प्रधानमंत्री आवास योजना : छत्तीसगढ़ में गरीब और जरूरतमंद परिवारों को पक्का घर देने की दिशा में लगातार काम हो रहा है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आवास निर्माण से लोगों के जीवन में बदलाव आ रहा है। सुरक्षित घर मिलने से परिवारों को बारिश, गर्मी और ठंड से बचाव मिलता है। साथ ही, उन्हें सम्मानजनक जीवन जीने का अवसर मिलता है।
मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में राज्य सरकार आवास योजनाओं के क्रियान्वयन पर जोर दे रही है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की इस पहल से उन परिवारों को सहारा मिला है, जो आर्थिक कठिनाइयों के कारण अपना घर नहीं बना पा रहे थे।
ग्रामीण क्षेत्रों में 26 लाख से अधिक आवास स्वीकृत
ग्रामीण क्षेत्रों में योजना के तहत अब तक 26 लाख से अधिक आवास स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से लगभग 11 लाख 78 हजार मकानों का निर्माण पूरा हो चुका है। राज्य सरकार ने अपने पहले मंत्रिमंडल में 18 लाख 12 हजार आवासों को आगे बढ़ाने का निर्णय लिया था।
नक्सल प्रभावित और आत्मसमर्पण कर चुके नक्सलियों के परिवारों के लिए भी विशेष प्रावधान किए गए हैं। केंद्र से इस विशेष परियोजना के तहत 15 हजार आवासों की स्वीकृति मिली। इनमें छत्तीसगढ़ में 5,600 आवास स्वीकृत किए गए हैं।
मुख्यमंत्री आवास योजना के अंतर्गत भी जरूरतमंद परिवारों को सहायता मिली है। इस श्रेणी में 39 हजार आवास स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 24 हजार आवास पूरे हो चुके हैं।
आवास प्लस 2.0 से 3.65 लाख नए घरों का लक्ष्य
आवास प्लस 2.0 सर्वे के आधार पर छत्तीसगढ़ को नए आवासों का लक्ष्य मिला है। 11 सितंबर 2026 को भारत सरकार ने राज्य के लिए लगभग 3.65 लाख नए आवास निर्धारित किए। इससे पात्र ग्रामीण परिवारों तक आवास सुविधा पहुंचाने में मदद मिलेगी।
नए सर्वे का उद्देश्य ऐसे जरूरतमंद परिवारों की पहचान करना है, जो पहले आवास योजना के लाभ से वंचित रह गए थे। पात्रता और सत्यापन की प्रक्रिया के बाद लाभार्थियों को योजना का लाभ दिया जाएगा।
शहरी क्षेत्रों में 2.22 लाख आवासों का निर्माण पूरा
शहरी क्षेत्रों में भी आवास निर्माण की प्रगति दर्ज की गई है। योजना के तहत स्वीकृत 2 लाख 43 हजार आवासों में से 2 लाख 22 हजार पूरे हो चुके हैं। इनमें लाभार्थी आधारित निर्माण यानी बीएलसी घटक के 1,93,175 आवास शामिल हैं। वहीं, साझेदारी में किफायती आवास यानी एएचपी घटक के 29,267 आवास पूरे हुए हैं।
पिछले ढाई वर्षों में बीएलसी घटक के तहत 75,709 आवास पूरे किए गए। एएचपी घटक में 13,082 आवासों का निर्माण पूरा हुआ। इस घटक के 14,687 हितग्राहियों को आवास आवंटित किए गए। वहीं, 12,530 हितग्राहियों को पूर्ण आवासों में बसाया गया।
आवास निर्माण को आगे बढ़ाने के लिए नगरीय निकायों को 909 करोड़ रुपये जारी किए गए। इससे निर्माण कार्यों और लाभार्थियों को आवास उपलब्ध कराने की प्रक्रिया को सहयोग मिला।
शहरी आवास योजना 2.0 में भी काम जारी
प्रधानमंत्री आवास योजना शहरी 2.0 के तहत भी राज्य के शहरों में सर्वे और आवास स्वीकृति का काम जारी है। डोर-टू-डोर सर्वे के माध्यम से पात्र परिवारों की पहचान की जा रही है। तकनीक आधारित प्रक्रिया से आवेदन और स्वीकृति के काम को गति देने का प्रयास है।
इस चरण में 71,416 आवास स्वीकृत किए गए हैं। इनमें से 4,129 आवास पूरे हो चुके हैं। इसके अलावा 25,165 आवास निर्माणाधीन हैं। इन कार्यों के लिए नगरीय निकायों को 533.93 करोड़ रुपये जारी किए गए हैं। शहरी क्षेत्रों में आगे 1.32 लाख आवासों के निर्माण का लक्ष्य भी रखा गया है।
पक्का घर मिलने से जीवन स्तर में सुधार
कच्चे और जर्जर मकानों में रहने वाले परिवारों को कई तरह की परेशानियां झेलनी पड़ती हैं। बारिश में छत टपकने और दीवारों में सीलन जैसी समस्याएं बढ़ जाती हैं। गर्मी और ठंड के मौसम में भी सुरक्षित आवास का अभाव कठिनाई पैदा करता है।
पक्का घर मिलने से परिवारों को सुरक्षित रहने की जगह मिलती है। इससे बच्चों, बुजुर्गों और महिलाओं के लिए बेहतर वातावरण बनता है। घर के साथ स्वच्छ पेयजल, बिजली, शौचालय, गैस और राशन जैसी सुविधाएं भी जीवन को आसान बनाती हैं।
इस तरह प्रधानमंत्री आवास योजना केवल मकान निर्माण तक सीमित नहीं है। यह जरूरतमंद परिवारों को सुरक्षा, सम्मान और बेहतर भविष्य की उम्मीद देती है। ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में आवास निर्माण से सामाजिक तथा आर्थिक बदलाव को भी बढ़ावा मिल रहा है।
योजना से जुड़ी प्रमुख उपलब्धियां
- ग्रामीण आवास: 26 लाख से अधिक आवास स्वीकृत और लगभग 11.78 लाख पूरे।
- नए ग्रामीण आवास: आवास प्लस 2.0 के तहत लगभग 3.65 लाख का लक्ष्य।
- शहरी आवास: 2.43 लाख स्वीकृत आवासों में से 2.22 लाख पूरे।
- शहरी योजना 2.0: 71,416 आवास स्वीकृत और 4,129 पूरे।
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