छत्तीसगढ़ क्राइम डेटा ने राज्य की कानून-व्यवस्था को लेकर नई चर्चा शुरू कर दी है। विधानसभा के मानसून सत्र में गृह विभाग ने अपराधों से जुड़े ताजा आंकड़े पेश किए। रिपोर्ट के अनुसार, हत्या और लूट के कुछ मामलों में कमी आई है। हालांकि, अपहरण के मामलों में कई जिलों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई। इसलिए बड़े शहरों की सुरक्षा व्यवस्था पर नए सवाल खड़े हुए हैं।
मुख्य बातें
- रायपुर में अपहरण के मामले 524 से बढ़कर 634 हुए।
- बिलासपुर और दुर्ग में भी अपहरण के मामलों में वृद्धि दर्ज हुई।
- कुछ जिलों में हत्या और लूट के मामलों में कमी आई।
- सरकार ने अपराध नियंत्रण के लिए कई विशेष अभियान चलाने का दावा किया।
- हिरासत में मौत के मामले सीमित जिलों तक रहे।
रायपुर सहित बड़े शहरों में बढ़ा अपराध का दबाव
विधानसभा में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार राजधानी रायपुर अपहरण के मामलों में सबसे आगे रही। वर्ष 2024-25 में यहां 524 मामले दर्ज हुए थे। वहीं 2025-26 में यह संख्या बढ़कर 634 पहुंच गई।
बिलासपुर में अपहरण के मामले 331 से बढ़कर 438 हो गए। दूसरी ओर दुर्ग में यह आंकड़ा 229 से बढ़कर 365 दर्ज किया गया। इससे स्पष्ट है कि शहरी क्षेत्रों में गंभीर अपराधों का दबाव अभी भी बना हुआ है।
छत्तीसगढ़ क्राइम डेटा में हत्या और लूट के आंकड़े
छत्तीसगढ़ क्राइम डेटा के अनुसार हत्या के मामलों में मिश्रित तस्वीर सामने आई। रायपुर में हत्या के मामले 85 से घटकर 84 हुए। बिलासपुर में यह संख्या 59 से घटकर 50 रही।
हालांकि दुर्ग में हत्या के मामले 53 से बढ़कर 60 हो गए। बलौदाबाजार और कोरिया में भी वृद्धि दर्ज की गई। वहीं लूट के मामलों में रायपुर और दुर्ग को कुछ राहत मिली। दूसरी ओर बिलासपुर और बलौदाबाजार में लूट की घटनाएं बढ़ीं।
सरकार ने क्या कहा?
उप मुख्यमंत्री एवं गृह मंत्री विजय शर्मा ने विधानसभा में बताया कि अपराध नियंत्रण के लिए पुलिस लगातार कार्रवाई कर रही है। गंभीर मामलों की समयबद्ध जांच और शीघ्र चालान पेश करने के निर्देश दिए गए हैं।
इसके अलावा महिला थाना, साइबर थाना, सामुदायिक पुलिसिंग, जन चौपाल और बीट व्यवस्था को मजबूत किया जा रहा है। महिलाओं और बच्चों की सुरक्षा के लिए ‘हेलो सिस्टर’ अभियान तथा ‘अभिव्यक्ति’ मोबाइल ऐप भी संचालित किए जा रहे हैं।
एक नजर में अपराध की स्थिति
- रायपुर, बिलासपुर और दुर्ग अपराध के मामलों में शीर्ष पर रहे।
- आदिवासी बहुल जिलों में गंभीर अपराध अपेक्षाकृत कम दर्ज हुए।
- हिरासत में मौत के केवल कुछ मामले सामने आए।
- पुलिस ने निगरानी और गश्त बढ़ाने का दावा किया।
- अपराध रोकने के लिए तकनीक आधारित निगरानी पर जोर दिया जा रहा है।
छत्तीसगढ़ क्राइम डेटा से क्या संकेत मिलते हैं?
छत्तीसगढ़ क्राइम डेटा यह संकेत देता है कि राज्य के बड़े शहरों में अपहरण जैसी गंभीर घटनाएं चिंता का विषय बनी हुई हैं। हालांकि हत्या और लूट के कुछ मामलों में सुधार दिखाई देता है। दूसरी ओर सरकार अपराध नियंत्रण के लिए विभिन्न योजनाओं और निगरानी तंत्र को मजबूत करने का दावा कर रही है। आने वाले समय में इन उपायों के वास्तविक परिणामों पर सभी की नजर रहेगी।
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