डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में एक्सपायर्ड इंजेक्शन का आरोप

डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में एक्सपायर्ड इंजेक्शन का आरोप, मरीज को लकवा होने की आशंका

रायपुर, 7 मार्च: डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल में एक महिला मरीज को कथित रूप से एक्सपायर्ड इंजेक्शन लगाए जाने का गंभीर मामला सामने आया है। परिजनों का आरोप है कि इंजेक्शन लगाने के बाद मरीज के शरीर का बायां हिस्सा सुन्न हो गया और अब वह लकवाग्रस्त हो गई है।

इलाज में लापरवाही का आरोप

डूंडा की 56 वर्षीय मान बाई को ब्रेन स्ट्रोक होने के बाद आंबेडकर अस्पताल में भर्ती किया गया था। वहां टेनेक्टेज 20 मिग्रा इंजेक्शन की अनुपलब्धता के कारण 2 फरवरी को डीकेएस सुपर स्पेशलिटी अस्पताल रेफर कर दिया गया। वहां न्यूरोलॉजी विभाग में भर्ती करने के बाद स्टाफ ने स्टोर से टेनेक्टेज इंजेक्शन मंगाया।

परिजनों का कहना है कि स्टाफ ने एक्सपायर्ड इंजेक्शन लगा दिया और जब उन्होंने इसका विरोध किया तो जवाब मिला— “इंजेक्शन एक्सपायर हुए केवल दो दिन ही हुए हैं, कोई नुकसान नहीं होगा।” इसके बाद मरीज के शरीर का बायां हिस्सा पूरी तरह काम करना बंद कर दिया।

पैकिंग में अलग-अलग एक्सपायरी डेट, स्टाफ के भ्रम की आशंका

इंजेक्शन के पैकेट में तीन चीजों की पैकिंग थी—टेनेक्टेज इंजेक्शन, डिस्टिल वॉटर और सीरिंज।

  • टेनेक्टेज इंजेक्शन जनवरी 2025 में एक्सपायर हुआ।
  • डिस्टिल वॉटर नवंबर 2025 में एक्सपायर होगा।
  • सीरिंज अगस्त 2027 तक मान्य है।

परिजनों का कहना है कि अलग-अलग एक्सपायरी डेट होने की वजह से स्टाफ भ्रमित हुआ और बाद में गलती छिपाने के लिए डिस्टिल वॉटर को एक्सपायर्ड बताने लगा।

अब मरीज के लिए महंगी फिजियोथैरेपी की सलाह

मरीज को 7 फरवरी को डिस्चार्ज कर दिया गया, लेकिन अब न्यूरोलॉजी विभाग के एचओडी डॉ. अभिजीत कोहट ने रोबोटिक फिजियोथैरेपी कराने की सलाह दी है। यह प्रक्रिया महंगी है और रायपुर में केवल एक जगह उपलब्ध है। परिजनों का कहना है कि वे इतने सक्षम नहीं हैं कि नियमित रूप से यह थेरेपी करवा सकें।

अस्पताल प्रशासन की सफाई

डीकेएस अस्पताल की अधीक्षक डॉ. क्षिप्रा शर्मा ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा, “मरीज को एक्सपायर्ड इंजेक्शन नहीं लगाया गया। एक्सपायरी इंजेक्शन का पैकेट केवल टीचिंग उद्देश्यों के लिए रखा गया था। परिजनों को गलतफहमी हो सकती है।”

इस पूरे मामले ने अस्पताल प्रशासन की कार्यशैली और मरीजों की सुरक्षा को लेकर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। क्या वास्तव में मरीज को एक्सपायर्ड इंजेक्शन दिया गया या यह महज एक भ्रम है? इस मामले की विस्तृत जांच की जरूरत है।

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