रायपुर। छत्तीसगढ़ को देश के औद्योगिक और आर्थिक विकास का प्रमुख केंद्र बनाने की दिशा में राज्य सरकार खनिज संसाधनों के बेहतर उपयोग पर जोर दे रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि प्रदेश की खनिज संपदा का उपयोग वैज्ञानिक और जिम्मेदारीपूर्ण तरीके से किया जाएगा, ताकि इसका लाभ उद्योगों के साथ-साथ स्थानीय लोगों और विशेष रूप से जनजातीय समुदायों तक पहुंचे।
मुख्यमंत्री श्री साय 3 नवंबर 2026 को रायपुर स्थित अपने निवास कार्यालय में केंद्रीय कोयला एवं खान मंत्री जी. किशन रेड्डी की उपस्थिति में आयोजित खनन एवं कोयला क्षेत्र की उच्चस्तरीय समीक्षा बैठक को संबोधित कर रहे थे। बैठक में खनिज अन्वेषण, कोयला उत्पादन, खनिज ब्लॉकों की नीलामी, क्रिटिकल मिनरल्स और खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास से जुड़े विषयों पर चर्चा हुई।
खनिज क्षेत्र में तकनीकी नवाचारों की केंद्रीय मंत्री ने की सराहना
केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने छत्तीसगढ़ सरकार द्वारा खनन क्षेत्र में किए जा रहे नवाचारों और तकनीक आधारित सुधारों की सराहना की। उन्होंने खनिज ऑनलाइन 2.0 पोर्टल, ड्रोन आधारित निगरानी, डिजिटल मॉनिटरिंग और खनन गतिविधियों की स्टार रेटिंग जैसी पहलों को महत्वपूर्ण बताया।
इन तकनीकी व्यवस्थाओं से खनन गतिविधियों में पारदर्शिता बढ़ाने, अवैध खनन पर नियंत्रण रखने और प्रशासनिक व्यवस्था को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी। मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार का प्रयास है कि छत्तीसगढ़ खनिज संपदा स्थानीय समुदायों की आर्थिक आत्मनिर्भरता और रोजगार के नए अवसरों का आधार बने।
वित्त वर्ष 2025-26 में खनिजों से मिला 16,738 करोड़ रुपये का राजस्व
बैठक में प्रस्तुत जानकारी के अनुसार, वित्तीय वर्ष 2025-26 में छत्तीसगढ़ को खनिज संसाधनों से 16,738 करोड़ रुपये का राजस्व प्राप्त हुआ। प्रदेश में कोयला, लौह अयस्क, चूना पत्थर और टिन के उत्पादन में वृद्धि दर्ज की गई है।
प्रस्तुतीकरण में लिथियम और टिन सहित विभिन्न खनिज ब्लॉकों की नीलामी, आवंटित खदानों के संचालन और नए खनिज संसाधनों के विकास की प्रगति की जानकारी भी दी गई। राज्य सरकार खनिज संसाधनों के बेहतर प्रबंधन के साथ निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ाने पर काम कर रही है।
TIN पोर्टल से बस्तर के जनजातीय टिन संग्राहकों को मिल रहा बेहतर मूल्य
बैठक में बस्तर के जनजातीय टिन संग्राहकों के हित में विकसित TIN (ट्राइबल इंसेंटिव्स ऑन नेचुरल रिसोर्सेज) पोर्टल की विशेष रूप से चर्चा हुई। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने 31 अगस्त 2026 को इस पोर्टल का शुभारंभ किया था। इसे छत्तीसगढ़ खनिज विकास निगम ने इंडियन ओवरसीज बैंक के सहयोग से विकसित किया है।
इस पोर्टल के माध्यम से टिन अयस्क की खरीदी, परिवहन, बिक्री, मूल्य निर्धारण और भुगतान की प्रक्रिया को डिजिटल एवं पारदर्शी बनाया गया है। लंदन मेटल एक्सचेंज आधारित मूल्य निर्धारण और डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) के जरिए हितग्राहियों को सीधे बैंक खाते में भुगतान किया जा रहा है।
वित्तीय वर्ष 2024-25 में 8,707 किलोग्राम से अधिक टिन अयस्क की खरीदी पर लगभग 90.82 लाख रुपये का भुगतान किया गया था। वहीं, वित्तीय वर्ष 2025-26 में 20,895 किलोग्राम से अधिक टिन अयस्क के लिए लगभग 3.81 करोड़ रुपये का भुगतान हुआ। इस तरह एक वर्ष में टिन संग्राहकों को किए गए भुगतान में चार गुने से अधिक की वृद्धि दर्ज की गई। chhattisgarhtimes+1
डीएमएफ राशि से खनन प्रभावित क्षेत्रों का होगा विकास
केंद्रीय मंत्री जी. किशन रेड्डी ने जिला खनिज संस्थान न्यास (डीएमएफ) की राशि का अधिकतम उपयोग खनन प्रभावित क्षेत्रों के विकास में करने पर जोर दिया। उन्होंने कहा कि इस राशि से शिक्षा, स्वास्थ्य, पेयजल, आजीविका और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत किया जाना चाहिए।
उन्होंने नक्सल प्रभावित रहे जिलों को डीएमएफ राशि के उपयोग में मिली विशेष छूट का नियमानुसार लाभ उठाने की बात भी कही, ताकि स्थानीय समुदायों की जरूरतों के अनुरूप विकास कार्यों को गति मिल सके।
लिथियम, ग्रेफाइट और दुर्लभ मृदा तत्वों के अन्वेषण पर जोर
बैठक में लिथियम, ग्रेफाइट, दुर्लभ मृदा तत्व, वैनेडियम, गैलियम, फॉस्फोराइट और टिन जैसे क्रिटिकल एवं रणनीतिक खनिजों के विकास पर विशेष चर्चा हुई। केंद्रीय मंत्री ने नए खनिज भंडारों की खोज और अन्वेषण गतिविधियों में तेजी लाने के निर्देश दिए।
उन्होंने खनिज ब्लॉकों की नीलामी के बाद उन्हें जल्द संचालन में लाने, आवश्यक स्वीकृतियों की प्रक्रिया तेज करने और केंद्र सरकार से उपलब्ध बजट का अधिकतम उपयोग सुनिश्चित करने पर भी जोर दिया।
खदानों का वैज्ञानिक समापन और भूमि का बेहतर पुनः उपयोग
केंद्रीय मंत्री ने खनन कार्य पूरा होने के बाद खदानों को वैज्ञानिक पद्धति से बंद करने की आवश्यकता बताई। उन्होंने कहा कि खनन समाप्त होने के बाद संबंधित भूमि के बेहतर पुनः उपयोग के लिए कार्ययोजना तैयार की जानी चाहिए।
इस प्रक्रिया में पर्यावरण संरक्षण, भूमि पुनर्स्थापन और स्थानीय समुदायों के हितों का ध्यान रखना जरूरी है। बैठक में कोयला उत्पादन बढ़ाने, लंबित खनिज ब्लॉकों को शीघ्र संचालित करने और एसईसीएल की परिचालन संबंधी चुनौतियों पर भी चर्चा हुई।
तकनीक और जनभागीदारी से विकास को मिलेगी नई गति
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि खनिज संसाधनों का विकास केवल राजस्व और औद्योगिक उत्पादन तक सीमित नहीं होना चाहिए। इससे स्थानीय लोगों को रोजगार, आजीविका और आर्थिक सशक्तिकरण के अवसर भी मिलने चाहिए। छत्तीसगढ़ खनिज संपदा का जिम्मेदारीपूर्ण उपयोग प्रदेश के समावेशी विकास और आत्मनिर्भर भारत के लक्ष्य को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकता है।
बैठक में मुख्य सचिव विकास शील, अपर मुख्य सचिव मनोज कुमार पिंगुआ, मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव सुबोध कुमार सिंह, कोल इंडिया लिमिटेड के अध्यक्ष एवं प्रबंध निदेशक बी. साईराम, एसईसीएल के सीएमडी हरीश दुहन सहित केंद्र और राज्य शासन के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
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