PRSU में श्रीमंत शंकर देव शोध पीठ का लोकार्पण, मिलेगा नया आयाम

रायपुर, 21 जनवरी 2026। पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय में महान संत, समाज सुधारक और भक्ति आंदोलन के प्रणेता श्रीमंत शंकर देव के विचारों और दर्शन को समर्पित श्रीमंत शंकर देव शोध पीठ का लोकार्पण आज गरिमामय वातावरण में संपन्न हुआ। यह पहल राज्यपाल श्री रमेन डेका के मार्गदर्शन में साकार हुई, जिसका उद्देश्य भारतीय सांस्कृतिक एकता और सामाजिक समरसता को अकादमिक स्तर पर सुदृढ़ करना है।

कार्यक्रम की अध्यक्षता राज्यपाल श्री डेका ने की, जबकि मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय, उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के सह-सरकार्यवाह डॉ. कृष्ण गोपाल, शिक्षाविद, शोधार्थी एवं बड़ी संख्या में गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। इस अवसर पर पंजाब विश्वविद्यालय, चंडीगढ़ और पं. रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय रायपुर के बीच शैक्षणिक सहयोग को लेकर एमओयू पर हस्ताक्षर भी किए गए, जिससे दोनों संस्थानों के शोधार्थियों को अंतरविषयक अनुसंधान का अवसर मिलेगा।

सामाजिक समरसता की विचारधारा का केंद्र बनेगी शोध पीठ – राज्यपाल

राज्यपाल श्री रमेन डेका ने कहा कि श्रीमंत शंकर देव के विचार आज भी समाज को जोड़ने, समानता स्थापित करने और मानवीय मूल्यों को मजबूत करने की प्रेरणा देते हैं। उन्होंने कहा कि यह शोध पीठ उत्तर-पूर्वी भारत और मध्य भारत की सांस्कृतिक विरासत को जोड़ने वाला सेतु बनेगी और भक्ति आंदोलन, संत परंपरा तथा सामाजिक सुधारों पर गहन अध्ययन का केंद्र होगी।

राज्यपाल ने बताया कि छत्तीसगढ़ शासन द्वारा शोध पीठ के संचालन के लिए 2 करोड़ रुपये की राशि स्वीकृत की गई है, जिसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री का आभार व्यक्त किया।

पूरे देश को गौरवान्वित करता है शंकर देव का साहित्य – मुख्यमंत्री

मुख्यमंत्री श्री विष्णु देव साय ने अपने संबोधन में कहा कि भले ही श्रीमंत शंकर देव का कार्यक्षेत्र असम रहा हो, लेकिन उनके विचारों और रचनाओं का प्रभाव पूरे भारत में दिखाई देता है। उनके साहित्य, नाटकों और भजनों में भारतीय संस्कृति की आत्मा बसती है। उन्होंने कहा कि शंकर देव ने 500 वर्ष पूर्व जिस एक भारत की कल्पना की थी, उसे आज “एक भारत-श्रेष्ठ भारत” की भावना आगे बढ़ा रही है।

भक्ति, संस्कृति और समाज को जोड़ा – डॉ. कृष्ण गोपाल

मुख्य वक्ता डॉ. कृष्ण गोपाल ने कहा कि असम जैसे विविधताओं से भरे क्षेत्र में श्रीमंत शंकर देव ने भक्ति आंदोलन के माध्यम से जनजातीय समाज को एक सूत्र में बांधा। नामघर और सत्र परंपरा के जरिए उन्होंने सामाजिक सद्भाव, करुणा और समानता का संदेश जन-जन तक पहुंचाया।

विचारों की प्रयोगशाला बनेगा संस्थान – उच्च शिक्षा मंत्री

उच्च शिक्षा मंत्री श्री टंकराम वर्मा ने कहा कि यह शोध पीठ केवल एक शैक्षणिक भवन नहीं, बल्कि भारतीय ज्ञान परंपरा की जीवंत कार्यशाला के रूप में विकसित होगी। यहां से निकलने वाला शोध राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारतीय संस्कृति को नई पहचान दिलाएगा।

शोध पीठ का उद्देश्य

गौरतलब है कि श्रीमंत शंकर देव शोध पीठ का उद्देश्य उत्तर-पूर्व और मध्य भारत के भक्ति आंदोलन से जुड़े संतों के योगदान को सामने लाना, जनजातीय सांस्कृतिक विरासत की मौखिक परंपराओं का दस्तावेजीकरण करना और शोधार्थियों को शोधवृत्ति प्रदान करना है। यहां भाषा, साहित्य, इतिहास, समाजशास्त्र, समाजकार्य और क्षेत्रीय अध्ययन जैसे विषयों में अनुसंधान किया जाएगा।

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