विश्व रेबीज दिवस 2026: ‘स्ट्रॉन्गर टुगेदर’ के साथ रोकी जा सकने वाली बीमारी

विश्व रेबीज दिवस 2026, पशु चिकित्सक कुत्ते को टीका लगाते हुए

विश्व रेबीज दिवस 2026 सोमवार, 28 सितंबर को मनाया जाएगा. इस साल की थीम ‘स्ट्रॉन्गर टुगेदर’ यानी ‘मिलकर मज़बूत’ है. रेबीज एक ऐसी बीमारी है, जो लक्षण दिखने के बाद लगभग हमेशा जानलेवा होती है. इसके बावजूद इसे 100% रोका जा सकता है. इस लेख में समझिए कि यह दिन क्यों मनाया जाता है, बीमारी कैसे फैलती है और इसे खत्म करने के लिए दुनिया क्या कर रही है.

28 सितंबर को रेबीज दिवस क्यों मनाते हैं

विश्व रेबीज दिवस 2026 सोमवार, 28 सितंबर को है. यह तारीख रेबीज का पहला टीका बनाने वाले लुई पाश्चर की पुण्यतिथि है. इस साल की थीम ‘स्ट्रॉन्गर टुगेदर’ है. इसका संदेश है कि डॉक्टर, पशु चिकित्सक, सरकारें और आम लोग मिलकर ही रेबीज को खत्म कर सकते हैं.

रेबीज के बारे में पांच अहम तथ्य

  • WHO के 2021 के अनुमान के मुताबिक रेबीज से हर साल करीब 44,000 मौतें होती हैं.
  • इनमें लगभग 40% बच्चे 15 साल से कम उम्र के होते हैं.
  • 99% मामलों में वायरस कुत्ते के काटने या खरोंचने से फैलता है.
  • लक्षण आने के बाद बीमारी लगभग 100% जानलेवा है.
  • समय पर इलाज से इसे पूरी तरह रोका जा सकता है.

विश्व रेबीज दिवस 2026 का इतिहास और महत्व

28 सितंबर की तारीख फ्रांस के वैज्ञानिक लुई पाश्चर से जुड़ी है. इसी दिन 1895 में उनका निधन हुआ था. खास बात यह है कि पाश्चर ने ही रेबीज का पहला टीका विकसित किया था. इसलिए उनकी पुण्यतिथि को इस बीमारी के खिलाफ जागरूकता के दिन के रूप में चुना गया.

दरअसल, यह दिन 2007 से मनाया जा रहा है. इसकी शुरुआत ग्लोबल अलायंस फॉर रेबीज कंट्रोल ने की थी. अब विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO), विश्व पशु स्वास्थ्य संगठन (WOAH) और कई देश इसमें साथ हैं.

2026 की थीम का मतलब

WOAH के मुताबिक ‘स्ट्रॉन्गर टुगेदर’ थीम यह बताती है कि रेबीज को अकेले कोई नहीं हरा सकता. इसलिए डॉक्टर, पशु चिकित्सक, सरकारें, शिक्षक और आम लोग, सबको साथ आना होगा. यही सोच ‘वन हेल्थ’ कहलाती है, जिसमें इंसान और जानवर की सेहत को जुड़ा हुआ माना जाता है.

रेबीज क्या है और कैसे फैलता है

रेबीज एक वायरस से होने वाली बीमारी है. साथ ही, यह संक्रमित जानवर की लार के ज़रिए फैलती है. आमतौर पर काटने, खरोंचने या कटी त्वचा पर चाटने से वायरस शरीर में पहुंचता है. इसके बाद यह नसों के रास्ते दिमाग तक जाता है.

WHO के अनुसार इंसानों में रेबीज के 99% मामले कुत्तों के काटने या खरोंचने से होते हैं. हालांकि बिल्ली, बंदर, नेवला और चमगादड़ भी इसे फैला सकते हैं.

इनक्यूबेशन पीरियड

वायरस शरीर में जाने के बाद लक्षण आने में आमतौर पर 2 से 3 महीने लगते हैं. फिर भी यह समय एक हफ्ते से लेकर एक साल तक हो सकता है. यही वजह है कि लोग अक्सर पुरानी खरोंच को भूल जाते हैं.

दो तरह के लक्षण

इसके अलावा WHO बीमारी के दो रूप बताता है. पहला ‘फ्यूरियस’ रेबीज है, जिसमें बेचैनी, ज़्यादा सक्रियता और पानी से डर जैसे लक्षण दिखते हैं. वहीं दूसरा ‘पैरालिटिक’ रेबीज है, जिसमें धीरे-धीरे लकवा फैलता है. करीब 20% मामले इसी दूसरे रूप के होते हैं.

आंकड़े क्या कहते हैं

WHO के 2021 के वैश्विक स्वास्थ्य अनुमान के मुताबिक रेबीज से हर साल करीब 44,000 मौतें होती हैं. वहीं इनमें से लगभग 40% बच्चे 15 साल से कम उम्र के होते हैं. सबसे ज़्यादा असर एशिया और अफ्रीका के गरीब और ग्रामीण इलाकों में दिखता है.

खास तौर पर भारत के लिए यह मुद्दा अहम है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार देश में 2023 में कुत्ते के काटने के करीब 27.5 लाख मामले दर्ज हुए. इसलिए भारत सरकार राष्ट्रीय रेबीज नियंत्रण कार्यक्रम (NRCP) चला रही है.

बचाव कैसे होता है: पोस्ट-एक्सपोज़र प्रोफिलैक्सिस

काटने के बाद दिए जाने वाले इलाज को पोस्ट-एक्सपोज़र प्रोफिलैक्सिस (PEP) कहते हैं. WHO के मुताबिक इसके तीन हिस्से हैं:

1. घाव को कम से कम 15 मिनट साबुन और पानी से धोना.

2. एंटी-रेबीज टीके का पूरा कोर्स.

3. ज़रूरत होने पर रेबीज इम्युनोग्लोबुलिन या मोनोक्लोनल एंटीबॉडी.

इसके अलावा WHO संपर्क को तीन श्रेणियों में बांटता है. छूने या खिलाने पर टीके की ज़रूरत नहीं होती. वहीं हल्की खरोंच पर टीका लगता है. गहरे घाव या चमगादड़ के संपर्क में पूरा PEP दिया जाता है.

कुत्तों का टीकाकरण क्यों है असली कुंजी

फिलहाल विशेषज्ञ मानते हैं कि रेबीज खत्म करने का सबसे असरदार तरीका कुत्तों का टीकाकरण है. दरअसल, जब ज़्यादातर कुत्तों को टीका लग जाता है, तो वायरस का फैलना रुक जाता है. नतीजतन, इंसानों तक बीमारी पहुंचने का खतरा भी घट जाता है.

किन देशों ने हासिल की सफलता

WHO के मुताबिक सितंबर 2026 तक भूटान, चिली और मेक्सिको ने कुत्तों से फैलने वाले रेबीज को सार्वजनिक स्वास्थ्य समस्या के रूप में खत्म करने की मान्यता हासिल की है. ऐसे में भूटान पड़ोसी देश होने के नाते भारत के लिए एक अच्छा उदाहरण है.

आम लोग क्या कर सकते हैं

विश्व रेबीज दिवस 2026 सिर्फ सरकारी कार्यक्रमों का दिन नहीं है. दरअसल, हर परिवार इसमें अपनी भूमिका निभा सकता है.

  • अपने पालतू जानवरों को समय पर टीका लगवाएं.
  • बच्चों को सिखाएं कि जानवर काटे या खरोंचे, तो तुरंत बताएं.
  • किसी भी काटने पर घरेलू उपाय छोड़कर अस्पताल जाएं.
  • टीके का पूरा कोर्स करें, बीच में न छोड़ें.
  • मोहल्ले में होने वाले पशु टीकाकरण अभियानों में सहयोग करें.

रेबीज के खिलाफ ‘मिलकर मज़बूत’ संदेश

आखिर में, विश्व रेबीज दिवस 2026 हमें याद दिलाता है कि जानकारी ही सबसे बड़ा टीका है. यह बीमारी जितनी खतरनाक है, उतनी ही आसानी से रोकी भी जा सकती है. ‘मिलकर मज़बूत’ थीम का यही संदेश है कि परिवार, समाज और सरकार साथ आएं, तो रेबीज से एक भी मौत न हो.

डिस्क्लेमर: यह सामग्री केवल सामान्य जानकारी के लिए है. इसे चिकित्सकीय सलाह का विकल्प न मानें. किसी बीमारी, दवा, डाइट या व्यायाम में बदलाव से पहले योग्य डॉक्टर या संबंधित विशेषज्ञ से सलाह लें. किसी भी जानवर के काटने पर तुरंत नज़दीकी अस्पताल जाएं.

यह भी पढ़े

कॉफी और गहरी नींद: सुबह की कॉफी भी रात की नींद बिगाड़ सकती है

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *