रायपुर में मुख्यमंत्री निवास पर रक्षाबंधन का पर्व आत्मीय माहौल में मनाया गया। विभिन्न क्षेत्रों से पहुंचीं महिलाओं ने मुख्यमंत्री विष्णु देव साय को राखी बांधी। मुख्यमंत्री ने बहनों के स्नेह और आशीर्वाद को प्रदेश की सेवा के लिए प्रेरणादायक बताया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार महिलाओं के सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक मजबूती को प्राथमिकता दे रही है। उन्होंने कहा कि महिला सशक्तिकरण केवल सरकारी योजनाओं तक सीमित विषय नहीं है। महिलाओं को रोजगार, स्वरोजगार और नेतृत्व के अवसर देना भी जरूरी है।
महतारी वंदन से महिलाओं को मिला आर्थिक सहारा
मुख्यमंत्री के अनुसार, महतारी वंदन योजना से प्रदेश की करीब 68 लाख महिलाओं को हर महीने आर्थिक सहायता मिल रही है। रक्षाबंधन को देखते हुए योजना की 31वीं किस्त भी निर्धारित समय से पहले जारी की गई।
25 अगस्त को 631 करोड़ रुपये से अधिक की राशि महिलाओं के बैंक खातों में अंतरित की गई। नियमित आर्थिक सहायता से महिलाओं की वित्तीय स्थिति मजबूत होने में मदद मिल रही है।
इसके अलावा, महिलाएं इस राशि का उपयोग घरेलू जरूरतों, बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य संबंधी खर्चों के लिए कर रही हैं। कुछ महिलाएं इसका उपयोग बचत और आजीविका गतिविधियों में भी कर रही हैं।
लखपति दीदी पहल से बढ़ा महिलाओं का आत्मविश्वास
महिला सशक्तिकरण के क्षेत्र में लखपति दीदी पहल को भी महत्वपूर्ण बताया गया। मुख्यमंत्री ने कहा कि छत्तीसगढ़ को 8 लाख महिलाओं को लखपति दीदी बनाने का लक्ष्य मिला था।
इसके मुकाबले प्रदेश में पिछले दो वर्षों में 13 लाख 85 हजार महिलाएं लखपति दीदी बनी हैं। यह उपलब्धि महिलाओं की मेहनत, आत्मविश्वास और उद्यमशीलता को दर्शाती है।
सरकार महिलाओं को केवल योजनाओं का लाभ लेने वाली श्रेणी तक सीमित नहीं रखना चाहती। उन्हें आर्थिक गतिविधियों में सक्रिय भागीदार बनाने पर भी जोर दिया जा रहा है।
ड्रोन दीदी से तकनीक और रोजगार का जुड़ाव
ग्रामीण महिलाओं के लिए तकनीक आधारित रोजगार के अवसर भी बढ़ रहे हैं। ड्रोन दीदियां खेतों में उर्वरक और दवा के छिड़काव से आय अर्जित कर रही हैं।
मुख्यमंत्री ने बताया कि ड्रोन से प्रति एकड़ छिड़काव पर करीब 300 रुपये की आय हो सकती है। पर्याप्त काम मिलने पर ड्रोन दीदियां प्रतिदिन 6 से 7 हजार रुपये तक कमा सकती हैं।
इस पहल से ग्रामीण महिलाओं को तकनीकी कौशल से जोड़ने के साथ आय के नए अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है।
ई-रिक्शा और स्व-सहायता समूहों से नए अवसर
महिलाओं के लिए ई-रिक्शा भी आजीविका का साधन बन रहा है। मुख्यमंत्री ने बताया कि नया रायपुर में 92 ई-रिक्शा दीदियां आत्मनिर्भरता की दिशा में आगे बढ़ रही हैं।
जशपुर के बगिया में रक्षाबंधन के अवसर पर 50 महिलाओं को ई-रिक्शा प्रदान किए गए। इससे महिलाओं को सम्मानजनक रोजगार और नियमित आय का अवसर मिल रहा है।
इसके अलावा, स्व-सहायता समूहों की महिलाएं सेटरिंग प्लेट जैसे नए व्यवसायों से भी जुड़ रही हैं। इससे पारंपरिक गतिविधियों से आगे बढ़कर कारोबार के नए विकल्प तैयार हो रहे हैं।
स्थानीय नेतृत्व में महिलाओं की बढ़ी भागीदारी
महिला सशक्तिकरण का असर स्थानीय शासन में भी दिखाई दे रहा है। मुख्यमंत्री ने पंचायत चुनावों में महिलाओं को 50 प्रतिशत आरक्षण मिलने का उल्लेख किया।
इसके चलते कई महिलाएं पंचायत स्तर पर नेतृत्व की जिम्मेदारी संभाल रही हैं। सरपंच के रूप में वे गांवों के विकास से जुड़े फैसलों में सक्रिय भूमिका निभा रही हैं।
वहीं, महिला पत्रकारों और विभिन्न क्षेत्रों में कार्यरत महिलाओं के योगदान की भी मुख्यमंत्री ने सराहना की।
महिला उद्यमियों के लिए औद्योगिक नीति में प्रोत्साहन
मुख्यमंत्री ने कहा कि महिलाओं को उद्यमी बनाने के लिए नई औद्योगिक विकास नीति में विशेष प्रावधान किए गए हैं। महिलाओं के नाम जमीन की रजिस्ट्री कराने पर पंजीयन शुल्क में 50 प्रतिशत की छूट का भी उल्लेख किया गया।
सरकार का लक्ष्य महिलाओं को नौकरी और स्वरोजगार से आगे बढ़ाकर उद्यमिता से जोड़ना है। इससे वे स्वयं रोजगार प्राप्त करने के साथ दूसरों के लिए भी रोजगार के अवसर तैयार कर सकती हैं।
महिला सशक्तिकरण की यह दिशा प्रदेश के आर्थिक विकास में महिलाओं की भूमिका को और मजबूत कर सकती है।
बस्तर में शांति से विकास के अवसर बढ़ने की उम्मीद
मुख्यमंत्री ने नक्सलवाद के प्रभाव वाले क्षेत्रों में शांति और विकास की स्थिति का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और आजीविका से जुड़ी सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।
विकास की इन गतिविधियों से स्थानीय लोगों को नए अवसर मिलने की उम्मीद है। महिलाओं को भी स्वरोजगार और आजीविका से जोड़ने पर इसका सकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
विकसित छत्तीसगढ़ में मातृशक्ति की अहम भूमिका
मुख्यमंत्री ने कहा कि विकसित छत्तीसगढ़ का लक्ष्य महिलाओं की भागीदारी के बिना पूरा नहीं हो सकता। उन्होंने महिलाओं को सम्मान, सुरक्षा और आर्थिक अवसर उपलब्ध कराने की प्रतिबद्धता दोहराई।
उन्होंने कहा कि आत्मनिर्भर महिलाएं मजबूत परिवार और समृद्ध समाज की आधारशिला बन सकती हैं। इसलिए योजनाओं के साथ महिलाओं को कौशल, रोजगार और उद्यमिता के अवसर देना जरूरी है।
कुल मिलाकर, महिला सशक्तिकरण को आर्थिक आत्मनिर्भरता, तकनीकी कौशल और नेतृत्व से जोड़ने पर जोर दिया गया। महतारी वंदन, लखपति दीदी, ड्रोन दीदी और ई-रिक्शा जैसी पहल महिलाओं के लिए नए अवसरों का माध्यम बन रही हैं।
मुख्य बातें
- मुख्यमंत्री निवास में रक्षाबंधन का आयोजन हुआ।
- महिलाओं के सम्मान और आर्थिक मजबूती पर जोर दिया गया।
- महतारी वंदन योजना से 68 लाख महिलाओं को सहायता मिलने की बात कही गई।
- छत्तीसगढ़ में 13.85 लाख महिलाओं के लखपति दीदी बनने का उल्लेख हुआ।
- ड्रोन और ई-रिक्शा से महिलाओं को नए रोजगार अवसर मिल रहे हैं।
महिलाओं से जुड़े प्रमुख अवसर
- स्व-सहायता समूहों के जरिए कारोबार को बढ़ावा।
- ग्रामीण महिलाओं को तकनीक आधारित रोजगार से जोड़ने की पहल।
- पंचायतों में महिलाओं की भागीदारी बढ़ाने पर जोर।
- महिला उद्यमियों के लिए औद्योगिक नीति में प्रोत्साहन।
- आर्थिक आत्मनिर्भरता के साथ नेतृत्व के अवसरों पर फोकस।
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