राष्ट्रपति भवन में आयोजित विशेष समारोह में छत्तीसगढ़ के 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का भव्य स्वागत किया गया। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में पहुंचे प्रतिनिधिमंडल में जनजातीय प्रतिनिधि, पद्मश्री सम्मानित विभूतियां, कलाकार और प्रशासनिक अधिकारी शामिल रहे। बस्तर पंडुम ने इस अवसर पर राज्य की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय मंच पर नई पहचान दिलाई।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने सभी अतिथियों से आत्मीय संवाद किया। उन्होंने स्वयं प्रतिनिधियों को भोजन परोसकर सम्मानित किया। यह दृश्य राष्ट्रपति भवन के इतिहास में विशेष महत्व का माना गया। उन्होंने कहा कि बस्तर की संस्कृति भारत की अमूल्य धरोहर है।
मुख्य बातें
- राष्ट्रपति भवन में 209 सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल का सम्मान हुआ।
- राष्ट्रपति ने स्वयं अतिथियों को भोजन परोसा।
- राष्ट्रपति ने बस्तर दशहरा में आने की इच्छा जताई।
- मुख्यमंत्री ने 300 वर्ष पुरानी झिटकू-मिटकी कलाकृति भेंट की।
- केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने आयोजन की सराहना की।
बस्तर पंडुम से संस्कृति, पर्यटन और विकास को नई गति
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने कहा कि बस्तर पंडुम जनजातीय संस्कृति, लोककला और परंपराओं का जीवंत उत्सव है। उन्होंने विश्वास जताया कि ऐसे आयोजन युवाओं को अपनी जड़ों से जोड़ेंगे। साथ ही पर्यटन और स्थानीय रोजगार को भी बढ़ावा मिलेगा।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कहा कि बस्तर अब शांति, विकास और सांस्कृतिक पुनर्जागरण की नई पहचान बना रहा है। उन्होंने राष्ट्रपति को बस्तर आने का निमंत्रण भी दिया। राष्ट्रपति ने भविष्य में बस्तर दशहरा और सांस्कृतिक कार्यक्रमों में शामिल होने की इच्छा व्यक्त की।
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने कहा कि पहली बार राष्ट्रपति भवन में बस्तर की पारंपरिक वेशभूषा में इतना बड़ा जनजातीय प्रतिनिधिमंडल देखने को मिला। उन्होंने इसे भारत की सांस्कृतिक विविधता का अनूठा उदाहरण बताया।
राष्ट्रपति को भेंट की गई ऐतिहासिक कलाकृति
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति को बस्तर की 300 वर्ष पुरानी लोकगाथा ‘झिटकू-मिटकी’ पर आधारित विशेष कलाकृति भेंट की। यह कलाकृति प्रेम, समर्पण और जनजातीय परंपराओं का प्रतीक मानी जाती है। प्रतिनिधिमंडल ने राष्ट्रपति भवन का भ्रमण भी किया और लोकतांत्रिक विरासत से जुड़े महत्वपूर्ण स्थलों की जानकारी प्राप्त की।
एक नजर में
- राष्ट्रपति ने जनजातीय नेतृत्व व्यवस्था की सराहना की।
- मांझी-चालकी प्रणाली को सामाजिक एकता का आधार बताया।
- बस्तर की सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण पर जोर दिया।
- प्रतिनिधिमंडल में कलाकार, जनप्रतिनिधि और अधिकारी शामिल रहे।
- आयोजन ने बस्तर की सकारात्मक छवि को राष्ट्रीय स्तर पर मजबूत किया।
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