अंतरराष्ट्रीय ओलंपिक समिति (IOC) ने 2028 में होने वाले लॉस एंजिलिस ओलंपिक से पहले एक बड़ा और चर्चित फैसला लिया है। नई नीति के अनुसार अब ओलंपिक में महिलाओं की स्पर्धाओं में केवल बायोलॉजिकल महिलाएं ही हिस्सा ले सकेंगी, जबकि ट्रांसजेंडर खिलाड़ियों को इसमें भाग लेने की अनुमति नहीं होगी।
IOC द्वारा गुरुवार को जारी इस नई पात्रता नीति को खेलों में निष्पक्षता, सुरक्षा और प्रतिस्पर्धा की पारदर्शिता बनाए रखने के उद्देश्य से लागू किया गया है। इस फैसले के बाद खेल जगत में बहस तेज होने की संभावना है।
महिलाओं की स्पर्धा के लिए नई गाइडलाइन
IOC ने स्पष्ट किया है कि यह नियम सभी महिला वर्ग की व्यक्तिगत और टीम स्पर्धाओं पर लागू होगा। यानी अब किसी भी IOC प्रतियोगिता में महिलाओं के इवेंट्स में ट्रांसजेंडर एथलीट भाग नहीं ले सकेंगे।
हालांकि, समिति ने यह भी बताया कि यह नीति केवल अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं तक सीमित रहेगी और इसका असर स्थानीय या मनोरंजक खेल आयोजनों पर नहीं पड़ेगा।
2028 से लागू होगी नई नीति
यह नई गाइडलाइन जुलाई 2028 में आयोजित होने वाले लॉस एंजिलिस ओलंपिक से प्रभावी होगी। IOC ने इस संबंध में 10 पन्नों का विस्तृत दस्तावेज भी जारी किया है, जिसमें पात्रता के सभी मानकों को विस्तार से समझाया गया है।
चर्चा में आए बड़े नाम
इस फैसले के बाद दो बार की ओलंपिक चैंपियन धाविका Caster Semenya जैसे एथलीट्स भी चर्चा में आ गए हैं, क्योंकि नई नीति का असर उनके करियर पर भी पड़ सकता है।
निष्पक्षता बनाम समावेशन पर बहस तेज
IOC का यह कदम खेलों में निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में अहम माना जा रहा है, लेकिन दूसरी ओर इसे लेकर समावेशन और समान अवसर के मुद्दों पर भी बहस छिड़ सकती है।