प्रियंका चोपड़ा और मीरा नायर की ‘अमरी’ ने बढ़ाई उत्सुकता, अमृता शेर-गिल की

मीरा नायर की ‘अमरी’ में दिखेगी अमृता शेर-गिल की कला और संघर्ष की कहानी, प्रियंका चोपड़ा भी होंगी खास भूमिका में

भारत की मशहूर फिल्ममेकर मीरा नायर एक बार फिर बड़े और अलग विषय के साथ दर्शकों के सामने आने जा रही हैं। उनकी आगामी फिल्म ‘अमरी’ इन दिनों फिल्म इंडस्ट्री और कला प्रेमियों के बीच जबरदस्त चर्चा का विषय बनी हुई है। यह फिल्म प्रसिद्ध चित्रकार अमृता शेर-गिल के जीवन, उनकी कला और संघर्षों पर आधारित बताई जा रही है। खास बात यह है कि इस प्रोजेक्ट से ग्लोबल स्टार प्रियंका चोपड़ा भी जुड़ी हुई हैं, जिससे फिल्म को लेकर दर्शकों की उत्सुकता और बढ़ गई है।

‘अमरी’ की स्टारकास्ट ने खींचा दर्शकों का ध्यान

फिल्म ‘अमरी’ में युवा अभिनेत्री अंजलि शिवरामन अमृता शेर-गिल का मुख्य किरदार निभाती नजर आएंगी। वहीं हॉलीवुड अभिनेत्री एमिली वॉटसन उनकी मां मैरी-एंटोनेट की भूमिका में दिखाई देंगी। अभिनेता जयदीप अहलावत फिल्म में अमृता के पिता उमराव सिंह शेर-गिल का किरदार निभा रहे हैं।

इसके अलावा जिम सरभ, अंजना वासन और क्रिस्टियन साकवारी भी फिल्म का हिस्सा हैं। प्रियंका चोपड़ा इस फिल्म में केवल अभिनय ही नहीं करेंगी, बल्कि एग्जीक्यूटिव प्रोड्यूसर के तौर पर भी जुड़ी हुई हैं। फिल्म का पहला लुक सामने आने के बाद सोशल मीडिया पर इसकी खूब चर्चा हो रही है।

अमृता शेर-गिल की कला से प्रेरित हैं मीरा नायर

मीरा नायर ने बताया कि अमृता शेर-गिल की कला और सोच ने उन्हें हमेशा प्रभावित किया है। उन्होंने कहा कि अमृता ने यूरोप में कला की शिक्षा लेने के बाद भारतीय संस्कृति और आम लोगों की जिंदगी को अपने रंगों के जरिए दुनिया के सामने पेश किया।

फिल्म ‘अमरी’ सिर्फ एक बायोपिक नहीं होगी, बल्कि यह भारतीय कला, संस्कृति और महिला सशक्तिकरण की कहानी भी बताएगी। माना जा रहा है कि फिल्म में अमृता शेर-गिल की जिंदगी के कई अनछुए पहलुओं को भी दिखाया जाएगा।

दुनियाभर में लगेगी अमृता शेर-गिल की कला प्रदर्शनी

फिल्म की चर्चा के बीच यह खबर भी सामने आई है कि साल 2027 में अमृता शेर-गिल की पेंटिंग्स की अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनी आयोजित की जाएगी। यह प्रदर्शनी पेरिस, लॉस एंजिल्स, दोहा और नई दिल्ली जैसे शहरों में लगेगी। दिल्ली में उनकी स्थायी प्रदर्शनी शुरू करने की भी योजना बनाई जा रही है।

ऐसे में ‘अमरी’ सिर्फ एक फिल्म नहीं, बल्कि भारतीय कला इतिहास को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का बड़ा माध्यम बन सकती है।

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