मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में कई महत्वपूर्ण फैसलों को मंजूरी दी गई। छत्तीसगढ़ कैबिनेट निर्णय के तहत ग्रामीण रोजगार, स्थानीय स्वरोजगार और हरित ऊर्जा को बढ़ावा देने वाली योजनाओं को स्वीकृति मिली है। सरकार का दावा है कि इन फैसलों से गांवों की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे।
ग्रामीण परिवारों को 125 दिनों के रोजगार की गारंटी
बैठक में “विकसित भारत – रोजगार और आजीविका के लिये गारंटी मिशन (ग्रामीण)” के प्रारूप को मंजूरी दी गई। इस योजना के तहत पात्र ग्रामीण परिवारों के वयस्क सदस्यों को प्रत्येक वित्तीय वर्ष में 125 दिनों के अकुशल श्रम आधारित रोजगार की गारंटी मिलेगी।
योजना के माध्यम से जल संरक्षण, प्राकृतिक संसाधन प्रबंधन, ग्रामीण अधोसंरचना निर्माण और आजीविका परिसंपत्तियों के विकास को बढ़ावा दिया जाएगा। छत्तीसगढ़ कैबिनेट निर्णय के अनुसार इसके लिए वर्ष 2026-27 में 4,000 करोड़ रुपये का बजटीय प्रावधान किया गया है।
अटल आजीविका समृद्धि हाट से बढ़ेगा स्वरोजगार
मंत्रिपरिषद ने “अटल आजीविका समृद्धि हाट” योजना को भी मंजूरी दी है। इसके तहत ग्रामीण क्षेत्रों में सृजन केंद्र, प्रसंस्करण इकाइयां, सेवा केंद्र, विपणन केंद्र और आपूर्ति केंद्र स्थापित किए जाएंगे।
स्थानीय उत्पादों को मिलेगा बड़ा बाजार
योजना का उद्देश्य स्थानीय उत्पादन और प्रसंस्करण गतिविधियों को बढ़ावा देना है। इससे किसानों, महिला स्व-सहायता समूहों और ग्रामीण उद्यमियों को बेहतर बाजार उपलब्ध होगा। छत्तीसगढ़ कैबिनेट निर्णय के तहत इस योजना को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।
CBG नीति 2026 को भी मिली मंजूरी
बैठक में “छत्तीसगढ़ कम्प्रेस्ड बायोगैस नीति (CG-CBG Policy), 2026” को भी स्वीकृति दी गई। इस नीति के तहत कृषि अवशेष, पशुधन अपशिष्ट और अन्य जैविक संसाधनों से कम्प्रेस्ड बायोगैस का उत्पादन किया जाएगा।
पर्यावरण संरक्षण को मिलेगा बढ़ावा
सरकार का मानना है कि इस नीति से अपशिष्ट प्रबंधन बेहतर होगा, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन कम होगा और जैव उर्वरकों के उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा। राज्य में प्रतिवर्ष लगभग 5 लाख टन CBG उत्पादन की संभावना जताई गई है।
ग्रामीण विकास और हरित अर्थव्यवस्था पर सरकार का जोर
विशेषज्ञों का मानना है कि छत्तीसगढ़ कैबिनेट निर्णय केवल रोजगार सृजन तक सीमित नहीं है, बल्कि यह ग्रामीण विकास, डिजिटल सुशासन और हरित ऊर्जा के क्षेत्र में भी बड़े बदलाव का आधार बन सकता है। इससे गांवों में आर्थिक गतिविधियों को नई गति मिलने की उम्मीद है।
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