हर साल मानसून के बाद गुजरात में एक अनोखा नज़ारा बनता है. कच्छ का सफेद रण दूर तक फैली नमक की चादर जैसा दिखने लगता है. इसी मौसम में यहां रण उत्सव लगता है, जिसका नया सीज़न 1 नवंबर से शुरू हो रहा है. लेकिन इस जगह की कहानी टेंट और तस्वीरों से कहीं पुरानी है.
कच्छ का सफेद रण आखिर है क्या
कच्छ का सफेद रण असल में खारी मिट्टी वाला दलदली मैदान है. इसे ग्रेट रण ऑफ कच्छ कहते हैं, जो करीब 7,500 वर्ग किलोमीटर में फैला है. बारिश में यहां पानी भर जाता है. फिर पानी सूखने पर ज़मीन पर नमक की सफेद परत रह जाती है. यही परत इसे बर्फ जैसा रूप देती है.
रण उत्सव के नए सीज़न की अहम जानकारी
- आयोजन 1 नवंबर 2026 से 7 मार्च 2027 तक चलेगा.
- टेंट सिटी धोरडो गांव में बसती है, जो भुज से करीब 80 से 85 किलोमीटर दूर है.
- संचालन गुजरात टूरिज़्म और इवोक एक्सपीरियंसेज़ मिलकर करते हैं.
- इस बार धोलावीरा के पास 35 मौसमी टेंट जोड़े जा रहे हैं.
बारिश से नमक तक: यह ज़मीन कैसे बनती है
दरअसल ग्रेट रण थार रेगिस्तान के किनारे बसा इलाका है. यह कच्छ जिले से पाकिस्तान सीमा की तरफ तक फैला है. मानसून में इसका बड़ा हिस्सा उथले पानी में डूब जाता है. यानी साल के कुछ महीने यह रेगिस्तान कम और झील जैसा ज़्यादा दिखता है.
इसके बाद धूप और हवा से पानी धीरे-धीरे उड़ जाता है. पीछे खारी मिट्टी और नमक बचता है. नतीजतन सर्दियों तक ज़मीन चमकदार सफेद हो जाती है. यही वजह है कि यहां घूमने का अच्छा मौसम नवंबर से फरवरी के बीच माना जाता है.
साथ ही यह इलाका पक्षियों के लिए भी अहम है. यहां के कीचड़ वाले मैदानों में फ्लेमिंगो के बड़े झुंड अंडे देते हैं. इसलिए पक्षी प्रेमी भी कच्छ का रुख करते हैं.
धोलावीरा: रण के बीच हड़प्पा का शहर
रण की कहानी धोलावीरा के बिना अधूरी है. यूनेस्को के मुताबिक यह हड़प्पा सभ्यता का दक्षिणी केंद्र था. यह शहर खादिर नाम के सूखे टापू पर बसा था. इसका समय करीब 3000 से 1500 ईसा पूर्व के बीच माना जाता है. साल 2021 में इसे विश्व धरोहर सूची में जगह मिली.
खास बात यह है कि यहां पानी बचाने का बहुत सोचा-समझा इंतज़ाम था. यूनेस्को इसकी नगर योजना और जल प्रबंधन को इसकी बड़ी खूबी मानता है. ऐसे में इस बार धोलावीरा के पास टेंट लगना इतिहास पसंद लोगों के लिए अच्छी खबर है. वहीं वहां तक जाने वाली करीब 30 किलोमीटर सीधी सड़क को रोड टू हेवन कहा जाता है.
धोरडो: छोटा गांव, बड़ी पहचान
रण उत्सव की टेंट सिटी धोरडो गांव में लगती है. साल 2023 में संयुक्त राष्ट्र के विश्व पर्यटन संगठन यानी UNWTO ने इसे बेस्ट टूरिज़्म विलेज चुना था. इसका मतलब है कि यह गांव खुद भी देखने लायक ठिकाना है. इसलिए सिर्फ टेंट तक सीमित रहने के बजाय गांव की गलियों और कारीगरों से मिलना भी अच्छा अनुभव हो सकता है.
कारीगरी और लोक संगीत: उत्सव का असली रंग
कच्छ अपनी हस्तकला के लिए जाना जाता है. उत्सव के हाट यानी बाज़ार में इस बार भी कारीगर आएंगे. आयोजकों के मुताबिक यहां अजरख छपाई, बांधनी, कढ़ाई, शीशे का काम और लिप्पन आर्ट मिलेंगे. लिप्पन आर्ट में मिट्टी और छोटे शीशों से दीवार सजाई जाती है.
वहीं संगीत में सिद्दी समुदाय की प्रस्तुति खास रहेगी. सिद्दी गुजरात में बसा अफ्रीकी मूल का समुदाय है. इसके अलावा जोडिया पावा यानी दोहरी बांसुरी, संतार, मंजीरा और मोरचंग जैसे लोक वाद्य भी सुनाई देंगे. आखिर में तारों भरा आसमान देखने का सत्र भी इस बार के कार्यक्रमों में बताया गया है.
कच्छ का सफेद रण देखने से पहले क्या समझें
सबसे पहले परमिट की बात. सफेद रण में जाने के लिए परमिट लेना होता है. कच्छ जिला प्रशासन ने इसके लिए ऑनलाइन व्यवस्था शुरू की थी. इसलिए जाने से पहले गुजरात के आधिकारिक पोर्टल पर मौजूदा नियम देखें.
दूसरी तरफ पूर्णिमा के आसपास यहां भीड़ ज़्यादा रहती है. फिर भी चांदनी में चमकता रण देखने के लिए कई लोग यही समय चुनते हैं. अगर आप शांति चाहते हैं, तो पूर्णिमा से हटकर तारीख चुनना बेहतर रहेगा.
यात्रा की तैयारी के लिए यह छोटी सूची काम आएगी.
- सीज़न, पैकेज और कीमत के लिए पहले आधिकारिक वेबसाइट rannutsav.com देखें.
- धोलावीरा जाना हो तो उसके लिए अलग दिन रखें.
- हस्तशिल्प खरीदते समय कारीगर से सीधे बात करें और काम की बारीकी समझें.
- सर्दियों के हिसाब से गर्म कपड़े साथ रखें.
सफेद रण और रण उत्सव से जुड़े आम सवाल
क्या कच्छ का सफेद रण साल भर सफेद रहता है?
नहीं. मानसून में यहां पानी भर जाता है. सफेद परत पानी सूखने के बाद दिखती है, इसलिए सर्दियों का मौसम सबसे सही माना जाता है.
रण उत्सव और सफेद रण में क्या फर्क है?
सफेद रण एक प्राकृतिक जगह है. वहीं रण उत्सव उसके किनारे लगने वाला मौसमी आयोजन है. इसमें ठहरना, खाना, बाज़ार और सांस्कृतिक कार्यक्रम शामिल होते हैं.
धोलावीरा धोरडो से अलग जगह है?
हां. धोलावीरा खादिर टापू पर है और धोरडो से अलग इलाका है. इसलिए दोनों जगहों के लिए अलग समय निकालकर योजना बनाना ठीक रहेगा.
नोट: जानकारी बदल सकती है. सीज़न की तारीखें, टेंट और परमिट से जुड़ी जानकारी 2 अक्टूबर 2026 को आधिकारिक वेबसाइट, यूनेस्को और रिपोर्टों से जांची गई है. यात्रा से पहले rannutsav.com या गुजरात टूरिज़्म से ताज़ा जानकारी की पुष्टि करें.
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