छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर इस समय भीषण जल संकट से जूझ रही है, जिसे लेकर आम आदमी पार्टी (AAP) ने राज्य सरकार और नगर निगम पर तीखा हमला बोला है। पार्टी नेताओं ने प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा कि शहर के कई इलाकों में हालात इतने खराब हो चुके हैं कि लोग बूंद-बूंद पानी के लिए संघर्ष करने को मजबूर हैं, जबकि प्रशासन इस गंभीर समस्या पर उदासीन बना हुआ है।
AAP के प्रदेश पदाधिकारियों ने आरोप लगाया कि चंगोराभाटा, रायपुरा, मोवा, पंडरी, शक्ति नगर, दलदल सिवनी और सुंदर नगर जैसे क्षेत्रों में जलस्तर तेजी से गिर रहा है और नियमित जल आपूर्ति पूरी तरह चरमरा गई है। कई जगहों पर टैंकर ही एकमात्र सहारा बन गए हैं, जहां पानी पहुंचते ही लोगों की भीड़ उमड़ पड़ती है। हालात ऐसे हैं कि पानी अब जरूरत नहीं, बल्कि संघर्ष का प्रतीक बन गया है।
पार्टी नेताओं ने अलग-अलग जोन के हालात का जिक्र करते हुए बताया कि हजारों परिवार लगातार पेयजल संकट से जूझ रहे हैं। खम्हारडीह जैसे घनी आबादी वाले इलाकों में 90 प्रतिशत लोग प्रभावित हैं, वहीं कचना और सड्डू क्षेत्र में पिछले कई दिनों से पानी की भारी किल्लत बनी हुई है। कई कॉलोनियों में 10 से 15 दिनों तक पानी की आपूर्ति बाधित रहने की शिकायतें सामने आई हैं।
AAP ने इस स्थिति को वर्षों से चली आ रही सरकारों की विफलता करार दिया है। पार्टी का कहना है कि भाजपा और कांग्रेस दोनों ही सरकारें बुनियादी सुविधाओं के मुद्दे पर जनता को राहत देने में असफल रही हैं। जल संकट को लेकर अब तक कोई ठोस और दीर्घकालिक योजना नहीं बनाई गई, जिसका खामियाजा आम लोगों को भुगतना पड़ रहा है।
इसके साथ ही आम आदमी पार्टी ने नगर निगम और प्रशासन से कई सवाल भी उठाए हैं—आखिर जनता को गंदा और असुरक्षित पानी पीने के लिए क्यों मजबूर किया जा रहा है? हर साल गर्मियों में जल संकट के बावजूद स्थायी समाधान क्यों नहीं निकाला गया? और इस लापरवाही के लिए जिम्मेदार कौन है?
पार्टी ने साफ चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही इस समस्या का ठोस समाधान नहीं किया गया, तो वह प्रभावित नागरिकों के साथ मिलकर रायपुर नगर निगम का घेराव करेगी। AAP ने इसे सिर्फ विरोध नहीं, बल्कि जनता के अधिकारों की लड़ाई बताया है, जो आने वाले दिनों में बड़े आंदोलन का रूप ले सकती है।