रायपुर में 27 अक्टूबर 2026 को मुख्यमंत्री विष्णु देव साय की अध्यक्षता में हुई मंत्रिपरिषद की बैठक में किसानों, घरेलू बिजली उपभोक्ताओं, शासकीय कर्मचारियों, खिलाड़ियों और प्रदेश के विकास से जुड़े कई महत्वपूर्ण प्रस्तावों को मंजूरी दी गई। बैठक में धान खरीदी, बिजली बिल में रियायत, कैशलेस चिकित्सा सुविधा, सड़क एवं रेल परियोजनाओं, पर्यटन और खेल विकास सहित कुल 19 विषयों पर निर्णय लिए गए।
5 नवंबर से होगी धान खरीदी, किसानों को 3100 रुपये प्रति क्विंटल
छत्तीसगढ़ कैबिनेट के फैसले में खरीफ विपणन वर्ष 2026-27 के लिए धान खरीदी की शुरुआत 15 नवंबर 2026 से करने का निर्णय प्रमुख रहा। सरकार के अनुसार, 27.50 लाख से अधिक किसानों से 3,100 रुपये प्रति क्विंटल की दर से अधिकतम 21 क्विंटल प्रति एकड़ के हिसाब से धान खरीदा जाएगा।
एग्रीस्टैक आईडी वाले पिछले वर्ष के पंजीकृत किसानों को दोबारा पंजीयन कराने की आवश्यकता नहीं होगी। एग्रीस्टैक पंजीयन के कारण उन्हें धान बेचने के लिए समिति में अलग से ऋण पुस्तिका लाने की जरूरत भी नहीं होगी।
धान खरीदी में पारदर्शिता के लिए बायोमेट्रिक सत्यापन और डिजिटल क्रॉप सर्वे का उपयोग किया जाएगा। किसानों की सुविधा के लिए 360 नए उपार्जन केंद्र शुरू करने का निर्णय लिया गया है, जिससे प्रदेश में केंद्रों की कुल संख्या 3,100 हो जाएगी।
बिजली बिल में राहत की अवधि 31 मार्च 2027 तक बढ़ी
मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान यानी एम-ऊर्जा योजना के अंतर्गत घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को 200 यूनिट तक बिजली बिल में मिल रही रियायत जारी रहेगी। इसके साथ ही योजना का लाभ लेने के लिए 400 यूनिट तक मासिक खपत की पात्रता अवधि 30 सितंबर 2026 से बढ़ाकर 31 मार्च 2027 कर दी गई है।
इस निर्णय से लगभग 7.25 लाख घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को राहत मिलती रहेगी।
सरकारी कर्मचारियों और परिवारों को मिलेगी कैशलेस चिकित्सा सुविधा
मंत्रिपरिषद ने शासकीय सेवकों और उनके आश्रित परिवारजनों के लिए कैशलेस चिकित्सा सुविधा लागू करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। नई व्यवस्था के तहत सूचीबद्ध अस्पतालों में पात्र कर्मचारियों और उनके परिवारों को उपचार के समय चिकित्सा खर्च का भुगतान स्वयं करके बाद में प्रतिपूर्ति का इंतजार नहीं करना पड़ेगा।
पूर्व-अनुमोदन और दावों की प्रक्रिया ऑनलाइन तथा डिजिटल माध्यम से संचालित की जाएगी। गंभीर बीमारी और आपातकाल की स्थिति में यह व्यवस्था परिवारों पर पड़ने वाले तत्काल आर्थिक बोझ को कम करने में मदद कर सकती है।
सड़क निर्माण कार्यों के लिए 230 करोड़ रुपये से अधिक की राहत का प्रावधान
बिटुमिन यानी डामर की कीमतों में असाधारण वृद्धि को देखते हुए सड़क निर्माण, नवीनीकरण और रखरखाव कार्यों से जुड़े ठेकेदारों को मूल्य राहत देने का निर्णय लिया गया है।
छत्तीसगढ़ ग्रामीण सड़क विकास अभिकरण के अंतर्गत संचालित कार्यों के लिए 130.88 करोड़ रुपये की राहत दी जाएगी। वहीं, निर्धारित शर्तों के अंतर्गत राज्य वित्त पोषित सड़क कार्यों में इस्तेमाल किए गए बिटुमिन पर लगभग 70 से 100 करोड़ रुपये तक अतिरिक्त व्यय का अनुमान है।
इस कदम से लंबित सड़क परियोजनाओं को गति देने और निर्माण कार्यों को तय समयसीमा में पूरा करने में सहायता मिलने की उम्मीद है।
मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन के लिए 500 करोड़ रुपये का प्रस्ताव
प्रदेश में सड़क और अन्य बुनियादी सुविधाओं के विकास को बेहतर बनाने के लिए ‘मुख्यमंत्री अधोसंरचना मिशन-2026’ को मंजूरी दी गई है। यह मिशन वित्तीय वर्ष 2026-27 से 2030-31 तक पांच वर्षों के लिए संचालित होगा।
इसके लिए कुल 500 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है, यानी हर साल 100 करोड़ रुपये। मिशन के तहत सड़क नेटवर्क का मास्टर प्लान, डेटा आधारित योजना निर्माण, परियोजनाओं की विस्तृत रिपोर्ट, डिजिटल निगरानी, गुणवत्ता जांच और सड़क सुरक्षा ऑडिट पर ध्यान दिया जाएगा।
पर्यटन विकास मिशन से रोजगार के नए अवसर
मंत्रिपरिषद ने ‘मुख्यमंत्री पर्यटन विकास मिशन’ को भी मंजूरी दी है। अगले पांच वर्षों में इस मिशन के लिए लगभग 500 करोड़ रुपये का प्रावधान प्रस्तावित है।
योजना के तहत पर्यटन स्थलों पर बेहतर सड़क संपर्क, सुविधाएं, सुरक्षा और स्वच्छता विकसित करने के साथ होमस्टे, निजी निवेश और पर्यटन आधारित उद्यमिता को बढ़ावा दिया जाएगा। इससे स्थानीय युवाओं, महिलाओं और स्व-सहायता समूहों के लिए रोजगार तथा स्वरोजगार के अवसर बढ़ाने का लक्ष्य है।
295 किलोमीटर लंबी रेल परियोजना को मंजूरी
कटघोरा-तखतपुर-मुंगेली-कवर्धा-खैरागढ़-डोंगरगढ़ रेल परियोजना के त्वरित क्रियान्वयन के लिए छत्तीसगढ़ रेलवे कॉर्पोरेशन लिमिटेड के माध्यम से शत-प्रतिशत इक्विटी निवेश के प्रस्ताव को मंजूरी दी गई है।
करीब 295 किलोमीटर लंबी इस परियोजना की अनुमानित लागत 8,000 करोड़ रुपये है। प्रस्तावित अंशपूंजी में छत्तीसगढ़ शासन और रेल मंत्रालय लगभग 1,000-1,000 करोड़ रुपये का योगदान देंगे।
परियोजना से रेल सुविधा से वंचित क्षेत्रों को बेहतर संपर्क मिलने के साथ उद्योग, पर्यटन, रोजगार और कृषि उत्पादों के लिए नए बाजारों तक पहुंच बढ़ने की संभावना है।
कुंवरगढ़ नाम से जानी जाएगी नगर पंचायत कूंरा
मंत्रिपरिषद ने रायपुर जिले की नगर पंचायत कूंरा का नाम बदलकर कुंवरगढ़ करने के प्रस्ताव को मंजूरी दी है। कुंवरगढ़ को उसके प्राचीन मंदिरों, ऐतिहासिक धरोहरों और तालाबों के लिए जाना जाता है।
स्थानीय नागरिक लंबे समय से नगर पंचायत को उसकी ऐतिहासिक पहचान के अनुरूप नाम देने की मांग कर रहे थे। कैबिनेट की स्वीकृति के बाद इस नाम परिवर्तन से संबंधित आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी।
उद्योग, भंडारण और फल प्रसंस्करण को मिलेगा प्रोत्साहन
औद्योगिक विकास नीति 2024-30 में संशोधन को मंजूरी देते हुए 1,000 करोड़ रुपये या उससे अधिक निवेश वाली कोल गैसीफिकेशन परियोजनाओं के लिए विशेष प्रोत्साहन पैकेज का प्रावधान किया गया है।
इसके अलावा राजनांदगांव जिले के खपरीकला गांव में केंद्रीय भंडारण निगम को 10 एकड़ भूमि आवंटित करने के प्रस्ताव को स्वीकृति दी गई है। इससे कृषि उपज और अन्य वस्तुओं के सुरक्षित भंडारण की क्षमता बढ़ाने में मदद मिलेगी।
ग्राम सोमनी में राष्ट्रीय डेयरी विकास बोर्ड के माध्यम से मल्टी फ्रूट प्रोसेसिंग फैसिलिटी स्थापित करने के लिए 31.55 एकड़ भूमि आवंटित करने का भी निर्णय लिया गया। इस परियोजना में लगभग 400 करोड़ रुपये के निवेश का प्रस्ताव है। इसके माध्यम से 1,000 से अधिक प्रत्यक्ष और 5,000 से अधिक अप्रत्यक्ष रोजगार अवसर सृजित होने का अनुमान है।
खिलाड़ियों के प्रशिक्षण के लिए मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन
कैबिनेट ने मुख्यमंत्री खेल उत्कर्ष मिशन के प्रारूप को भी मंजूरी दी है। वर्ष 2026-27 में इसके लिए 100 करोड़ रुपये का बजट प्रावधान किया गया है।
मिशन के तहत प्रतिभाओं की पहचान, शुरुआती प्रशिक्षण, राज्य खेल अकादमियों में उन्नत प्रशिक्षण और उच्च प्रदर्शन केंद्रों में विशेषज्ञ कोचिंग की व्यवस्था प्रस्तावित है। पहले चरण में अंबिकापुर, बिलासपुर, रायपुर, दुर्ग, जगदलपुर और जशपुर में फीडर सेंटर स्थापित किए जाएंगे।
अन्य महत्वपूर्ण निर्णयों को भी मिली मंजूरी
बैठक में शेष प्रस्तावों के तहत कई प्रशासनिक और विकास संबंधी फैसले भी लिए गए।
- खरीफ विपणन वर्ष 2024-25 और 2025-26 के अतिशेष धान की नीलामी से निपटान संबंधी उपसमिति के निर्णय का अनुमोदन किया गया।
- राजनीतिक आंदोलनों से जुड़े नौ मामलों को न्यायालय से वापस लेने के लिए आगे की कार्रवाई की अनुमति दी गई।
- पांच सरकारी परिसंपत्तियों के पुनर्विकास को सैद्धांतिक मंजूरी दी गई। इनमें दुर्ग का शासकीय पोल्ट्री फार्म, रामानुजगंज का पशु चिकित्सालय परिसर, जशपुर की भूमि, सक्ती का बुधवारी बाजार और धमतरी का रुद्री चौक शामिल हैं।
- सुशासन एवं अभिसरण विभाग के लिए तीन नए पद सृजित करने की मंजूरी दी गई।
- वन मुख्यालय, अरण्य भवन, नवा रायपुर में एक वर्ष के लिए विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी का अस्थायी पद स्वीकृत किया गया।
- स्वर्गीय डॉ. राकेश मोहन चंदोला की सेवा को परिवार पेंशन के प्रयोजन से नियमित सेवा मानकर पात्र परिजनों को परिवार पेंशन, एरियर्स और नियमानुसार ब्याज देने की मंजूरी दी गई।
- छत्तीसगढ़ औद्योगिक भूमि एवं भवन प्रबंधन नियम, 2015 में संशोधन को स्वीकृति दी गई, जिससे औद्योगिक भूमि के उपयोग और आवंटन की प्रक्रिया को अधिक सरल तथा पारदर्शी बनाने का लक्ष्य है।
- कृषक उन्नति योजना में संशोधन को मंजूरी देते हुए धान फसल पर आदान सहायता राशि प्रति क्विंटल के बजाय प्रति एकड़ के आधार पर देने का निर्णय लिया गया।
किसानों और विकास परियोजनाओं पर रहा विशेष ध्यान
छत्तीसगढ़ कैबिनेट के फैसले कृषि, घरेलू बिजली राहत, सरकारी कर्मचारियों की चिकित्सा सुविधा, सड़क और रेल संपर्क, पर्यटन, उद्योग तथा खेल विकास जैसे अलग-अलग क्षेत्रों से जुड़े हैं। इन प्रस्तावों के प्रभावी क्रियान्वयन से संबंधित विभागों को आगे की कार्यवाही करनी होगी।
धान खरीदी के लिए तय दर और व्यवस्था किसानों के लिए प्रमुख विषय हैं, जबकि बुनियादी ढांचे और रोजगार से जुड़े प्रस्ताव प्रदेश में विकास गतिविधियों को बढ़ाने के उद्देश्य से लाए गए हैं।
छत्तीसगढ़ हर्बल्स गिफ्ट पैक से महिला स्व-सहायता समूहों की आय को मिलेगा बढ़ावा