कांकेर की पुरानी कचहरी अब केवल एक ऐतिहासिक धरोहर नहीं, बल्कि शिक्षा और करियर निर्माण का प्रमुख केंद्र बन चुकी है। जिला प्रशासन की पहल से यहां संचालित सेंट्रल लाइब्रेरी-सह-मावा मोदोल में प्रतिदिन करीब एक हजार विद्यार्थी अध्ययन कर रहे हैं। शांत वातावरण, आधुनिक सुविधाएं और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए उपलब्ध संसाधन युवाओं को अपने लक्ष्य तक पहुंचने में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान कर रहे हैं।
प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी का बना पसंदीदा केंद्र
पुरानी कचहरी परिसर में छत्तीसगढ़ लोक सेवा आयोग सहित विभिन्न प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए विशेष कक्षाएं आयोजित की जा रही हैं। उपनिरीक्षक भर्ती परीक्षा के लिए मैराथन क्लासेस भी संचालित हो रही हैं। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन और बेहतर अध्ययन वातावरण का लाभ बड़ी संख्या में अभ्यर्थी उठा रहे हैं। यही कारण है कि यह केंद्र युवाओं के बीच लगातार लोकप्रिय होता जा रहा है।
89 युवाओं ने हासिल की सरकारी नौकरी
इस अध्ययन केंद्र की सबसे बड़ी उपलब्धि यह है कि पुरानी कचहरी में पढ़ाई करने वाले 89 युवाओं ने विभिन्न शासकीय सेवाओं में सफलता हासिल की है। यह उपलब्धि बताती है कि सही मार्गदर्शन और बेहतर संसाधन मिलने पर ग्रामीण और आदिवासी अंचल के विद्यार्थी भी बड़े लक्ष्य प्राप्त कर सकते हैं। जिला प्रशासन इस मॉडल को और अधिक मजबूत बनाने की दिशा में कार्य कर रहा है।
शिक्षा के साथ संस्कृति का भी संरक्षण
पुरानी कचहरी परिसर में स्थापित कोयाबाना आदिवासी संग्रहालय स्थानीय जनजातीय संस्कृति और परंपराओं को संरक्षित करने का महत्वपूर्ण कार्य कर रहा है। यहां गोंडी और हल्बी भाषा का प्रशिक्षण भी दिया जा रहा है। लगभग 80 विद्यार्थी इन भाषाओं का अध्ययन कर अपनी सांस्कृतिक विरासत से जुड़ रहे हैं, जिससे स्थानीय पहचान और परंपराओं को नई पीढ़ी तक पहुंचाने में मदद मिल रही है।
शिक्षा और विरासत का अनूठा संगम
हरियाली, ऐतिहासिक प्रवेश द्वार और सुव्यवस्थित परिसर के कारण पुरानी कचहरी विद्यार्थियों, अभिभावकों और पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बन चुकी है। शिक्षा, रोजगार और सांस्कृतिक संरक्षण का यह मॉडल जिले के लिए नई पहचान बन रहा है और युवाओं के भविष्य को नई उड़ान देने में अहम भूमिका निभा रहा है।
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