छत्तीसगढ़ में साइबर जागृति अभियान से 1.70 करोड़ लोग जागरूक

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डिजिटल सुविधाओं के साथ साइबर अपराधों की चुनौती भी बढ़ रही है। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नागरिकों से सतर्क रहने की अपील की। उन्होंने साइबर सुरक्षा में जनभागीदारी को जरूरी बताया। रायपुर में साइबर जागृति अभियान एवं ट्रैफिक हैकाथॉन-2026 का अभिनंदन समारोह आयोजित हुआ। इस दौरान जागरूकता कार्यक्रमों और युवाओं के नवाचारों की सराहना की गई।

साइबर जागृति अभियान में 1.70 करोड़ लोगों तक पहुंचा संदेश

छत्तीसगढ़ पुलिस ने 15 अगस्त से 2 अक्टूबर 2026 तक विशेष अभियान चलाया। सात सप्ताह के दौरान पांच लाख से अधिक कार्यक्रम आयोजित किए गए। इन गतिविधियों के जरिए लगभग 1.70 करोड़ लोगों तक संदेश पहुंचा। स्कूलों, कॉलेजों, ग्राम पंचायतों और सार्वजनिक स्थलों पर जागरूकता कार्यक्रम हुए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि अभियान का समापन नहीं हुआ है। यह साइबर सुरक्षा की दिशा में नई शुरुआत है। उन्होंने युवाओं से परिवार और समाज को जागरूक करने की अपील की।

डिजिटल लेनदेन के साथ सुरक्षा भी जरूरी

डिजिटल भुगतान ने लोगों के दैनिक काम आसान किए हैं। हालांकि, ऑनलाइन ठगी के तरीके भी लगातार बदल रहे हैं। अपराधी फर्जी लिंक, निवेश योजनाओं और डिजिटल अरेस्ट जैसे तरीकों का इस्तेमाल करते हैं। इसलिए नागरिकों को साइबर अपराधों की पहचान करना जरूरी है।

उप मुख्यमंत्री और गृह मंत्री विजय शर्मा ने पुलिस की कार्रवाई की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि साइबर अपराधों के खिलाफ कार्रवाई से एफआईआर में कमी आई है। साथ ही, ठगी की रकम वापस मिलने की दर में वृद्धि हुई है।

ऑनलाइन ठगी से बचने के लिए अपनाएं सावधानी

साइबर सुरक्षा के लिए कुछ जरूरी बातों का ध्यान रखें।

  • अपना ओटीपी, पासवर्ड या बैंक संबंधी जानकारी किसी से साझा न करें।
  • अनजान संदेशों और संदिग्ध लिंक पर क्लिक करने से बचें।
  • फर्जी निवेश योजनाओं में पैसा लगाने से पहले जांच करें।
  • डिजिटल अरेस्ट के नाम पर धमकी मिलने पर घबराकर भुगतान न करें।
  • साइबर ठगी होने पर तुरंत हेल्पलाइन नंबर 1930 पर शिकायत करें।

इन सावधानियों से ऑनलाइन धोखाधड़ी का जोखिम कम करने में मदद मिल सकती है।

सोशल मीडिया से करोड़ों लोगों तक पहुंची जागरूकता

अभियान में फेसबुक, इंस्टाग्राम, एक्स, यूट्यूब और व्हाट्सऐप का उपयोग किया गया। जारी जानकारी के अनुसार, 3,100 से अधिक पोस्ट साझा की गईं। इन पोस्ट को 6.02 करोड़ से अधिक व्यूज मिले। पुलिस ने युवाओं को ‘साइबर प्रहरी’ के रूप में जोड़ने की पहल भी की।

मुंगेली, गरियाबंद, दुर्ग, रायपुर, जांजगीर-चांपा और बिलासपुर में अलग-अलग गतिविधियां हुईं। ग्राम सभाओं, नुक्कड़ नाटकों और रेडियो कार्यक्रमों से लोगों को जागरूक किया गया। बेहतर पहल करने वाले जिलों को समारोह में सम्मानित किया गया।

ट्रैफिक हैकाथॉन में युवाओं ने दिए नए सुझाव

समारोह में यातायात व्यवस्था सुधारने वाले युवाओं के सुझावों पर भी चर्चा हुई। प्रतिभागियों ने रायपुर के प्रमुख चौक-चौराहों की समस्याओं का अध्ययन किया। उन्होंने पार्किंग, लेन मार्किंग और पैदल यात्रियों की सुरक्षा पर सुझाव दिए।

कुछ प्रस्तावों में एआई और इंटरनेट ऑफ थिंग्स के उपयोग की बात भी सामने आई। इन तकनीकों से ट्रैफिक जाम की पहचान और आपातकालीन वाहनों के लिए रास्ता बनाने में मदद मिल सकती है। मुख्यमंत्री ने उपयोगी सुझावों पर गंभीरता से विचार करने की बात कही।

साइबर सुरक्षा के लिए निरंतर जनभागीदारी जरूरी

मुख्यमंत्री ने कहा कि सुरक्षित डिजिटल वातावरण बनाना सभी की साझा जिम्मेदारी है। पुलिस, प्रशासन, शैक्षणिक संस्थानों और नागरिकों को मिलकर काम करना होगा। लगातार जागरूकता से साइबर ठगी के प्रति सतर्कता बढ़ सकती है।



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