शक्ति शर्मा ने रचा इतिहास, बनीं पहली महिला एयर वाइस मार्शल

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भारतीय वायुसेना में महिला अधिकारियों की बढ़ती भूमिका के बीच शक्ति शर्मा ने बड़ी उपलब्धि हासिल की है। वह गैर-चिकित्सा क्षेत्र से एयर वाइस मार्शल रैंक तक पहुंचने वाली पहली महिला अधिकारी बनी हैं।

उनकी उपलब्धि को सशस्त्र बलों में महिलाओं के बढ़ते नेतृत्व के महत्वपूर्ण उदाहरण के तौर पर देखा जा रहा है। शिक्षा शाखा से करियर शुरू करने वाली शर्मा ने तीन दशक से अधिक समय तक अलग-अलग महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां निभाईं।

शिक्षा शाखा से शुरू हुआ लंबा सैन्य करियर

शक्ति शर्मा को 18 जून 1994 को भारतीय वायुसेना की एजुकेशन ब्रांच में कमीशन मिला था। सेवा के दौरान उन्होंने प्रशिक्षण संस्थानों और फील्ड स्टेशनों में काम किया।

इसके अलावा, उन्होंने कमांड मुख्यालय और एयर हेडक्वार्टर में भी जिम्मेदारियां संभालीं। उनके कार्यक्षेत्र में शिक्षा, प्रशिक्षण और संस्थागत विकास से जुड़े कई अहम काम शामिल रहे।

उन्होंने आईआईटी कानपुर और पुणे विश्वविद्यालय में भारतीय वायुसेना चेयर्स ऑफ एक्सीलेंस स्थापित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। इन पहलों का उद्देश्य रक्षा क्षेत्र और शिक्षण संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाना था।

सैनिक स्कूल की कमान संभालने वाली पहली महिला

उनके करियर की एक और महत्वपूर्ण उपलब्धि सैनिक स्कूल से जुड़ी रही। वह तीनों सेनाओं में सैनिक स्कूल की कमान संभालने वाली पहली महिला अधिकारी बनीं।

उन्होंने सैनिक स्कूल कपूरथला की प्रिंसिपल के तौर पर भी जिम्मेदारी निभाई। इससे शिक्षा और सैन्य प्रशिक्षण के क्षेत्र में उनकी नेतृत्व क्षमता सामने आई।

एयर वाइस मार्शल कितनी बड़ी रैंक है?

एयर वाइस मार्शल भारतीय वायुसेना की दो सितारा रैंक है। भारतीय सेना में इसके समकक्ष मेजर जनरल की रैंक होती है।

वहीं, भारतीय नौसेना में इसका समकक्ष रियर एडमिरल होता है। इस स्तर पर अधिकारी को महत्वपूर्ण प्रशासनिक और संचालन संबंधी जिम्मेदारियां मिल सकती हैं।

एयर वाइस मार्शल एयर हेडक्वार्टर में वरिष्ठ पद संभाल सकते हैं। इसके अलावा, वे महत्वपूर्ण निदेशालयों और कमांड स्तर की जिम्मेदारियां भी निभा सकते हैं।

प्रमोशन के लिए किन बातों का होता है मूल्यांकन?

एयर वाइस मार्शल के पद पर पदोन्नति केवल वरिष्ठता के आधार पर नहीं होती। यह चयन आधारित प्रक्रिया है।

अधिकारी को पहले निर्धारित सेवा-अर्हता पूरी करनी होती है। इसके बाद उनके सेवा रिकॉर्ड और प्रदर्शन का मूल्यांकन किया जाता है।

इस प्रक्रिया में लंबे समय का प्रदर्शन महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए वरिष्ठ रैंक तक पहुंचना किसी अधिकारी के करियर की बड़ी उपलब्धि माना जाता है।

महिलाओं के लिए स्थायी कमीशन का महत्व

महिला अधिकारियों के लिए स्थायी कमीशन की व्यवस्था ने लंबे सैन्य करियर के अवसरों को मजबूत किया है। इससे महिलाओं के लिए वरिष्ठ पदों तक पहुंचने की संभावनाएं बढ़ी हैं।

भारतीय वायुसेना ने 2010 में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने का प्रावधान शुरू किया था। इसके बाद महिलाओं के करियर विकास के अवसरों का विस्तार हुआ।

सेना और नौसेना में भी इस दिशा में नीतिगत बदलाव हुए। सुप्रीम कोर्ट के महत्वपूर्ण फैसलों ने महिला अधिकारियों के लिए समान अवसरों का रास्ता और मजबूत किया।

सुप्रीम कोर्ट के फैसलों ने बदली तस्वीर

2020 में सुप्रीम कोर्ट के दो महत्वपूर्ण फैसले महिलाओं के सैन्य करियर के लिए अहम रहे। सेना से जुड़े बबीता पुनिया मामले में 17 फरवरी 2020 को फैसला आया।

इसके बाद नौसेना से जुड़े एनी नागराजा मामले में 17 मार्च 2020 को फैसला सुनाया गया। इन मामलों में महिला अधिकारियों को स्थायी कमीशन देने से जुड़े मुद्दे शामिल थे।

इन फैसलों से महिलाओं के लिए लंबे करियर और नेतृत्व की संभावनाएं मजबूत हुईं। इसके साथ ही, कमांड और वरिष्ठ जिम्मेदारियों तक पहुंचने का रास्ता भी व्यापक हुआ।

गैर-चिकित्सा क्षेत्र में उपलब्धि क्यों खास?

शक्ति शर्मा की उपलब्धि इसलिए विशेष है क्योंकि उन्होंने चिकित्सा शाखा के बाहर यह मुकाम हासिल किया है।

भारतीय सशस्त्र बलों में महिला अधिकारियों ने पहले चिकित्सा और नर्सिंग सेवाओं में वरिष्ठ रैंक हासिल की है। एयर मार्शल पद्मा बंदोपाध्याय इसका प्रमुख उदाहरण हैं।

शर्मा ने एजुकेशन ब्रांच से शुरुआत की। इसके बाद उन्होंने विभिन्न संस्थानों और सैन्य मुख्यालयों में जिम्मेदारियां संभालीं।

इस उपलब्धि से यह संकेत मिलता है कि महिलाओं की भूमिका अब सीमित क्षेत्रों तक नहीं है। वे वरिष्ठ नेतृत्व और रणनीतिक जिम्मेदारियों में भी आगे बढ़ रही हैं।

वायुसेना में बढ़ी महिला अधिकारियों की भूमिका

पिछले वर्षों में भारतीय वायुसेना में महिलाओं ने कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। महिला अधिकारियों ने फाइटर पायलट, प्रशिक्षक और कमांड भूमिकाओं में भी अपनी क्षमता दिखाई है।

2023 में ग्रुप कैप्टन शालिजा धामी को अग्रिम लड़ाकू इकाई की कमान संभालने का अवसर मिला। वहीं, अगस्त 2026 में स्क्वाड्रन लीडर भावना कंठ ने फाइटर कॉम्बैट लीडर कोर्स पूरा किया।

इन उपलब्धियों के साथ शक्ति शर्मा का एयर वाइस मार्शल पद तक पहुंचना महिला नेतृत्व के विस्तार को दर्शाता है।

महिला नेतृत्व के लिए बड़ा संदेश

शक्ति शर्मा की नियुक्ति केवल व्यक्तिगत उपलब्धि नहीं है। यह सशस्त्र बलों में महिलाओं के बदलते अवसरों को भी सामने लाती है।

1994 में एजुकेशन ब्रांच से शुरू हुआ उनका करियर कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियों से होकर गुजरा। अब दो सितारा रैंक तक उनकी पहुंच महिला अधिकारियों के लिए एक महत्वपूर्ण उदाहरण बन गई है।

कुल मिलाकर, उनकी उपलब्धि भारतीय वायुसेना में महिला नेतृत्व के बढ़ते दायरे को दर्शाती है। इससे शिक्षा, प्रशिक्षण, प्रशासन और वरिष्ठ कमांड जैसी भूमिकाओं में महिलाओं की संभावनाएं और स्पष्ट होती हैं।

मुख्य अपडेट:

  • गैर-चिकित्सा क्षेत्र से पहली महिला एयर वाइस मार्शल बनीं।
  • 1994 में भारतीय वायुसेना की एजुकेशन ब्रांच में कमीशन मिला।
  • एयर हेडक्वार्टर में असिस्टेंट चीफ ऑफ द एयर स्टाफ पद संभाला।
  • सैनिक स्कूल कपूरथला की प्रिंसिपल रहीं।
  • रक्षा और शिक्षा संस्थानों के बीच सहयोग बढ़ाने वाली पहलों में भूमिका निभाई।


    मुख्य बातें:
  • निर्धारित सेवा-अर्हता पूरी करना जरूरी है।
  • उपलब्ध वरिष्ठ पदों और रिक्तियों को देखा जाता है।
  • अधिकारी के सेवा रिकॉर्ड का मूल्यांकन होता है।
  • प्रदर्शन और नेतृत्व क्षमता महत्वपूर्ण होती है।
  • चयन बोर्ड योग्यता और मेरिट के आधार पर फैसला करता है।


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