अभिनेता संजय मिश्रा अब अपने अभिनय सफर को किताब का रूप देंगे। उनकी आत्मकथा का नाम ‘हम सीखते-सीखते रह गए’ है। किताब में उनके जीवन और सिनेमा से जुड़े अनुभव शामिल होंगे। इसमें संघर्ष और करियर के कई अहम पड़ाव भी सामने आएंगे।
किताब में दर्ज होगा लंबा फिल्मी सफर
करीब तीन दशक के करियर में अभिनेता ने कई भूमिकाएं निभाईं। उन्होंने फिल्मों के साथ टेलीविजन पर भी काम किया है। अब वह अपने अनुभवों को लिखित रूप में सामने रखेंगे।
संजय मिश्रा ने बताया है कि किताब में उनकी पूरी यात्रा शामिल होगी। इसमें संघर्ष और करियर से जुड़े अनुभवों का भी जिक्र होगा। पाठकों को उनके सफर के अनदेखे पहलुओं की जानकारी मिलेगी।
‘हम सीखते-सीखते रह गए’ होगा किताब का नाम
अभिनेता ने सोशल मीडिया के जरिए अपनी किताब की जानकारी दी। इस आत्मकथा का शीर्षक ‘हम सीखते-सीखते रह गए’ रखा गया है।
किताब को पेंगुइन स्वदेश से प्रकाशित किया जाएगा। इसके जरिए अभिनेता अपने जीवन के कई अनुभव साझा करेंगे। किताब में सिनेमा से जुड़े संघर्षों पर भी बात होगी।
जनवरी में विश्व पुस्तक मेले में लॉन्च
किताब का विमोचन जनवरी 2027 में होगा। इसे नई दिल्ली के विश्व पुस्तक मेले में लॉन्च किया जाएगा। विश्व पुस्तक मेला 2027 जनवरी में भारत मंडपम में आयोजित होगा।
यह अभिनेता की पहली किताब होगी। इसलिए उनके प्रशंसकों के लिए यह घोषणा खास है। किताब के जरिए उनके फिल्मी सफर को करीब से जानने का मौका मिलेगा।
पिता की यादों को समर्पित की किताब
अभिनेता ने अपनी आत्मकथा अपने दिवंगत पिता को समर्पित की है। उन्होंने राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिलने का भावुक अनुभव भी साझा किया।
उनके पिता का निधन पुरस्कार मिलने से पहले हो चुका था। पुरस्कार मंच पर अपना पूरा नाम सुनकर उन्हें पिता की याद आई। उन्होंने उस पल को अपनी भावनाओं से जोड़कर याद किया।
राष्ट्रीय पुरस्कार के बाद आया ऐलान
फिल्म भक्षक के लिए उन्हें सर्वश्रेष्ठ सहायक अभिनेता का राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। यह सम्मान उनके करीब तीन दशक लंबे करियर का अहम पड़ाव रहा।
पुरस्कार के बाद उन्होंने आत्मकथा लिखने की जानकारी दी। संजय मिश्रा ने बताया कि किताब में संघर्षों और अनुभवों की पूरी कहानी होगी। वह अपने सफर के कई पहलुओं को शब्द देना चाहते हैं।
अभिनय की शुरुआत से पुरस्कार तक
अभिनेता ने नेशनल स्कूल ऑफ ड्रामा से प्रशिक्षण लिया। टेलीविजन के शुरुआती दौर में उन्होंने चाणक्य जैसे प्रोजेक्ट में काम किया। बाद में फिल्मों में भी उनकी लगातार सक्रियता रही।
1995 में ‘ओह डार्लिंग! ये है इंडिया’ से उन्होंने फिल्मी सफर शुरू किया। इसके बाद आंखों देखी, मसान और वध जैसी फिल्मों में काम किया।
इन फिल्मों से मिली अलग पहचान
- आंखों देखी में उनके अभिनय को खूब सराहा गया।
- मसान में उन्होंने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
- वध में उनका किरदार चर्चा में रहा।
- गोलमाल और धमाल में कॉमेडी अंदाज दिखाया।
अभिनय के साथ अब लेखन की नई पारी
- आत्मकथा का नाम ‘हम सीखते-सीखते रह गए’ है।
- किताब पेंगुइन स्वदेश से प्रकाशित होगी।
- जनवरी 2027 में इसका विमोचन होगा।
- किताब दिवंगत पिता को समर्पित की गई है।
इस तरह संजय मिश्रा अब अपने अनुभवों को किताब में दर्ज करेंगे। उनकी आत्मकथा में संघर्ष और सिनेमा दोनों की झलक मिलेगी। किताब जनवरी 2027 में विश्व पुस्तक मेले में आएगी।
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