देश में ग्रामीण रोजगार व्यवस्था को नया स्वरूप देने के उद्देश्य से VB G-RAM-G कानून लागू कर दिया गया है। इसके साथ ही लंबे समय तक लागू रहा मनरेगा कानून अब समाप्त हो गया है। केंद्र सरकार का लक्ष्य वर्ष 2047 तक विकसित भारत के विजन के अनुरूप एक मजबूत ग्रामीण विकास मॉडल तैयार करना है, जिसमें रोजगार के साथ-साथ स्थायी परिसंपत्तियों का निर्माण, तकनीकी निगरानी और पारदर्शिता को प्राथमिकता दी गई है।
नए कानून का उद्देश्य क्या है?
VB G-RAM-G कानून केवल रोजगार उपलब्ध कराने तक सीमित नहीं है। इसका मकसद गांवों में जल संरक्षण, कृषि, बुनियादी ढांचे, आजीविका और आपदा प्रबंधन जैसे क्षेत्रों में दीर्घकालिक विकास सुनिश्चित करना है। इसके तहत अकुशल श्रमिकों वाले ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के रोजगार की गारंटी दी जाएगी।
किन क्षेत्रों पर रहेगा सबसे ज्यादा फोकस?
जल संरक्षण और पर्यावरण
गांवों में जल संरक्षण, सिंचाई, भूजल पुनर्भरण, तालाबों का पुनर्जीवन और वनीकरण जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी।
ग्रामीण इंफ्रास्ट्रक्चर
ग्रामीण सड़कें, सार्वजनिक भवन, स्कूल, स्वच्छता व्यवस्था, सौर ऊर्जा परियोजनाएं और आवास निर्माण पर विशेष जोर रहेगा।
कृषि और आजीविका
कृषि, मत्स्य पालन, भंडारण, ग्रामीण बाजार और कौशल विकास को रोजगार योजना से जोड़ा जाएगा ताकि ग्रामीणों की आय बढ़ सके।
आपदा प्रबंधन
बाढ़ सुरक्षा, तटबंध, राहत शिविर, पुनर्वास कार्य और जंगल की आग से बचाव जैसी परियोजनाएं भी योजना का हिस्सा होंगी।
मनरेगा और VB G-RAM-G कानून में क्या अंतर है?
रोजगार अवधि
मनरेगा में 100 दिनों का रोजगार मिलता था, जबकि VB G-RAM-G कानून के तहत यह बढ़ाकर 125 दिन कर दिया गया है।
फंडिंग मॉडल
अब केंद्र और राज्य सरकारें तय अनुपात में खर्च साझा करेंगी। सामान्य राज्यों के लिए 60:40 और पूर्वोत्तर व हिमालयी राज्यों के लिए 90:10 का प्रावधान रखा गया है।
विकास मॉडल
जहां मनरेगा मुख्य रूप से मजदूरी आधारित कार्यों तक सीमित था, वहीं नया कानून जल, कृषि, आपदा प्रबंधन और ग्रामीण कनेक्टिविटी जैसे चार प्रमुख क्षेत्रों पर आधारित विकास मॉडल अपनाता है।
कृषि सीजन में व्यवस्था
राज्य सरकारें बुवाई और कटाई के मौसम में अधिकतम 60 दिनों तक कार्यों पर अस्थायी रोक लगा सकेंगी।
तकनीक से होगी पूरी निगरानी
VB G-RAM-G कानून में पहली बार डिजिटल गवर्नेंस को अनिवार्य बनाया गया है। इसके तहत—
- बायोमेट्रिक उपस्थिति
- GPS आधारित कार्य योजना
- मोबाइल ऐप से रिपोर्टिंग
- रियल-टाइम डैशबोर्ड
- AI आधारित विश्लेषण
- सोशल ऑडिट
जैसी व्यवस्थाएं लागू होंगी। इससे फर्जी भुगतान और अनियमितताओं पर रोक लगाने का प्रयास किया जाएगा।
ग्राम पंचायतों की भूमिका कैसे बदलेगी?
नई व्यवस्था में ग्राम पंचायतें विकसित ग्राम पंचायत योजना तैयार करेंगी। इन योजनाओं को GPS मैपिंग और पीएम गति शक्ति प्लेटफॉर्म से जोड़ा जाएगा। इसके बाद केंद्र और राज्य सरकारें संयुक्त रूप से परियोजनाओं की मंजूरी और फंड आवंटन करेंगी।
राज्यों को मिलेगी ज्यादा जिम्मेदारी
अब राज्यों को स्थानीय जरूरतों के अनुसार जिलों और ग्राम पंचायतों के बीच फंड का पारदर्शी वितरण करना होगा। इससे क्षेत्रीय विकास प्राथमिकताओं के आधार पर संसाधनों का बेहतर उपयोग संभव होगा।
सरकार ने नया कानून क्यों लागू किया?
सरकार के अनुसार कई राज्यों में मनरेगा के तहत फर्जी जॉब कार्ड, कागजों पर काम, मशीनों से कार्य कराकर मजदूरी भुगतान और फंड के दुरुपयोग जैसी शिकायतें सामने आई थीं। इन्हीं कमियों को दूर करने के लिए VB G-RAM-G कानून लाया गया है, जिसमें तकनीकी निगरानी, सोशल ऑडिट और पारदर्शिता पर विशेष जोर दिया गया है।
यह भी पढ़ें: Khan Sir जमानत केस में अगली सुनवाई कब, जानिए पूरा अपडेट