टॉय स्टोरी 5 रिव्यू: खिलौने बनाम टैबलेट की जंग, अब घर पर हिंदी में

टॉय स्टोरी 5 रिव्यू के लिए खिलौने और टैबलेट का प्रतीकात्मक चित्र

बच्चों के हाथ में फोन और टैबलेट आज हर घर की चिंता है. इसी चिंता को पिक्सार ने एक मज़ेदार कहानी में ढाल दिया है. यह टॉय स्टोरी 5 रिव्यू उन माता-पिता के लिए है जो जानना चाहते हैं कि फिल्म बच्चों को क्या देती है. फिल्म 23 सितंबर 2026 से जियोहॉटस्टार पर हिंदी, अंग्रेज़ी, तमिल और तेलुगु में स्ट्रीम हो रही है. सिनेमाघरों में यह जून में आई थी.

पिक्सार की नई फिल्म पर हमारी राय

टॉय स्टोरी 5 एक प्यारी, हंसाने वाली और सोचने पर मजबूर करने वाली फिल्म है. इसका खलनायक कोई इंसान नहीं, बल्कि बच्चे का नया टैबलेट है. फिल्म स्क्रीन की लत और असली दोस्ती पर हल्के अंदाज़ में बात करती है. पिछली दो फिल्मों जितनी गहरी भले न हो, पर परिवार के साथ देखने लायक ज़रूर है.

फिल्म के तथ्य

1. स्ट्रीमिंग: जियोहॉटस्टार, 23 सितंबर 2026 से.

2. भाषाएं: चार, जिनमें हिंदी शामिल है.

3. निर्देशन: एंड्रयू स्टैंटन, जो पहले भी पिक्सार की कई फिल्मों से जुड़े रहे हैं.

4. अवधि: लगभग 102 मिनट.

5. कहानी: चौथी फिल्म के दो साल बाद की.

6. हमारी रेटिंग: 5 में से 3.5.

खिलौनों की दुनिया में आया ‘लिलीपैड’

कहानी बॉनी नाम की आठ साल की बच्ची की है. उसके माता-पिता सोचते हैं कि टैबलेट से बेटी को दोस्त बनाने में आसानी होगी. वे उसे ‘लिलीपैड’ नाम का टैबलेट दिलाते हैं.

टैबलेट आते ही बॉनी का ध्यान खिलौनों से हट जाता है. खेल, गेम और मैसेज में उसका पूरा दिन गुज़रने लगता है. जेसी और बाकी खिलौने समझ नहीं पाते कि अब क्या करें. वुडी को वापस बुलाया जाता है.

इसके बाद एक पुराने फार्महाउस, भूले हुए खिलौनों और पुराने गैजेट्स की दुनिया सामने आती है. कहानी में बज़ लाइटईयर के कई ‘हमशक्ल’ खिलौनों का एक मज़ेदार हिस्सा भी है.

टॉय स्टोरी 5 रिव्यू: किरदार और अभिनय

जेसी बनी कहानी की धुरी

इस बार जेसी को बड़ी ज़िम्मेदारी मिली है. वह बॉनी के खिलौनों की नेता है. उसका डर है कि बॉनी अब उसे भूल जाएगी. यह डर कहानी को भावनात्मक बनाता है.

वुडी और बज़ की वापसी

वुडी और बज़ की जोड़ी फिर हंसाती है. दोनों के बीच की दोस्ती इस सीरीज़ की जान रही है. इस फिल्म में भी वह गर्माहट बरकरार है.

लिली: खलनायक या गलतफहमी

लिलीपैड का किरदार दिलचस्प है. शुरू में वह खलनायक लगती है. पर धीरे-धीरे पता चलता है कि वह भी बॉनी को खुश देखना चाहती है. बस उसका तरीका गलत है.

एनिमेशन और संगीत

पिक्सार का एनिमेशन हमेशा की तरह शानदार है. खिलौनों की बनावट, रोशनी और रंग बेहद असली लगते हैं. पुराने फार्महाउस के दृश्य खास तौर पर खूबसूरत हैं.

संगीत रैंडी न्यूमैन का है, जो इस सीरीज़ के साथ शुरू से जुड़े रहे हैं. उनकी धुनें पुरानी फिल्मों की याद दिलाती हैं.

कहां पिछड़ती है फिल्म

कुछ समीक्षकों ने कहा कि चौथी फिल्म के बाद कहानी खत्म हो सकती थी. पांचवीं फिल्म कुछ जगहों पर पुरानी बातें दोहराती लगती है. बज़ के साथियों वाली कहानी मुख्य कहानी से थोड़ी कटी हुई लगती है. तीसरी फिल्म जैसा गहरा भावनात्मक असर यहां हर जगह नहीं मिलता.

घरों में स्क्रीन टाइम पर यह फिल्म क्या कहती है

फिल्म का संदेश सीधा है, पर उपदेश जैसा नहीं. टैबलेट बुरा नहीं है, पर वह असली दोस्ती और खेल की जगह नहीं ले सकता.

कहानी में बॉनी की सहेलियां ग्रुप चैट में उसका मज़ाक उड़ाती हैं. यह दृश्य बच्चों पर ऑनलाइन दबाव की सच्चाई दिखाता है. माता-पिता इस मौके का इस्तेमाल बच्चों से ऑनलाइन व्यवहार पर बात करने के लिए कर सकते हैं.

माता-पिता के लिए छोटे सुझाव

  • फिल्म बच्चों के साथ बैठकर देखें, उन्हें अकेले न छोड़ें.
  • फिल्म के बाद पूछें कि उन्हें लिली सही लगी या गलत.
  • घर में रोज़ कुछ समय बिना स्क्रीन के खेलने का नियम बनाएं.
  • पुराने खिलौनों या मिट्टी के खिलौनों से बच्चों को नया खेल सिखाएं.

पहले की फिल्में देखना ज़रूरी है या नहीं

जिन बच्चों ने पिछली चार फिल्में नहीं देखीं, वे भी यह कहानी समझ लेंगे. फिल्म शुरुआत में ही किरदारों का परिचय करा देती है. हां, पुरानी फिल्में देख चुके बड़ों को कई दृश्यों में पुरानी यादें ताज़ा होंगी. वुडी और जेसी के कुछ संवाद पिछली कहानियों की याद दिलाते हैं. अगर समय हो, तो छुट्टियों में पूरी सीरीज़ एक-एक करके देखना बच्चों के लिए मज़ेदार अनुभव हो सकता है. इससे उन्हें किरदारों के बदलते रिश्ते भी समझ आएंगे.

परिवारों के लिए क्यों खास

कई छोटे शहरों में अंग्रेज़ी एनिमेशन फिल्में सिनेमाघरों में कम दिनों तक चलती हैं. हिंदी में ओटीटी पर आने से अब ये फिल्में आसानी से घर-घर पहुंचेंगी. दशहरे और दिवाली की छुट्टियों में बच्चों के लिए यह अच्छा मनोरंजन हो सकता है

टॉय स्टोरी 5 बच्चों को हंसाती है और बड़ों को सोचने पर मजबूर करती है. यह सीरीज़ की सबसे यादगार फिल्म न हो, पर आज के दौर की सबसे ज़रूरी बात कहती है. पूरे परिवार के साथ देखने के लिए यह एक अच्छी पसंद है.

अस्वीकरण: यह समीक्षा लेखक की व्यक्तिगत राय पर आधारित है. दर्शकों का अनुभव अलग हो सकता है. बच्चों के लिए फिल्म चुनते समय माता-पिता अपनी समझ का इस्तेमाल करें.

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