Lust Stories 3 Review की बात करें तो यह एंथोलॉजी चार अलग नजरियों से रिश्तों और इच्छाओं को समझने की कोशिश करती है। फिल्म 18 सितंबर 2026 से Netflix पर स्ट्रीम हो रही है। इसमें विक्रमादित्य मोटवानी, किरण राव, शकुन बत्रा और विशाल भारद्वाज ने चार कहानियां निर्देशित की हैं।
इस बार फिल्म केवल आकर्षण तक सीमित नहीं रहती। कहानियां शादी, अकेलेपन, संवाद की कमी और अपनी इच्छाओं को समझने जैसे पहलुओं को भी छूती हैं। हालांकि, चारों कहानियों का प्रभाव एक जैसा नहीं रहता। कुछ हिस्से ज्यादा सहज लगते हैं, जबकि कुछ जगह कहानी का अंदाजा पहले लग जाता है।
Lust Stories 3 Review में चार अलग कहानियां
चारों फिल्मों की अपनी अलग दुनिया है। कलाकारों और निर्देशकों की शैली भी अलग नजर आती है। इसलिए एंथोलॉजी में एक ही तरह का माहौल लगातार नहीं बनता।
मोटवानी की कहानी सबसे सहज लगती है
विक्रमादित्य मोटवानी की कहानी दो महिलाओं की जिंदगी पर केंद्रित है। राधिका आप्टे और कोंकणा सेन शर्मा अपने रिश्तों में आई दूरी से परेशान हैं। दोनों अपनी इच्छाओं और वैवाहिक जीवन को लेकर खुलकर बात करती हैं।
यह कहानी दोस्ती और शादी के बीच की उलझन को हल्के अंदाज में रखती है। दोनों अभिनेत्रियों का अभिनय कहानी को विश्वसनीय बनाता है। विजय वर्मा भी अपने किरदार में प्रभाव छोड़ते हैं।
किरण राव की कहानी में मुंबई का रंग
किरण राव की कहानी करण और लिसा के आसपास घूमती है। करण पिज्जा डिलीवरी का काम करता है। लिसा मुंबई में अपने सपनों को पूरा करने आई है।
गुरफतेह पीरजादा और सना थंपी ने युवा किरदारों को निभाया है। कहानी में मुंबई की भागदौड़ और बेहतर जिंदगी की चाह दिखाई देती है। हालांकि, आगे बढ़ते हुए कुछ मोड़ अनुमान के करीब पहुंच जाते हैं।
शकुन बत्रा ने रिश्तों की खामोशी दिखाई
अली फजल और राधिका मदान की कहानी एक ऐसे रिश्ते को दिखाती है, जिसमें संवाद लगातार कमजोर होता गया है। दोनों किरदारों के बीच आकर्षण मौजूद है। इसके बावजूद वे अपनी वास्तविक परेशानियों पर बात नहीं कर पाते।
यह हिस्सा शादी में बढ़ती भावनात्मक दूरी पर ध्यान देता है। दोनों कलाकारों ने रिश्ते की खटास और बची हुई नजदीकी को सहजता से पेश किया है।
विशाल भारद्वाज की कहानी में दिखी अलग चमक
विशाल भारद्वाज की कहानी 1980 के दशक के हैदराबाद में रखी गई है। इसमें अदिति राव हैदरी और सिद्धार्थ मुख्य भूमिका में हैं। कहानी शादी और व्यक्तिगत इच्छाओं के बीच के तनाव को सामने लाती है।
अदिति और सिद्धार्थ की केमिस्ट्री इस हिस्से को खास बनाती है। फिल्म में हास्य और भावनात्मक क्षणों का भी संतुलन दिखाई देता है।
अभिनय और निर्देशन में कितना दम?
Lust Stories 3 Review में अभिनय फिल्म की मजबूत परतों में शामिल है। कोंकणा सेन शर्मा और राधिका आप्टे के हिस्से में खास भावनात्मक बारीकियां हैं। वहीं, अदिति राव हैदरी और सिद्धार्थ अपनी कहानी के माहौल में सहज लगते हैं।
निर्देशकों ने इच्छा को केवल शारीरिक आकर्षण के रूप में नहीं दिखाया। कहानियां अकेलेपन और रिश्तों में संवाद की कमी तक जाती हैं। फिर भी सभी हिस्से समान गहराई हासिल नहीं कर पाते।
चार कहानियों की अपनी अलग पहचान
- मोटवानी की कहानी शादी और दोस्ती के बीच की दूरी दिखाती है।
- किरण राव का हिस्सा मुंबई और युवा सपनों से जुड़ा है।
- शकुन बत्रा ने रिश्तों में संवाद की कमी को केंद्र बनाया है।
- विशाल भारद्वाज ने कहानी को पुराने हैदराबाद की पृष्ठभूमि दी है।
फिल्म में क्या काम करता है?
- चारों कहानियों का ट्रीटमेंट एक-दूसरे से अलग है।
- कलाकारों ने अपने किरदारों को सहजता से निभाया है।
- महिला पात्रों की इच्छाओं को कहानी का अहम हिस्सा बनाया गया है।
- कुछ हिस्सों में हास्य और भावनाओं का अच्छा संतुलन मिलता है।
कुल मिलाकर, Lust Stories 3 Review में चार अलग कहानियों का अनुभव मिलता है। फिल्म हर हिस्से में समान असर नहीं छोड़ती। फिर भी रिश्तों और इच्छाओं को अलग नजरियों से देखने की कोशिश इसे पिछली फिल्मों से अलग पहचान देती है।
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