भारत में हॉरर का मतलब अक्सर हवेली, चुड़ैल और जंप-स्केयर रहा है. ऐसे में बोक्शी हॉरर फिल्म एक अलग रास्ता चुनती दिखती है. सिक्किम के जंगलों में बनी यह फिल्म 9 अक्टूबर 2026 को सिनेमाघरों में आ रही है. इससे पहले यह कई अंतरराष्ट्रीय फेस्टिवल घूम चुकी है.
बोक्शी हॉरर फिल्म आखिर किस बारे में है
यह एक किशोरी अनाहिता की कहानी है. स्कूल ट्रेक के दौरान वह सिक्किम की एक प्राचीन जगह पहुंचती है. वहां उसे एक पुरानी किंवदंती और बोक्शी नाम की डरावनी लोक-आकृति से जुड़े राज़ मिलते हैं. भार्गव सैकिया के निर्देशन वाली यह फिल्म 9 अक्टूबर 2026 को थिएटर में आएगी.
पांच बिंदुओं में फिल्म की पहचान
- जॉनर: फोक हॉरर, यानी लोककथा पर टिका डर.
- निर्देशक और निर्माता: भार्गव सैकिया, लेखक और एग्ज़ीक्यूटिव प्रोड्यूसर: हर्ष वैभव.
- मुख्य कलाकार: प्रसन्ना बिष्ट और मानसी मुल्तानी.
- भाषाएं: हिंदी, नेपाली, अंग्रेज़ी और ‘बोक्सिरित’.
- पहला प्रदर्शन: रॉटरडैम इंटरनेशनल फिल्म फेस्टिवल 2025.
फोक हॉरर क्या होता है
सीधे शब्दों में, फोक हॉरर हॉरर की एक खास धारा है. इसमें डर किसी बाहरी भूत से कम, लोक मान्यताओं से ज़्यादा आता है. आमतौर पर कहानी किसी दूर-दराज़ इलाके में चलती है. फिर वहां के रीति-रिवाज, जंगल और पुरानी कथाएं ही डर का आधार बनती हैं.
दरअसल ऐसी फिल्मों में बाहर से आया किरदार उस दुनिया को समझने की कोशिश करता है. बोक्शी में यही किरदार अनाहिता है. इसलिए दर्शक भी उसकी आंखों से सिक्किम की लोककथा को खोजते हैं.
फिल्म से जुड़ी रिपोर्ट्स में बोक्शी को लोककथाओं की एक डरावनी स्त्री-आकृति बताया गया है. वहीं एक रिपोर्ट कहानी में एक पंथ का ज़िक्र भी करती है, जो बोक्शी को पूजता है. हालांकि यह पंथ कहानी में कैसे आता है, यह फिल्म देखकर ही साफ होगा.
कहानी की परतें: टीचर, ट्रेक और सदमा
रॉटरडैम फेस्टिवल के परिचय में कहानी की एक और परत दिखती है. उसके मुताबिक अनाहिता अपनी मां के गायब होने से टूटी हुई है. ऐसे में उसे अपनी इतिहास टीचर शालिनी में सहारा मिलता है. वहीं शालिनी का किरदार मानसी मुल्तानी निभा रही हैं.
साथ ही फेस्टिवल का परिचय यह भी इशारा करता है कि शालिनी के इरादे साफ नहीं हैं. यानी कहानी सिर्फ बाहरी डर की नहीं, भरोसा टूटने की भी है. इसके अलावा एक रिपोर्ट ने फिल्म में इको-फेमिनिस्ट सोच का ज़िक्र किया है. सीधे शब्दों में, प्रकृति और स्त्री-शक्ति के रिश्ते पर फिल्म कुछ कहना चाहती है.
बोक्सिरित: एक फिल्म के लिए बनी पूरी भाषा
बोक्शी हॉरर फिल्म की सबसे चर्चित बात इसकी भाषा है. दरअसल ‘बोक्सिरित’ किसी इलाके की असली बोली नहीं है. इसे डच भाषाविद् यान फान स्टीनबर्गन ने खास इस फिल्म के लिए गढ़ा. ऐसी भाषा को अंग्रेज़ी में ‘कंस्ट्रक्टेड लैंग्वेज’ कहते हैं, यानी सोच-समझकर बनाई गई भाषा.
यानी मकसद यह है कि किंवदंती वाली दुनिया आम बोलचाल से अलग सुनाई दे. ईस्टमोजो के मुताबिक ‘बाहुबली’ के बाद यह पूरी तरह गढ़ी गई भाषा वाली दूसरी भारतीय फीचर फिल्म है. याद रहे कि ‘बाहुबली’ में कालकेय कबीला ‘किलिकि’ बोलता था.
सिक्किम में 80 दिन और तीन साल की तैयारी
सबसे पहले बात शूटिंग की. फिल्म की शूटिंग 80 दिन तक चली. टीम ने पूर्वी और पश्चिमी सिक्किम के साथ गंगटोक के आसपास काम किया. एक रिपोर्ट के मुताबिक ज़्यादातर असर कैमरे के सामने असली तरीकों से बनाए गए, कंप्यूटर ग्राफिक्स पर कम ज़ोर रहा.
हालांकि शूटिंग से पहले की तैयारी ज़्यादा लंबी थी. भार्गव सैकिया और हर्ष वैभव ने करीब तीन साल सिक्किम पर रिसर्च की. इसी दौरान स्थानीय लोगों से मान्यताओं और पारंपरिक प्रथाओं पर बात हुई. नतीजतन कलाकारों में त्रिशला तमांग और बीरू तमांग जैसे स्थानीय चेहरे भी शामिल हुए.
भार्गव सैकिया कौन हैं
ईस्टमोजो के मुताबिक भार्गव सैकिया असम के बिश्वनाथ से हैं. फिलहाल वे मुंबई में रहते हैं. वहीं उन्होंने लोरियन मोशन पिक्चर्स शुरू की. पहले वे 2014 की फिल्म ‘काफिरों की नमाज़’ के निर्माता रहे.
इसके बाद उन्होंने टॉम ऑल्टर और शेरनाज़ पटेल वाली फैंटेसी शॉर्ट फिल्म ‘द ब्लैक कैट’ बनाई. अब बोक्शी उनकी पहली फीचर फिल्म है. यानी पूर्वोत्तर से आया एक फिल्ममेकर हिमालयी लोककथा को मुख्यधारा के पर्दे पर ला रहा है.
फेस्टिवल से थिएटर तक का सफर
बोक्शी का वर्ल्ड प्रीमियर 2025 में रॉटरडैम में हुआ. इसके बाद यह स्पेन के सिटगेस, स्विट्ज़रलैंड के नॉयशैटेल और ऑस्ट्रेलिया के SXSW सिडनी में दिखी. सिटगेस को दुनिया में फैंटेसी और हॉरर का बड़ा मंच माना जाता है.
अब भारत में इसके थिएट्रिकल वितरण का काम सेतुमाधवन नापन देख रहे हैं. निर्देशक ने इसे युवा दर्शकों के लिए बनी, बड़े पर्दे पर देखी जाने वाली फिल्म बताया है. फिर भी सर्टिफिकेट आने से पहले उम्र को लेकर अंदाज़ा ठीक नहीं. इसलिए बोक्शी हॉरर फिल्म को बच्चों के साथ देखने का फैसला सर्टिफिकेट के बाद ही करें.
बोक्शी हॉरर फिल्म देखने से पहले ध्यान रखें
- फिल्म में कई भाषाएं हैं, इसलिए सबटाइटल वाले शो चुनें.
- सेंसर सर्टिफिकेट देखकर ही बच्चों को साथ ले जाएं.
- स्वतंत्र फिल्म है, इसलिए हर शहर में शो मिलना तय नहीं, पहले टिकट ऐप पर जांचें.
- अगर आप सिर्फ झटकों वाला डर चाहते हैं, तो पहले रिव्यू पढ़ लें.
नोट: रिलीज़ डेट, कलाकार, भाषा और फेस्टिवल से जुड़ी जानकारी 3 अक्टूबर 2026 तक की रिपोर्ट्स, मेकर्स के एलान और फेस्टिवल पेज पर आधारित है. यह प्रीव्यू है, रिव्यू नहीं, और जानकारी बदल सकती है.
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