हरेली तिहार 2026 के अवसर पर नवा रायपुर स्थित मुख्यमंत्री निवास छत्तीसगढ़ की लोक संस्कृति, कृषि परंपरा और ग्रामीण जीवन का केंद्र बन गया। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने भगवान शिव, गौमाता और कृषि औजारों की पूजा कर प्रदेश में अच्छी वर्षा, भरपूर फसल और किसानों की समृद्धि की कामना की। कार्यक्रम में लोककला, पारंपरिक खेल, पौधरोपण और आधुनिक कृषि तकनीक का सुंदर समन्वय देखने को मिला।
मुख्य बातें
- मुख्यमंत्री ने कृषि औजारों और गौवंश की पूजा की।
- पारिजात का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया।
- किसान को हार्वेस्टर सब्सिडी के रूप में 16 लाख रुपये का चेक मिला।
- ड्रोन दीदी की सफलता को सराहा गया।
- लोकगीत, लोकनृत्य और पारंपरिक खेल बने आकर्षण का केंद्र।
हरेली तिहार 2026 में संस्कृति और खेती का अनूठा संगम
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय पारंपरिक वेशभूषा में विधानसभा अध्यक्ष डॉ. रमन सिंह के साथ पिंक ऑटो से कार्यक्रम स्थल पहुंचे। इस अनोखे स्वागत ने आयोजन को और यादगार बना दिया।
कार्यक्रम की शुरुआत गौरी-गणेश, नवग्रह और भगवान शिव की पूजा से हुई। इसके बाद मुख्यमंत्री ने नांगर, कुदाल, रापा और अन्य कृषि औजारों का विधि-विधान से पूजन किया। उन्होंने कहा कि हरेली प्रकृति, पशुधन और खेती-किसानी के प्रति आभार व्यक्त करने का पर्व है।
हरेली तिहार 2026 में किसानों और आधुनिक कृषि को मिला सम्मान
मुख्यमंत्री ने रायपुर के किसान इंद्र कुमार वर्मा को हार्वेस्टर खरीदने के लिए 16 लाख रुपये की सब्सिडी का चेक सौंपा। उन्होंने कहा कि आधुनिक कृषि यंत्र किसानों की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने में सहायक हैं।
कार्यक्रम में ड्रोन दीदी चंद्रकली वर्मा से भी संवाद किया गया। उन्होंने बताया कि ड्रोन तकनीक से अब तक ढाई हजार एकड़ से अधिक खेतों में छिड़काव कर चुकी हैं। इस कार्य से उन्होंने दो वर्षों में लगभग सात लाख रुपये की आय अर्जित की है।
गौ पूजा और पौधरोपण से दिया प्रकृति संरक्षण का संदेश
मुख्यमंत्री ने गौशाला पहुंचकर गौमाता की पूजा की। उन्होंने गाय और बछड़ों को हरा चारा, चना-गुड़ और पारंपरिक लोंदी खिलाई। उन्होंने कहा कि पशुधन ग्रामीण अर्थव्यवस्था की महत्वपूर्ण कड़ी है।
इसके साथ मुख्यमंत्री और विधानसभा अध्यक्ष ने पारिजात का पौधा लगाकर पर्यावरण संरक्षण का संदेश दिया। विभिन्न मंत्रियों और जनप्रतिनिधियों ने भी पौधरोपण अभियान में भाग लिया।
लोक संस्कृति और पारंपरिक खेलों ने बढ़ाई आयोजन की रौनक
मुख्यमंत्री निवास को नीम, आम की पत्तियों और पारंपरिक सजावट से आकर्षक रूप दिया गया था। गेड़ी, बिल्लस, गोटी, बाटी और रहचुली जैसे ग्रामीण खेलों ने सभी का ध्यान आकर्षित किया।
लोक कलाकारों ने मांदर और ढोलक की थाप पर मनमोहक प्रस्तुतियां दीं। मुख्यमंत्री भी कलाकारों के साथ लोकधुनों पर शामिल हुए। ठेठरी, खुरमी, बड़ा और अन्य छत्तीसगढ़ी व्यंजनों ने आयोजन में पारंपरिक स्वाद जोड़ा।
एक नजर में
- कृषि औजारों और गौमाता की पूजा सम्पन्न।
- किसान को 16 लाख रुपये की हार्वेस्टर सब्सिडी।
- ड्रोन तकनीक अपनाने वाली महिला किसान का सम्मान।
- पारिजात पौधरोपण से हरियाली का संदेश।
- लोकनृत्य, लोकगीत और पारंपरिक खेलों का आयोजन।
हरेली ने दिया संस्कृति और विकास का संदेश
हरेली तिहार 2026 ने एक बार फिर यह संदेश दिया कि छत्तीसगढ़ की पहचान उसकी कृषि, संस्कृति और प्रकृति से जुड़ी हुई है। पारंपरिक विरासत के साथ आधुनिक कृषि तकनीक को जोड़ने की पहल किसानों के लिए नए अवसर तैयार कर रही है। हरेली तिहार 2026 का यह आयोजन संस्कृति संरक्षण, पर्यावरण संवर्धन और ग्रामीण विकास का प्रेरक उदाहरण बनकर सामने आया।
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