बॉलीवुड में भाई-भतीजावाद का मुद्दा एक बार फिर चर्चा में है। इसी बीच अरशद वारसी ने इस बहस पर अपनी राय रखी है। अभिनेता के मुताबिक, फिल्मी परिवार से आने वाले कलाकारों को शुरुआत में फायदा मिल सकता है। हालांकि, लंबे समय तक टिके रहने के लिए प्रतिभा जरूरी है।
एक हालिया पॉडकास्ट बातचीत में अभिनेता ने नेपोटिज्म को लेकर अपनी सोच साझा की। उन्होंने कहा कि जब उन्होंने इंडस्ट्री में शुरुआत की थी, तब यह इतना बड़ा चर्चा का विषय नहीं था। उनके अनुसार, कंगना रनौत ने इस मुद्दे को सार्वजनिक बहस में प्रमुखता दिलाई।
कंगना रनौत को दिया चर्चा का श्रेय
अरशद वारसी ने कहा कि नेपोटिज्म पहले उनकी शुरुआत के समय इतना चर्चित विषय नहीं था। बाद में कंगना रनौत के बयानों के बाद यह मुद्दा बड़े स्तर पर चर्चा में आया।
अभिनेता ने यह भी स्पष्ट किया कि वह फिल्मी परिवारों से आने वाले कलाकारों को लेकर पूरी तरह नकारात्मक नजरिया नहीं रखते। उनका मानना है कि किसी कलाकार को शुरुआती अवसर मिल सकता है। मगर आगे की सफलता उसकी क्षमता पर निर्भर करती है।
स्टारकिड्स के लिए पहला मौका आसान
अरशद वारसी के मुताबिक, मशहूर परिवार से जुड़े होने का सबसे बड़ा फायदा शुरुआती अवसर में हो सकता है। स्टारकिड्स के लिए इंडस्ट्री का पहला दरवाजा अपेक्षाकृत जल्दी खुल सकता है।
हालांकि, उनका मानना है कि केवल सरनेम किसी कलाकार का करियर नहीं चला सकता। दर्शक किसी अभिनेता को लंबे समय तक तभी स्वीकार करते हैं, जब उसके काम में प्रतिभा दिखाई दे।
प्रतिभा के बिना ज्यादा आगे बढ़ना मुश्किल
अभिनेता ने अपनी बात रखते हुए प्रतिभा को सबसे महत्वपूर्ण बताया। उनके मुताबिक, किसी को शुरुआत में अवसर मिल सकता है। लेकिन उस अवसर को सफलता में बदलने के लिए मेहनत और अभिनय क्षमता जरूरी है।
नेपोटिज्म की बहस में उनका नजरिया इसी अंतर पर केंद्रित रहा। यानी परिवार से मिलने वाला फायदा शुरुआत तक सीमित हो सकता है। इसके बाद कलाकार की अपनी योग्यता ही महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।
स्टारकिड्स पर क्या बोले अभिनेता?
- फिल्मी परिवार से आने वाले कलाकारों को शुरुआती मौका जल्दी मिल सकता है।
- प्रसिद्ध सरनेम करियर की शुरुआत में मददगार हो सकता है।
- लंबे समय तक सफलता के लिए प्रतिभा जरूरी है।
- दर्शकों की अपेक्षाएं स्टारकिड्स पर अतिरिक्त दबाव भी डाल सकती हैं।
अपने बच्चों को लेकर भी रखी राय
अरशद वारसी ने बातचीत में अपने बच्चों का भी जिक्र किया। उन्होंने माना कि फिल्मी परिवार से आने वाले बच्चों पर लोगों की अपेक्षाएं अधिक हो सकती हैं।
उनके मुताबिक, स्टारकिड्स से यह उम्मीद की जाती है कि वे अपने माता-पिता की तरह ही सफल होंगे। हालांकि, हर व्यक्ति की अपनी अलग क्षमता और व्यक्तित्व होता है। इसलिए किसी कलाकार का मूल्यांकन केवल उसके परिवार के आधार पर नहीं होना चाहिए।
युवाओं के लिए तैयारी जरूरी
अभिनेता का मानना है कि आज इंडस्ट्री में आने वाले युवा पहले से ज्यादा तैयारी के साथ आते हैं। ऐसे में अभिनय को केवल प्रसिद्ध परिवार के सहारे आगे बढ़ाने की कोशिश पर्याप्त नहीं है।
अरशद वारसी के अनुसार, जो युवा अभिनय को करियर बनाना चाहते हैं, उन्हें अपनी कला पर लगातार काम करना चाहिए। साथ ही उन्हें सफलता और असफलता दोनों के लिए तैयार रहना चाहिए।
नेपोटिज्म पर बहस जारी
बॉलीवुड में नेपोटिज्म को लेकर लंबे समय से अलग-अलग राय सामने आती रही हैं। कुछ लोग इसे अवसरों में असमानता से जोड़ते हैं। वहीं, कुछ कलाकार मानते हैं कि अंतिम सफलता प्रतिभा और मेहनत से तय होती है।
अरशद वारसी की टिप्पणी ने इसी पुरानी बहस को फिर चर्चा में ला दिया है। उनका संदेश साफ है कि शुरुआती मौका किसी के लिए आसान हो सकता है। लेकिन करियर को लंबे समय तक बनाए रखने के लिए प्रतिभा और मेहनत जरूरी हैं।
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