छत्तीसगढ़ में संत रविदास जयंती वर्ष के अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने कई महत्वपूर्ण घोषणाएं कीं। उन्होंने कहा कि संत रविदास के विचार समानता, समरसता और सामाजिक न्याय का आधार हैं। रायपुर में आयोजित कलश वंदन महाअभियान में उन्होंने संत रविदास की जन्मस्थली सीर गोवर्धनपुर से लाए गए पवित्र कलश का वंदन किया और इसे राष्ट्रीय एकता का प्रतीक बताया।
मुख्य बातें
- वर्ष 2027 में माघी पूर्णिमा पर सार्वजनिक अवकाश रहेगा।
- जयंती के दिन मांस और मदिरा बिक्री प्रतिबंधित रहेगी।
- संत रविदास के नाम से राज्य अलंकरण पुरस्कार शुरू होगा।
- नवा रायपुर के एक प्रमुख चौक का नामकरण संत रविदास के नाम पर होगा।
- जिलों के प्रतिनिधियों को पवित्र कलश सौंपे गए।
संत रविदास जयंती पर मुख्यमंत्री की अहम घोषणाएं
मुख्यमंत्री ने घोषणा की कि अगले वर्ष माघी पूर्णिमा पर प्रदेश में सार्वजनिक अवकाश रहेगा। इस दिन राज्यभर में मांस और मदिरा की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाया जाएगा।
उन्होंने यह भी कहा कि राज्य स्थापना दिवस पर दिए जाने वाले राज्य अलंकरण पुरस्कारों में संत रविदास के नाम से नया सम्मान जोड़ा जाएगा। इसके साथ ही नवा रायपुर के एक प्रमुख चौक का नाम भी उनके नाम पर रखा जाएगा।
मुख्यमंत्री ने विधानसभा में संत रविदास के प्रसिद्ध संदेश को अंकित कराने का भी प्रयास करने की बात कही।
समरसता और समानता का संदेश बना कार्यक्रम का केंद्र
मुख्यमंत्री ने कहा कि संत रविदास ने समाज को भेदभाव, छुआछूत और ऊंच-नीच से ऊपर उठने की प्रेरणा दी। उन्होंने अपने जीवन से समान अधिकार, श्रम और भक्ति का मार्ग दिखाया।
उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री के “विकास भी, विरासत भी” के मंत्र के अनुरूप सांस्कृतिक धरोहरों का संरक्षण किया जा रहा है। संत रविदास की जन्मस्थली से लाए गए पवित्र कलश को गांव-गांव तक पहुंचाने का अभियान इसी दिशा में महत्वपूर्ण कदम है।
संत रविदास जयंती से सामाजिक समरसता अभियान को मिलेगी नई गति
मुख्यमंत्री ने विभिन्न जिलों के प्रतिनिधियों को पवित्र कलश सौंपे और अभियान वाहनों को हरी झंडी दिखाई। उन्होंने विश्वास जताया कि यह अभियान संत रविदास के विचारों को हर गांव और हर परिवार तक पहुंचाएगा।
कार्यक्रम में आए प्रतिनिधिमंडल के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने कहा कि यह पहल समाज में एकता और भाईचारे को मजबूत करेगी।
कार्यक्रम की प्रमुख घोषणाएं
- माघी पूर्णिमा पर सार्वजनिक अवकाश।
- मांस और मदिरा बिक्री पर प्रतिबंध।
- संत रविदास के नाम से राज्य अलंकरण पुरस्कार।
- नवा रायपुर में प्रमुख चौक का नामकरण।
- कलश वंदन अभियान का गांव-गांव विस्तार।
बड़ी संख्या में शामिल हुए जनप्रतिनिधि
कार्यक्रम में कई मंत्री, विधायक, संत समाज के प्रतिनिधि और बड़ी संख्या में श्रद्धालु मौजूद रहे। वक्ताओं ने संत रविदास के विचारों को आज भी प्रासंगिक बताते हुए सामाजिक समरसता और समानता के संदेश को जन-जन तक पहुंचाने पर जोर दिया।
उन्होंने कहा कि संत रविदास की शिक्षाएं समाज को जोड़ने और सकारात्मक परिवर्तन लाने की प्रेरणा देती हैं। इसलिए उनके विचारों का व्यापक प्रचार आवश्यक है।
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