रूसी राष्ट्रपति पुतिन का भारत दौरा 11 सितंबर को होने जा रहा है। रूस के राष्ट्रपति व्लादिमीर पुतिन नई दिल्ली पहुंचेंगे। वह BRICS शिखर सम्मेलन में हिस्सा लेंगे। इससे पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के साथ उनकी द्विपक्षीय बैठक होगी।
क्रेमलिन ने दोनों नेताओं की मुलाकात की पुष्टि की है। रूस ने भारत को अपना रणनीतिक साझेदार बताया है। ऐसे में यह बैठक दोनों देशों के लिए अहम मानी जा रही है।
बैठक में व्यापार और आर्थिक सहयोग पर चर्चा हो सकती है। परिवहन और कारोबारी अवसर भी एजेंडे में रहेंगे। इसके अलावा रक्षा से जुड़े मुद्दों पर भी बातचीत संभव है।
रूसी राष्ट्रपति पुतिन का भारत दौरा और PM मोदी के साथ बैठक
रूसी राष्ट्रपति पुतिन का भारत दौरा करीब नौ महीने के अंतराल के बाद हो रहा है। इससे पहले रूसी राष्ट्रपति 4 दिसंबर 2025 को भारत आए थे। उस यात्रा के दौरान दोनों नेताओं ने कई अहम मुद्दों पर बातचीत की थी।
इस बार बैठक में दोनों देशों के व्यापार पर विशेष ध्यान रहने की संभावना है। भारतीय कंपनियां रूस में कारोबार बढ़ाना चाहती हैं। वहीं, रूस भी भारतीय बाजार में अपनी मौजूदगी बढ़ाने का इच्छुक है।
इसके अलावा दोनों देशों के बीच भुगतान व्यवस्था पर भी चर्चा हो सकती है। रूस के अनुसार, भारत और रूस के बीच ज्यादातर भुगतान स्थानीय मुद्राओं में हो रहे हैं।
व्यापार से लेकर यूक्रेन युद्ध तक चर्चा
PM मोदी और पुतिन की बैठक का एजेंडा केवल व्यापार तक सीमित नहीं रहेगा। रूस-यूक्रेन युद्ध भी बातचीत का प्रमुख विषय हो सकता है।
फारस की खाड़ी में जारी तनाव पर भी दोनों नेता विचार कर सकते हैं। रूस के अनुसार, इस क्षेत्र की घटनाओं का असर वैश्विक अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है।
वहीं, परिवहन और आर्थिक सहयोग को मजबूत करने पर भी जोर दिया जा सकता है। दोनों देश नई कारोबारी संभावनाओं को आगे बढ़ाने की कोशिश कर रहे हैं।
Su-57 विमान भी एजेंडे में शामिल
रूस भारत को अपने Su-57 लड़ाकू विमान की पेशकश करने में रुचि रखता है। क्रेमलिन के अनुसार, इस विमान की बिक्री का मुद्दा रूस के एजेंडे में शामिल है।Su-57 रूस का पांचवीं पीढ़ी का लड़ाकू विमान है। इसे स्टील्थ तकनीक के साथ विकसित किया गया है। इसमें आधुनिक रडार और सेंसर जैसी तकनीकें मौजूद हैं।यह विमान हवा से हवा और हवा से जमीन पर कार्रवाई के लिए डिजाइन किया गया है। साथ ही इसमें इलेक्ट्रॉनिक वॉरफेयर से जुड़ी क्षमताएं भी हैं।पुतिन भारत दौरा रक्षा सहयोग के लिहाज से भी महत्वपूर्ण हो सकता है। हालांकि, विमान खरीद से जुड़ा अंतिम फैसला बातचीत और आधिकारिक प्रक्रियाओं पर निर्भर करेगा।
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