भारतीय वायुसेना को 31 अक्टूबर को नया प्रमुख मिलने जा रहा है। एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित वायुसेना प्रमुख का पदभार संभालेंगे। वह एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह का स्थान लेंगे। अमर प्रीत सिंह करीब 25 महीने की सेवा के बाद सेवानिवृत्त होंगे।
नए नेतृत्व के साथ वायुसेना में स्वदेशी रक्षा उपकरणों और आधुनिक विमान परियोजनाओं को आगे बढ़ाने पर ध्यान रहने की उम्मीद है। दीक्षित को लड़ाकू विमान परियोजनाओं, खासकर एलसीए तेजस से जुड़े प्रयासों में योगदान के लिए जाना जाता है।
31 अक्टूबर को संभालेंगे नए वायुसेना प्रमुख का पद
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित 31 अक्टूबर को भारतीय वायुसेना की कमान संभालेंगे। वहीं, मौजूदा प्रमुख एयर चीफ मार्शल अमर प्रीत सिंह अपना कार्यकाल पूरा कर सेवानिवृत्त होंगे।
अमर प्रीत सिंह को उनके कार्यकाल के दौरान कई औपचारिक विदाई कार्यक्रमों में सम्मानित किया गया है। पद छोड़ने के दिन उन्हें गार्ड ऑफ ऑनर देकर विदाई दी जाएगी।
स्वदेशी लड़ाकू विमान परियोजनाओं को दिया बढ़ावा
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित को भारतीय रक्षा क्षेत्र में स्वदेशी तकनीक और विमानों को प्रोत्साहन देने के प्रयासों के लिए जाना जाता है। उन्होंने हल्के लड़ाकू विमान एलसीए तेजस सहित अन्य स्वदेशी विमान परियोजनाओं को आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई है।
उनके अनुभव से वायुसेना की आधुनिकीकरण योजनाओं और आत्मनिर्भर रक्षा उत्पादन से जुड़े प्रयासों को दिशा मिलने की उम्मीद है। स्वदेशी विमान और रक्षा उपकरण देश की सामरिक क्षमता को मजबूत करने में अहम भूमिका निभाते हैं।
1986 में फाइटर स्ट्रीम से शुरू हुआ सैन्य करियर
एयर मार्शल दीक्षित को 6 दिसंबर 1986 को भारतीय वायुसेना की फाइटर स्ट्रीम में कमीशन मिला था। उन्होंने राष्ट्रीय रक्षा अकादमी, बांग्लादेश के डिफेंस सर्विसेज स्टाफ कॉलेज और नेशनल डिफेंस कॉलेज से शिक्षा प्राप्त की है।
उनके पास 3,500 घंटे से अधिक उड़ान का अनुभव है। लंबे सैन्य करियर में उन्होंने ऑपरेशनल और प्रशासनिक स्तर पर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाई हैं।
वायुसेना में संभाले कई अहम पद
अपने करियर के दौरान एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित ने कई महत्वपूर्ण पदों पर सेवाएं दी हैं। कमांडिंग ऑफिसर के रूप में उन्होंने नंबर 9 स्क्वाड्रन को मिराज-2000 लड़ाकू विमानों से लैस करने की जिम्मेदारी निभाई।
इसके बाद उन्होंने पश्चिमी क्षेत्र के एक अग्रिम लड़ाकू एयरबेस और दक्षिणी क्षेत्र के एक प्रमुख फाइटर ट्रेनिंग बेस की कमान संभाली। वह दक्षिणी वायु कमान में एयर डिफेंस कमांडर भी रहे।
वायु मुख्यालय में उन्होंने सहायक वायुसेना प्रमुख (परियोजना) और सहायक वायुसेना प्रमुख (योजना) जैसे पदों पर भी काम किया। इन जिम्मेदारियों ने उन्हें वायुसेना की योजना, संचालन और आधुनिकीकरण से जुड़े कार्यों का व्यापक अनुभव दिया।
सैन्य सेवाओं के लिए मिले कई सम्मान
देश के प्रति विशिष्ट सेवाओं के लिए एयर मार्शल दीक्षित को कई सैन्य सम्मान प्रदान किए गए हैं। इनमें वर्ष 2006 का वायु सेना मेडल, 2011 का विशिष्ट सेवा मेडल, 2023 का अति विशिष्ट सेवा मेडल और 2026 का परम विशिष्ट सेवा मेडल शामिल हैं।
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित का नया कार्यभार ऐसे समय में शुरू हो रहा है, जब भारतीय वायुसेना के सामने आधुनिक तकनीक, स्वदेशी रक्षा उत्पादन और परिचालन क्षमता को मजबूत करने जैसी महत्वपूर्ण प्राथमिकताएं हैं।
वायुसेना के नेतृत्व में होगा बदलाव
31 अक्टूबर को होने वाला नेतृत्व परिवर्तन भारतीय वायुसेना के लिए महत्वपूर्ण अवसर है। नए प्रमुख के अनुभव और पूर्व जिम्मेदारियों के आधार पर वायुसेना की मौजूदा योजनाओं को आगे बढ़ाने पर ध्यान रहेगा।
एयर मार्शल आशुतोष दीक्षित के नेतृत्व में स्वदेशी विमान परियोजनाओं और वायुसेना के आधुनिकीकरण से जुड़े प्रयासों पर विशेष नजर रहेगी।
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