रायपुर में 22 अक्टूबर 2026 को राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने एक विशेष स्मारक सिक्के का अनावरण किया। यह सिक्का शदाणी दरबार की पांचवीं पीठाधीश की 200वीं जयंती के अवसर पर जारी किया गया। इस कार्यक्रम में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय भी मौजूद रहे।
200वीं जयंती पर मिला राष्ट्रीय सम्मान
भारत सरकार के वित्त मंत्रालय ने आध्यात्मिक और सांस्कृतिक योगदान को सम्मान देने के लिए यह विशेष सिक्का जारी किया। माता हासी देवी का सिंधी समाज में विशेष स्थान है। इस अवसर को देश-विदेश में रहने वाले सिंधी समुदाय के लिए गौरवपूर्ण माना जा रहा है।
स्मारक सिक्के पर क्या है खास?
जारी किए गए सिक्के पर माता हासी देवी की छवि अंकित है। इसके दूसरी ओर अशोक स्तंभ का सिंह शीर्ष और 200 रुपये का मूल्यवर्ग दर्शाया गया है। सिक्के के माध्यम से उनके जीवन, शिक्षाओं और आध्यात्मिक योगदान को आने वाली पीढ़ियों तक पहुंचाने का प्रयास किया गया है।
श्रद्धालु और सिक्का संग्राहक कैसे बुक कर सकेंगे?
सिक्के के अनावरण के बाद श्रद्धालु और सिक्का संग्राहक शदाणी दरबार की विभिन्न इकाइयों के माध्यम से इसकी बुकिंग कर सकेंगे। इच्छुक लोगों को उपलब्धता और बुकिंग की प्रक्रिया के लिए शदाणी दरबार से संपर्क करना चाहिए।
कार्यक्रम में कौन-कौन रहा मौजूद?
समारोह में शदाणी दरबार के पीठाधीश संत डॉ. युधिष्ठिर लाल ने स्वागत उद्बोधन दिया। राज्य की प्रथम महिला रानी डेका काकोटी भी कार्यक्रम में उपस्थित रहीं। सांसद बृजमोहन अग्रवाल और विधायक पुरंदर मिश्रा सहित कई जनप्रतिनिधियों ने भाग लिया। वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी और देशभर से आए सिंधी समाज के प्रतिनिधि भी इस अवसर पर मौजूद थे।
सिंधी समाज के लिए क्यों खास है यह अवसर?
यह आयोजन धार्मिक और सांस्कृतिक विरासत को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने से जुड़ा है। स्मारक सिक्के के जरिए माता हासी देवी की स्मृति और उनकी शिक्षाओं को संरक्षित करने का प्रयास किया गया है। ऐसे स्मारक देश की आध्यात्मिक परंपराओं और ऐतिहासिक व्यक्तित्वों के योगदान को याद रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
इस खबर से जुड़ी जरूरी बातें
- आयोजन स्थल: लोकभवन, छत्तीसगढ़ मंडपम, रायपुर।
- जारी सिक्का: 200 रुपये मूल्यवर्ग का स्मारक सिक्का।
- विशेष अवसर: माता हासी देवी की 200वीं जयंती।
- प्रमुख अतिथि: राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु।
- उपस्थित अतिथि: राज्यपाल रमेन डेका और मुख्यमंत्री विष्णु देव साय।
भावी पीढ़ियों तक पहुंचेगी आध्यात्मिक विरासत
यह स्मारक सिक्का केवल एक विशेष अवसर की यादगार नहीं है। यह सिंधी समाज की आध्यात्मिक और सांस्कृतिक विरासत को सम्मान देने का माध्यम भी है। इस पहल से माता हासी देवी के जीवन और योगदान को व्यापक पहचान मिलने की उम्मीद है।
डिस्क्लेमर: यह समाचार उपलब्ध आधिकारिक जानकारी और प्रकाशित रिपोर्टों पर आधारित है। सिक्के की बुकिंग, उपलब्धता और अन्य विवरणों के लिए शदाणी दरबार से पुष्टि करें।
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