नागरिक सुविधाओं को प्राथमिकता
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग की समीक्षा की। उन्होंने कहा कि शहरों में चल रहे विकास कार्यों को निर्धारित समय-सीमा में पूरा किया जाना चाहिए। साथ ही, निर्माण कार्यों की गुणवत्ता पर भी विशेष ध्यान दिया जाए।
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को योजनाओं और विकास कार्यों की नियमित निगरानी के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि सड़क, पेयजल, प्रकाश व्यवस्था और स्वच्छता जैसी सुविधाएं सीधे नागरिकों के जीवन से जुड़ी हैं। इसलिए इन मूलभूत सेवाओं के संचालन में किसी भी प्रकार की लापरवाही नहीं होनी चाहिए।
शहरी विकास में नालंदा परिसर और बुनियादी ढांचे पर फोकस
युवाओं के लिए बनाए जा रहे नालंदा परिसरों की भी समीक्षा हुई। प्रदेश के 38 नगरीय निकायों में इनके निर्माण की स्वीकृति दी गई है। इनमें 31 परिसरों का निर्माण फिलहाल जारी है।
इन परिसरों में आधुनिक अध्ययन सुविधाएं उपलब्ध कराने की योजना है। मुख्यमंत्री ने निर्माणाधीन परियोजनाओं को जल्द पूरा करने के निर्देश दिए।
इसके अलावा नगरोत्थान योजना के तहत सड़क चौड़ीकरण, बाईपास और फ्लाईओवर बनाए जा रहे हैं। सर्विस लेन और अंडरपास जैसी सुविधाओं पर भी काम हो रहा है।
शहरी विकास में ई-बसों से बढ़ेगी सुविधा
सार्वजनिक परिवहन को बेहतर बनाने के लिए चार प्रमुख शहरों में 240 ई-बसें चलाने की तैयारी है। इनमें रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा शामिल हैं।
योजना के तहत जरूरी अधोसंरचना का काम मार्च 2027 से पहले पूरा करने का लक्ष्य है। ई-बसों से यात्रियों को सुविधाजनक परिवहन मिलेगा। साथ ही, पर्यावरण के अनुकूल परिवहन व्यवस्था को बढ़ावा मिलेगा।
पेयजल और स्वच्छता पर सख्ती
अमृत मिशन 2.0 की समीक्षा के दौरान मुख्यमंत्री ने धीमी प्रगति पर नाराजगी जताई। उन्होंने लंबित कार्यों को मिशन मोड में पूरा करने को कहा। प्रदेश के नगरीय क्षेत्रों में शत-प्रतिशत पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करना प्राथमिकता है।
सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट में आधुनिक तकनीक अपनाने पर भी जोर दिया गया। इसके साथ ही ठोस अपशिष्ट के वैज्ञानिक प्रबंधन के लिए हर निकाय में प्रोसेसिंग प्लांट की दिशा में काम करने को कहा गया।
शहरी विकास से स्वच्छ हवा और हरित क्षेत्रों पर जोर
स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में रायपुर ने 10 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में छठा स्थान हासिल किया। रायपुर को 189 अंक मिले। मुख्यमंत्री ने इस उपलब्धि पर नगर निगम की टीम को बधाई दी।
उन्होंने शहरों में हरित क्षेत्र बढ़ाने के निर्देश दिए। कम पेड़ वाले क्षेत्रों की पहचान कर बड़े स्तर पर पौधरोपण करने को कहा गया।
आवास और शिकायत समाधान पर ध्यान
प्रधानमंत्री आवास योजना-शहरी की भी समीक्षा की गई। मुख्यमंत्री ने पात्र परिवारों को जल्द आवास उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। आवंटन और व्यवस्थापन की प्रक्रिया में तेजी लाने पर जोर दिया गया।
मुख्यमंत्री हेल्पलाइन से जुड़ी शिकायतों की स्थिति भी देखी गई। अधिकारियों को नागरिकों की समस्याओं का संवेदनशीलता के साथ समाधान करने को कहा गया।
सीबीजी प्लांट से बढ़ेगा हरित ईंधन
राज्य के आठ नगरीय निकायों में सीबीजी प्लांट स्थापित किए जा रहे हैं। इन परियोजनाओं पर करीब 800 करोड़ रुपये खर्च किए जाएंगे। इनका उद्देश्य स्वच्छ और सतत ईंधन को बढ़ावा देना है।
इसके अलावा, नगरीय निकायों की आर्थिक स्थिति मजबूत करने पर भी जोर दिया गया। राजस्व और कर संग्रह बढ़ाने के लिए बेहतर प्रदर्शन करने वाले निकायों को प्रोत्साहित करने की व्यवस्था विकसित की जाएगी।
एक नजर में
- 240 ई-बसें: रायपुर, बिलासपुर, दुर्ग और कोरबा में संचालन प्रस्तावित।
- 800 करोड़ रुपये: आठ नगरीय निकायों में सीबीजी प्लांट के लिए।
- 38 नालंदा परिसर: 31 का निर्माण वर्तमान में जारी।
- 200 करोड़ रुपये: आदर्श शहर समृद्धि योजना के लिए बजट प्रावधान।
- 189 अंक: स्वच्छ वायु सर्वेक्षण-2026 में रायपुर का स्कोर।
कुल मिलाकर, शहरी विकास की योजनाओं को समयबद्ध तरीके से लागू करने पर सरकार का जोर है। नागरिक सुविधाओं, परिवहन, स्वच्छता और पेयजल को प्राथमिकता दी जा रही है। साथ ही, आधुनिक और पर्यावरण-अनुकूल शहरों के निर्माण की दिशा में भी कदम बढ़ाए जा रहे हैं।
मुख्य बातें
- अमृत मिशन के लंबित कार्य मिशन मोड में पूरे होंगे।
- चार शहरों में 240 ई-बसें चलाने की तैयारी है।
- 38 नगरीय निकायों में नालंदा परिसर स्वीकृत हैं।
- आठ निकायों में 800 करोड़ रुपये से सीबीजी प्लांट लगेंगे।
- नागरिक शिकायतों के त्वरित समाधान पर जोर दिया गया।
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