छत्तीसगढ़ में खेल प्रतिभाओं को आगे बढ़ाने के लिए राज्य सरकार नई व्यवस्था तैयार कर रही है। खेल उत्कर्ष मिशन के जरिए ग्रामीण, जनजातीय और दूरस्थ क्षेत्रों के खिलाड़ियों को बेहतर अवसर देने की योजना है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने 13 अक्टूबर को मंत्रालय महानदी भवन में इसकी उच्चस्तरीय समीक्षा की।
मुख्यमंत्री ने कहा कि प्रदेश में प्रतिभाशाली खिलाड़ियों की कमी नहीं है। जरूरत उन्हें समय पर पहचानने और सही प्रशिक्षण देने की है। उन्होंने ज्ञानेश्वरी यादव और संजू देवी जैसी खिलाड़ियों का उदाहरण भी दिया।
बैठक में प्रतिभाओं की खोज से लेकर उच्चस्तरीय प्रदर्शन तक की व्यवस्था पर चर्चा हुई। सरकार का लक्ष्य खिलाड़ियों को प्रशिक्षण, आधुनिक सुविधाएं और प्रतियोगिताओं के पर्याप्त अवसर उपलब्ध कराना है।
खेल उत्कर्ष मिशन में गांवों की प्रतिभाओं पर रहेगा जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि प्रतिभा खोज अभियान बड़े शहरों तक सीमित न रहे। गांवों, जनजातीय क्षेत्रों और दूरस्थ इलाकों के खिलाड़ियों को भी अवसर मिले। इन क्षेत्रों में तीरंदाजी और कबड्डी जैसे खेलों से युवाओं का जुड़ाव है।
योजना के तहत प्रतिभाशाली बच्चों की पहचान करके उन्हें व्यवस्थित प्रशिक्षण से जोड़ने पर जोर दिया जाएगा। बेहतर प्रदर्शन करने वाले खिलाड़ियों को आगे के प्रशिक्षण केंद्रों में भेजने की व्यवस्था प्रस्तावित है।
स्कूलों से मजबूत होगी खेलों की संस्कृति
मुख्यमंत्री ने स्कूल स्तर से बच्चों को खेल गतिविधियों में शामिल करने पर जोर दिया। उन्होंने व्यायाम शिक्षकों के माध्यम से नियमित खेल गतिविधियां बढ़ाने के निर्देश दिए।
खेल बच्चों में अनुशासन, आत्मविश्वास और टीम भावना विकसित करते हैं। शुरुआती स्तर पर प्रतिभा की पहचान होने से बच्चों को समय पर विशेषज्ञ प्रशिक्षण मिल सकता है। इससे खेलों को करियर के रूप में अपनाने का रास्ता भी खुलेगा।
प्रशिक्षण केंद्रों से मिलेगी खिलाड़ियों को नई दिशा
बैठक में एथलेटिक्स, तीरंदाजी, हॉकी, मुक्केबाजी, कुश्ती और भारोत्तोलन सहित कई खेलों पर चर्चा हुई। बैडमिंटन, तैराकी, जूडो और कबड्डी भी प्राथमिकता वाले खेलों में शामिल हैं।
प्रस्तावित व्यवस्था में फीडर सेंटर, खेल अकादमियों और सेंटर ऑफ एक्सीलेंस के बीच समन्वय बनाया जाएगा। खिलाड़ियों के प्रदर्शन की नियमित निगरानी भी की जाएगी। इससे बेहतर प्रदर्शन करने वालों को अगले स्तर तक पहुंचने में मदद मिलेगी।
स्पोर्ट्स साइंस और आधुनिक सुविधाओं पर फोकस
मुख्यमंत्री ने योग्य कोचों की उपलब्धता सुनिश्चित करने को कहा। खेलों की जरूरत के अनुसार विशेषज्ञ प्रशिक्षकों और सुविधाओं की व्यवस्था करने पर भी जोर दिया गया।
योजना में पोषण, स्वास्थ्य जांच, फिटनेस, मनोवैज्ञानिक सहयोग और चोटों से उबरने की सुविधाओं पर विचार हुआ। आधुनिक स्पोर्ट्स साइंस से खिलाड़ियों के प्रदर्शन को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।
बैठक में बिलासपुर स्पोर्ट्स एक्सीलेंस सेंटर की क्षमता बढ़ाने की योजना की समीक्षा भी हुई। इसकी आवासीय क्षमता 165 से बढ़ाकर 300 खिलाड़ियों तक करने का प्रस्ताव है।
खेल उत्कर्ष मिशन में महिला और दिव्यांग खिलाड़ियों को अवसर
मुख्यमंत्री ने महिला और दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए विशेष प्रयास करने के निर्देश दिए। बैठक में विशेष प्रशिक्षण शिविर और पैरा स्पोर्ट्स के विकास पर चर्चा हुई।
इसके साथ ही टैलेंट हंट और मुख्यमंत्री ट्रॉफी के जरिए प्रतियोगिताएं आयोजित करने की योजना पर विचार किया गया। विकासखंड, जिला और राज्य स्तर पर प्रतियोगिताओं से नई प्रतिभाओं को सामने लाने में मदद मिलेगी।
पांच वर्षों की कार्ययोजना तैयार करने के निर्देश
मुख्यमंत्री ने मिशन के लिए आगामी पांच वर्षों की स्पष्ट कार्ययोजना बनाने को कहा। बैठक में वित्तीय प्रबंधन और विभिन्न विभागों के बीच समन्वय पर भी चर्चा हुई।
खेल एवं युवा कल्याण, स्कूल शिक्षा, स्वास्थ्य और उच्च शिक्षा विभाग सहित अन्य विभागों की भूमिका महत्वपूर्ण होगी। बैठक में उप मुख्यमंत्री अरुण साव, वित्त मंत्री ओ.पी. चौधरी और वरिष्ठ अधिकारी मौजूद रहे।
सरकार की प्रस्तावित योजना का उद्देश्य केवल खेल मैदान और सुविधाएं बढ़ाना नहीं है। खिलाड़ियों को प्रतिभा पहचान से लेकर उच्चस्तरीय प्रतियोगिताओं तक सहयोग देने वाली व्यवस्था विकसित करना भी इसका हिस्सा है।
खिलाड़ियों को आगे बढ़ाने के लिए प्रस्तावित प्रमुख कदम
- गांवों और दूरस्थ क्षेत्रों में प्रतिभा खोज अभियान चलाना।
- फीडर सेंटर और उत्कृष्टता केंद्रों के बीच प्रशिक्षण व्यवस्था बनाना।
- कोचिंग, पोषण और स्पोर्ट्स साइंस सुविधाओं पर ध्यान देना।
- महिला और दिव्यांग खिलाड़ियों के लिए विशेष अवसर विकसित करना।
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