Organismal Biology.
- लेखक: कैरोलिन सुलिवन, एडमंड गर्स्टीन और स्टीफन काजीउरा.
- आवाज़ें: 100 से 800 हर्ट्ज़ के तीन बैंड, साथ में 10 किलोहर्ट्ज़ की कंट्रोल आवाज़.
- आंकड़े: शोध पत्र में 165 प्रतिक्रियाओं का विश्लेषण दर्ज है.
पानी में आवाज़ दो तरह से असर डालती है
सबसे पहले यह समझें कि आवाज़ असल में कंपन है. अगर पानी में आवाज़ चलती है, तो दो चीज़ें होती हैं. पहली, पानी का दबाव थोड़ा घटता-बढ़ता है. दूसरी, पानी के छोटे-छोटे कण आगे-पीछे हिलते हैं. वैज्ञानिक इस दूसरी चीज़ को पार्टिकल मोशन यानी कणों की हलचल कहते हैं.
ज़्यादातर हड्डी वाली मछलियों में स्विम ब्लैडर दबाव के बदलाव को पकड़ने में मदद करता है. हालांकि शार्क के पास यह थैली नहीं होती. इसलिए माना जाता है कि वे मुख्य रूप से कणों की हलचल महसूस करती हैं.
नियर फील्ड और फार फील्ड का फर्क
सीधे शब्दों में कहें तो आवाज़ के स्रोत के पास का इलाका नियर फील्ड कहलाता है. वहां कणों की हलचल काफी तेज़ होती है. वहीं दूर का इलाका फार फील्ड कहलाता है. शोध पत्र में फार फील्ड की शुरुआत आवाज़ की तीन तरंगदैर्ध्य के बाद मानी गई है. उदाहरण के लिए 100 हर्ट्ज़ की आवाज़ के लिए यह दूरी कम से कम 45 मीटर बैठती है.
इसीलिए यह शोध खास है. शोध पत्र के मुताबिक 71.5% प्रतिक्रियाएं फार फील्ड से आईं. यानी शार्क वहां भी आवाज़ पकड़ रही थीं, जहां पहले उनकी पहुंच सीमित मानी जाती थी.
शार्क के कान की बनावट क्या कहती है
अब देखते हैं कि शरीर के अंदर शार्क कैसे सुनती हैं. शार्क के कान बाहर से दिखाई नहीं देते. दरअसल उनका कान सिर के अंदर होता है. FAU के मुताबिक इसमें मैक्युला नेग्लेक्टा नाम की एक खास संरचना होती है. आमतौर पर माना जाता है कि यही संरचना आवाज़ से होने वाले कंपन और हलचल को पकड़ती है.
दिलचस्प बात यह है कि शार्क सिर्फ आवाज़ सुन नहीं रही थीं. शोध पत्र के मुताबिक वे 20 से 160 डिग्री तक आवाज़ से दूर मुड़ीं. इसका मतलब है कि उन्हें आवाज़ की दिशा का भी अंदाज़ा था. इस तरह शार्क कैसे सुनती हैं, यह सवाल अब सिर्फ दूरी तक सीमित नहीं रहा.
खुले समुद्र में ड्रोन वाला प्रयोग कैसे हुआ
यह प्रयोग दक्षिण-पूर्व फ्लोरिडा के पाम बीच काउंटी के तटीय पानी में हुआ. दरअसल वहां बड़ी संख्या में ब्लैकटिप शार्क जमा होती हैं. टीम ने लंगर डाली नाव से पानी में स्पीकर छोड़ा. इसके बाद 40 से 50 मीटर ऊंचाई पर उड़ते ड्रोन से शार्क की हरकत रिकॉर्ड की गई.
साथ ही हाइड्रोफोन यानी पानी के अंदर के माइक्रोफोन से अलग-अलग दूरी पर आवाज़ का स्तर मापा गया. फिर वीडियो को फ्रेम-दर-फ्रेम देखकर हर शार्क के मुड़ने का समय और कोण तय किया गया.
धीमी आवाज़ पर ज़्यादा संवेदनशीलता
कुल मिलाकर नतीजों में एक साफ पैटर्न दिखा. खास बात यह रही कि शार्क ने तीनों आवाज़ बैंड पर कम से कम 62 मीटर दूर से प्रतिक्रिया दी. हालांकि सबसे धीमी फ्रीक्वेंसी पर असर सबसे ज़्यादा रहा. शोध पत्र के मुताबिक 100-200 हर्ट्ज़ पर एक शार्क ने 74 मीटर दूर से प्रतिक्रिया दी. वहीं 10 किलोहर्ट्ज़ की तीखी आवाज़ पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दिखी.
FAU के मुताबिक समुद्र में आवाज़ शिकार, शिकारियों और दूसरे जीवों का सुराग देती है. यानी जो चीज़ अभी दिख नहीं रही, उसका पता आवाज़ से चल सकता है.
इस शोध की सीमाएं
फिर भी कुछ बातें ध्यान में रखनी चाहिए. पहली, शोध सिर्फ ब्लैकटिप शार्क पर था. शोध पत्र के मुताबिक पास तैर रही नर्स शार्क ने कोई साफ प्रतिक्रिया नहीं दिखाई. दूसरी, ड्रोन की ऊंचाई की वजह से शार्क की जगह पर कणों की हलचल सीधे नहीं मापी जा सकी. तीसरी, अलग-अलग फ्रीक्वेंसी समूहों में प्रतिक्रियाओं की संख्या बराबर नहीं थी.
शार्क के सुनने पर पाठकों के सवाल
क्या इंसान की आवाज़ से शार्क आकर्षित होती हैं?
फिलहाल इस शोध में इंसानी आवाज़ या तैराकों पर कोई प्रयोग नहीं हुआ. इसलिए इससे ऐसा कोई नतीजा नहीं निकाला जा सकता.
शार्क कैसे सुनती हैं, क्या यह सवाल अब हल हो गया?
पूरी तरह नहीं. यह शोध एक प्रजाति और कुछ आवाज़ बैंड तक सीमित है. आगे दूसरी प्रजातियों और असली समुद्री शोर पर काम की ज़रूरत है.
नोट: यह लेख एक प्रकाशित शोध पत्र और FAU की प्रेस रिलीज़ पर आधारित है. नतीजे खुले समुद्र में एक प्रजाति के व्यवहार पर टिके हैं, इसलिए इन्हें सभी शार्क पर लागू न मानें.
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