पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह से जुड़े कोयला आवंटन मामला में सुप्रीम कोर्ट ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। अदालत ने सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार करते हुए उनके खिलाफ लंबित आपराधिक कार्यवाही समाप्त कर दी। साथ ही 2015 में विशेष सीबीआई अदालत द्वारा जारी समन को भी रद्द कर दिया गया। यह फैसला पूर्व प्रधानमंत्री के निधन के लगभग 19 महीने बाद आया है।
सीबीआई ने जांच के दौरान कहा था कि डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ मुकदमा चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य उपलब्ध नहीं हैं। इसी आधार पर अदालत ने केस बंद करने की अनुमति दी।
कोयला आवंटन मामला क्या है?
कोयला आवंटन मामला देश के सबसे चर्चित मामलों में शामिल रहा है। यह विवाद 1993 से 2010 के बीच कोयला ब्लॉकों के आवंटन प्रक्रिया से जुड़ा था। नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (सीएजी) की रिपोर्ट में कहा गया था कि कई कोयला ब्लॉक प्रतिस्पर्धी नीलामी के बजाय स्क्रीनिंग समिति की सिफारिशों के आधार पर आवंटित किए गए।
रिपोर्ट में पारदर्शी प्रक्रिया नहीं अपनाने से सरकारी खजाने को संभावित नुकसान होने का अनुमान जताया गया था। इसके बाद पूरे मामले की जांच सीबीआई को सौंपी गई।
मनमोहन सिंह पर क्या आरोप लगे थे?
पूर्व प्रधानमंत्री उस समय कोयला मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे थे। इसलिए कोयला आवंटन मामला में उन पर निर्णय प्रक्रिया से जुड़े सवाल उठे।
मुख्य आरोप ओडिशा के तालाबिरा-II कोयला ब्लॉक के आवंटन से संबंधित था। जांच एजेंसियों ने यह भी देखा कि क्या आवंटन प्रक्रिया से किसी निजी कंपनी को अनुचित लाभ मिला था। वर्ष 2015 में विशेष सीबीआई अदालत ने आपराधिक साजिश और भ्रष्टाचार से जुड़े प्रावधानों के तहत समन जारी किया था।
सीबीआई जांच में क्या सामने आया?
सीबीआई ने विस्तृत जांच के बाद निष्कर्ष निकाला कि डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ अभियोजन चलाने के लिए पर्याप्त साक्ष्य नहीं हैं। एजेंसी ने दो बार क्लोजर रिपोर्ट दाखिल कर केस बंद करने की सिफारिश की।
हालांकि, विशेष सीबीआई अदालत ने उस समय क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार नहीं की। इसके बाद सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया।
कोयला आवंटन मामला पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला
सुप्रीम कोर्ट ने माना कि जब जांच एजेंसी ने पर्याप्त साक्ष्य नहीं पाए, तब निचली अदालत के पास क्लोजर रिपोर्ट खारिज करने का पर्याप्त आधार नहीं था।
अदालत ने 2015 का समन रद्द करते हुए सीबीआई की रिपोर्ट स्वीकार कर ली। इसके साथ ही कोयला आवंटन मामला में डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ सभी आपराधिक कार्यवाही औपचारिक रूप से समाप्त हो गई।
मुख्य बातें
- सुप्रीम कोर्ट ने 2015 का समन रद्द किया।
- सीबीआई की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार की गई।
- पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ केस बंद हुआ।
- जांच में अभियोजन योग्य साक्ष्य नहीं मिले।
- निचली अदालत के आदेश को असंगत माना गया।
फैसले से जुड़े अहम तथ्य
- मामला कोयला ब्लॉक आवंटन प्रक्रिया से जुड़ा था।
- सीएजी रिपोर्ट के बाद जांच शुरू हुई।
- सीबीआई ने दो बार क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की।
- सुप्रीम कोर्ट ने जांच एजेंसी के निष्कर्षों को स्वीकार किया।
- पूर्व प्रधानमंत्री के खिलाफ सभी कार्यवाही समाप्त कर दी गई।
यह भी पढ़ें: लोकसभा 2 बजे तक स्थगित, राज्यसभा में विपक्ष का वॉकआउट
जज़्बा पुलिस अवार्ड्स 2026: मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने साहस को किया सलाम