Telegram Unban के बाद Play Store पर लौटा ऐप, पाबंदियां बरकरार

Telegram Unban

करीब एक सप्ताह तक प्रतिबंध का सामना करने के बाद Telegram Unban की प्रक्रिया पूरी हो गई है। भारत सरकार द्वारा लगाया गया अस्थायी प्रतिबंध समाप्त होने के बाद गूगल प्ले स्टोर पर ऐप की वापसी हो चुकी है। हालांकि कुछ फीचर्स पर अभी भी प्रतिबंध और निगरानी जारी है।

टेलीग्राम पर बैन क्यों लगाया गया था?

सरकार ने 16 जून 2026 को टेलीग्राम पर अस्थायी प्रतिबंध लगाया था। यह फैसला नीट परीक्षा से जुड़े कथित पेपर लीक, फर्जी प्रश्नपत्रों और भ्रामक सूचनाओं के प्रसार को रोकने में प्लेटफॉर्म की विफलता के आरोपों के बाद लिया गया था। अधिकारियों का मानना था कि कुछ चैनलों और समूहों के जरिए परीक्षा प्रक्रिया को प्रभावित करने वाली सामग्री साझा की जा रही थी।

Telegram Unban के बाद क्या बदला?

प्रतिबंध की अवधि 22 जून को समाप्त होने के बाद टेलीग्राम को दोबारा बहाल कर दिया गया। कई मौजूदा उपयोगकर्ताओं को सीमित पहुंच पहले से मिल रही थी, लेकिन अब प्लेटफॉर्म आधिकारिक रूप से फिर से उपलब्ध है। इससे लाखों यूजर्स को राहत मिली है, जो रोजमर्रा की बातचीत, व्यवसाय और शैक्षणिक गतिविधियों के लिए इस ऐप का उपयोग करते हैं।

मैसेज एडिटिंग फीचर पर अब भी रोक

हालांकि Telegram Unban के बावजूद प्लेटफॉर्म को पूरी छूट नहीं मिली है। सरकार ने मैसेज एडिटिंग फीचर को 30 जून तक बंद रखने का निर्देश दिया है। अधिकारियों का मानना है कि इस फीचर का दुरुपयोग कर भ्रामक सामग्री को संशोधित या छिपाया जा सकता है, इसलिए जांच पूरी होने तक इस पर निगरानी रखी जाएगी।

सीईओ पावेल डुरोव ने जताई आपत्ति

टेलीग्राम के मुख्य कार्यकारी अधिकारी पावेल डुरोव ने प्रतिबंध के दौरान सरकार के फैसले की आलोचना की थी। उनका कहना था कि कुछ उपयोगकर्ताओं की गतिविधियों के कारण पूरे प्लेटफॉर्म को दंडित करना उचित नहीं है। Telegram Unban के बाद भी उन्होंने डिजिटल स्वतंत्रता और प्लेटफॉर्म की जवाबदेही के बीच संतुलन बनाए रखने की आवश्यकता पर जोर दिया।

क्या भविष्य में बढ़ सकते हैं नियम?

विशेषज्ञों का मानना है कि यह मामला केवल एक ऐप तक सीमित नहीं है। सरकारें अब डिजिटल प्लेटफॉर्म्स से अधिक जवाबदेही की अपेक्षा कर रही हैं। फर्जी खबरों, परीक्षा धोखाधड़ी और अवैध कंटेंट को रोकने के लिए आने वाले समय में नए नियम लागू किए जा सकते हैं। ऐसे में Telegram Unban को डिजिटल नियमन और टेक कंपनियों के बीच संतुलन बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण घटना माना जा रहा है।

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