एस्टोनिया हथियार सौदा को लेकर विवाद के बीच भारत ने स्थिति स्पष्ट की है। रक्षा मंत्रालय ने नेको डिफेंस से संबंध होने से इनकार किया है। मंत्रालय के अनुसार, कंपनी ने भारतीय सशस्त्र बलों को कोई आपूर्ति नहीं की है। रक्षा मंत्रालय के साथ भी कंपनी का कोई लेनदेन नहीं है।
यह सफाई यूक्रेन भेजे जाने वाले तोप के गोलों से जुड़े विवाद के बीच आई है। रिपोर्टों में एस्टोनिया की खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठाए गए हैं। इसके अलावा, वित्तीय प्रबंधन को लेकर भी चर्चा हुई है।
रक्षा मंत्रालय ने नेको डिफेंस को लेकर क्या कहा?
रक्षा अधिकारियों के अनुसार, नेको डिफेंस का भारतीय सशस्त्र बलों के साथ कोई आपूर्ति आदेश नहीं है। कंपनी का रक्षा मंत्रालय के साथ भी कोई कारोबारी संबंध नहीं बताया गया है।
कंपनी की वेबसाइट पर राज्य पुलिस बलों को उपकरण देने की जानकारी मौजूद है। हालांकि, रक्षा मंत्रालय के साथ किसी लेनदेन की पुष्टि नहीं हुई है।
इसलिए भारत की रक्षा खरीद और कंपनी की विदेशी गतिविधियों को अलग-अलग देखना जरूरी है।
एस्टोनिया हथियार सौदे में नेको डिफेंस की भूमिका
एस्टोनिया हथियार सौदे से जुड़ी जानकारी में नेको डिफेंस का नाम सामने आया है। यह समूह नागपुर स्थित इस्पात कारोबार से जुड़ा बताया जाता है। कंपनी ने हाल में इटली की डाटासेल कंपनी का अधिग्रहण किया है।
डाटासेल छोटे हथियारों और गोला-बारूद के निर्माण से जुड़ी है। वहीं, नेको डिफेंस की रोमानिया में भी एक विनिर्माण इकाई है।
इसी इकाई का एस्टोनिया से जुड़े एक अनुबंध में नाम सामने आया है। इस अनुबंध का संबंध तोप के गोलों से बताया गया है। इन गोलों को आगे यूक्रेन भेजे जाने की योजना है।
यूक्रेन को गोला-बारूद भेजने का विवाद क्या है?
विवाद एस्टोनिया द्वारा यूक्रेन के लिए गोला-बारूद खरीदने से जुड़ा है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, इस खरीद में यूरोपीय फंड का इस्तेमाल हुआ था।
इसी वजह से खरीद प्रक्रिया पर सवाल उठे। आरोप है कि कुछ गोले ऐसी कंपनियों से खरीदे गए। इन कंपनियों के पास पहले ऐसा हथियार बनाने का अनुभव नहीं था।
एस्टोनिया सरकार ने वर्ष 2024 में यह खरीद समझौता किया था। इसके लिए यूरोपीय संघ की यूरोपीय शांति सुविधा से अग्रिम राशि मिली थी।
एस्टोनिया हथियार सौदा के रक्षा मंत्री ने क्यों दिया इस्तीफा?
एस्टोनिया के तत्कालीन रक्षा मंत्री हानो पेवकुर ने 2 सितंबर को इस्तीफे की घोषणा की थी। यह घटनाक्रम गोला-बारूद खरीद विवाद के बीच हुआ।
करीब 7.7 करोड़ यूरो के सौदे को लेकर सवाल उठे थे। भारतीय मुद्रा में इसकी राशि लगभग 769 करोड़ रुपये बताई गई।
वहीं, रक्षा क्षेत्र में वित्तीय प्रबंधन भी सवालों के घेरे में आया। इसके कारण यह मामला राजनीतिक और प्रशासनिक स्तर पर चर्चा में रहा।
एस्टोनिया हथियार सौदा और भारत के बीच क्या संबंध है?
इस मामले में भारत की भूमिका को लेकर भी सवाल उठे। हालांकि, रक्षा अधिकारियों ने स्थिति स्पष्ट की है।
अधिकारियों के अनुसार, नेको डिफेंस ने भारत को कोई रक्षा आपूर्ति नहीं की है। कंपनी का रक्षा मंत्रालय के साथ भी कोई कारोबारी लेनदेन नहीं बताया गया है।
वहीं, कंपनी की रोमानिया इकाई का एस्टोनिया से जुड़ा अनुबंध अलग मामला है। इसमें तोप के गोलों को भरने से जुड़ा काम होने की जानकारी है।
इसलिए विदेशी कारोबार और भारत की रक्षा खरीद को अलग रखना जरूरी है।
एस्टोनिया हथियार सौदा की आपूर्ति में तथ्य क्यों जरूरी हैं?
अंतरराष्ट्रीय रक्षा सौदों में कई देश और कंपनियां शामिल हो सकती हैं। इसलिए किसी कंपनी की विदेशी गतिविधि को सीधे सरकारी खरीद से जोड़ना सही नहीं है।
एस्टोनिया हथियार सौदा मामले में भी भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट की है। रक्षा मंत्रालय ने नेको डिफेंस के साथ किसी रक्षा लेनदेन से इनकार किया है।
हालांकि, विदेशी इकाई के अनुबंध से जुड़े तथ्य अलग हैं। इसलिए पूरे मामले को समझने के लिए सभी पक्षों की भूमिका देखना जरूरी है।
एक नजर में
- एस्टोनिया के गोला-बारूद सौदे पर विवाद सामने आया।
- भारत ने नेको डिफेंस से रक्षा संबंध होने से इनकार किया।
- कंपनी ने भारतीय सशस्त्र बलों को आपूर्ति नहीं की है।
- रक्षा मंत्रालय के साथ लेनदेन की बात भी नकारी गई।
- नेको डिफेंस की रोमानिया इकाई का अनुबंध सामने आया।
- अनुबंध का संबंध एस्टोनिया को तोप के गोलों से बताया गया।
- इन गोलों को आगे यूक्रेन भेजने की योजना है।
- हानो पेवकुर ने रक्षा मंत्री पद से इस्तीफा दिया।
मुख्य बातें
- भारत: रक्षा मंत्रालय ने नेको डिफेंस से लेनदेन से इनकार किया।
- नेको डिफेंस: भारतीय सशस्त्र बलों को आपूर्ति नहीं की।
- रोमानिया: कंपनी की इकाई का एस्टोनिया से अनुबंध बताया गया।
- एस्टोनिया: यूक्रेन के लिए गोला-बारूद खरीद से जुड़ा विवाद।
- यूक्रेन: खरीदे गए तोप के गोलों को भेजने की योजना।
- विवाद: खरीद प्रक्रिया और वित्तीय प्रबंधन पर सवाल।
कुल मिलाकर, एस्टोनिया हथियार सौदा विवाद में भारत ने अपनी स्थिति स्पष्ट कर दी है। रक्षा मंत्रालय ने नेको डिफेंस से किसी रक्षा लेनदेन से इनकार किया है। वहीं, कंपनी की विदेशी इकाई से जुड़े अनुबंध की जानकारी अलग संदर्भ में सामने आई है।
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