Satwiksairaj Rankireddy ने थॉमस कप 2026 में भारतीय टीम के कांस्य पदक जीतने के बाद खिलाड़ियों को पर्याप्त पहचान और सम्मान नहीं मिलने पर अपनी नाराजगी जाहिर की है। स्टार बैडमिंटन खिलाड़ी का कहना है कि खिलाड़ियों को न तो पैसों की जरूरत है और न ही भव्य स्वागत की, बल्कि देश को हर खेल और हर उपलब्धि का समान उत्साह से जश्न मनाना चाहिए।
थॉमस कप में कांस्य जीतने के बाद भी फीका रहा माहौल
Thomas Cup 2026 में भारतीय टीम ने शानदार प्रदर्शन करते हुए कांस्य पदक अपने नाम किया। विश्व रैंकिंग में चौथे स्थान पर मौजूद Satwiksairaj Rankireddy और Chirag Shetty की जोड़ी इस सफलता का अहम हिस्सा रही।
हालांकि स्वदेश लौटने के बाद टीम की उपलब्धि को जिस तरह का सम्मान और चर्चा मिलनी चाहिए थी, वैसा माहौल देखने को नहीं मिला। इसी को लेकर सात्विक ने सोशल मीडिया पर अपनी भावनाएं साझा की थीं।
‘देश हमारे प्रयासों को महसूस करे’
सोशल मीडिया पोस्ट में Satwiksairaj Rankireddy ने साफ किया कि उनका उद्देश्य किसी प्रकार की व्यक्तिगत प्रसिद्धि हासिल करना नहीं था। उन्होंने कहा कि खिलाड़ी सिर्फ यह चाहते हैं कि देश उनके संघर्ष और मेहनत को महसूस करे।
सात्विक ने कहा कि वैश्विक स्तर पर पदक जीतना वर्षों की मेहनत, त्याग और समर्पण का परिणाम होता है। जब ऐसी उपलब्धियों पर पर्याप्त प्रतिक्रिया नहीं मिलती, तो यह खिलाड़ियों के साथ-साथ भविष्य की पीढ़ी के लिए भी निराशाजनक होता है।
‘हर खेल को बराबर समर्थन मिलना चाहिए’
भारतीय बैडमिंटन स्टार का मानना है कि देश में ऐसी खेल संस्कृति विकसित होनी चाहिए, जहां क्रिकेट ही नहीं बल्कि हर खेल की सफलता का समान जोश के साथ स्वागत किया जाए।
उन्होंने कहा कि चाहे विश्व कप हो या थॉमस कप जैसे बड़े टूर्नामेंट, हर उपलब्धि देश के लिए गर्व का क्षण होती है। खिलाड़ियों को सिर्फ यही उम्मीद रहती है कि लोग उनके प्रयासों को पहचानें और उनका सम्मान करें।
चिराग शेट्टी ने भी किया समर्थन
Chirag Shetty ने भी सात्विक की भावनाओं का समर्थन किया। उन्होंने खेल प्रेमियों से अपील की कि वे हर उस खिलाड़ी का सम्मान करें, जो भारत की जर्सी पहनकर देश का प्रतिनिधित्व करता है।
चिराग ने कहा कि तुलना करने के बजाय हर खिलाड़ी की मेहनत और उपलब्धि का जश्न मनाया जाना चाहिए। इससे आने वाली पीढ़ियों को भी प्रेरणा मिलेगी।
भारतीय बैडमिंटन के लिए बड़ा संदेश
Satwiksairaj Rankireddy का यह बयान सिर्फ बैडमिंटन तक सीमित नहीं है, बल्कि देश के पूरे खेल तंत्र और खेल संस्कृति की ओर ध्यान खींचता है। खिलाड़ियों का मानना है कि अगर हर खेल को बराबर समर्थन मिलेगा, तो भारत अंतरराष्ट्रीय स्तर पर और अधिक सफलताएं हासिल कर सकता है।