Ramen Deka ने Raipur जिले में आयोजित विकासखंड स्तरीय समीक्षा बैठक में प्रशासनिक अधिकारियों को जमीनी स्तर पर सक्रिय रहने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट कहा कि अधिकारी केवल कार्यालयों तक सीमित न रहें, बल्कि गांवों और हितग्राहियों के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझें और योजनाओं का वास्तविक फीडबैक लें।
राज्यपाल ने कहा कि जनता से सीधा संवाद ही शासन की प्रभावशीलता का सबसे बड़ा आधार है। उन्होंने जिले में संचालित “प्रोजेक्ट अजा”, “ग्रीन पालना” और “प्रोजेक्ट रचना” जैसी योजनाओं की सराहना करते हुए इनके बेहतर क्रियान्वयन पर जोर दिया।
बैठक में जल संरक्षण को प्राथमिकता देते हुए Ramen Deka ने ग्राम पंचायत स्तर पर डबरी निर्माण को बढ़ावा देने की बात कही। उन्होंने कहा कि छोटे जल संरचनाओं से न केवल भूजल स्तर सुधरेगा, बल्कि भविष्य में पेयजल संकट से निपटने में भी मदद मिलेगी। उन्होंने बड़े किसानों को इस दिशा में प्रेरित करने और अन्य राज्यों के सफल मॉडलों से सीख लेने की सलाह दी।
राज्यपाल ने धान की अधिक खेती के कारण बढ़ती जल खपत पर चिंता जताते हुए किसानों को वैकल्पिक फसलों की ओर प्रोत्साहित करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि आने वाले समय में जल संरक्षण सबसे बड़ी चुनौती होगी, इसलिए अभी से ठोस रणनीति बनाना जरूरी है।
वृक्षारोपण को लेकर भी राज्यपाल ने विशेष जोर दिया। उन्होंने अस्पतालों, स्कूलों और सड़कों के किनारे अधिक से अधिक पौधे लगाने का सुझाव दिया, जिससे पर्यावरण संरक्षण के साथ-साथ प्रदूषण नियंत्रण में भी मदद मिल सके। उन्होंने “हर व्यक्ति एक पौधा” का संदेश देते हुए जनभागीदारी सुनिश्चित करने पर बल दिया।
कृषि क्षेत्र में उन्होंने जैविक और प्राकृतिक खेती को बढ़ावा देने की आवश्यकता बताई। “हर घर मुनगा” परियोजना की समीक्षा करते हुए उन्होंने हाइड्रोपोनिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों को अपनाने की बात कही और नर्सरी स्तर पर इसके विकास का सुझाव दिया।
इसके साथ ही राज्यपाल ने जिले की यातायात व्यवस्था पर भी चिंता जताई। उन्होंने भारी वाहनों के संचालन पर नियंत्रण, सड़क सुरक्षा के लिए जागरूकता और हेलमेट नियमों के पालन को सुनिश्चित करने के निर्देश दिए।
नशे की बढ़ती समस्या पर सख्त रुख अपनाते हुए उन्होंने कहा कि इसे रोकने के लिए प्रशासन को जागरूकता और कड़ी कार्रवाई दोनों अपनानी होगी।
यह बैठक प्रशासनिक कार्यप्रणाली को और अधिक प्रभावी बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है, जिसमें विकास के साथ-साथ जनहित और पर्यावरण संरक्षण को प्राथमिकता दी गई।