प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने शनिवार को आंध्र प्रदेश के विजयनगरम जिले में आधुनिक अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन किया। भोगापुरम हवाई अड्डा राज्य के बुनियादी ढांचे को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है। इसके साथ ही प्रधानमंत्री ने करीब 18 हजार करोड़ रुपये की कई विकास परियोजनाओं का शुभारंभ और शिलान्यास भी किया।
राज्य सरकार का मानना है कि यह नया हवाई अड्डा निवेश, पर्यटन और रोजगार के नए अवसर पैदा करेगा। पहले चरण में इसकी क्षमता प्रतिवर्ष 60 लाख यात्रियों की होगी। भविष्य में इसे बढ़ाकर 4 करोड़ यात्रियों तक पहुंचाने की योजना बनाई गई है।
मुख्य बातें
- प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अंतरराष्ट्रीय हवाई अड्डे का उद्घाटन किया।
- परियोजना की लागत लगभग 5,000 करोड़ रुपये रही।
- 18 हजार करोड़ रुपये की कई विकास परियोजनाओं का शुभारंभ हुआ।
- हवाई अड्डे में आधुनिक डिजिटल और एआई तकनीकों का उपयोग किया गया।
- उत्तर आंध्र में उद्योग और पर्यटन को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।
18 हजार करोड़ की परियोजनाओं से मिलेगा औद्योगिक और ऊर्जा क्षेत्र को बल
प्रधानमंत्री ने विशाखापत्तनम में राज्य की पहली सेमीकंडक्टर निर्माण इकाई की आधारशिला भी रखी। यह परियोजना इंडिया सेमीकंडक्टर मिशन के तहत विकसित की जाएगी। यहां हर वर्ष लगभग 9.6 करोड़ सेमीकंडक्टर चिप का उत्पादन होने का लक्ष्य रखा गया है।
इसके अलावा बिजली और नवीकरणीय ऊर्जा क्षेत्र से जुड़ी कई ट्रांसमिशन परियोजनाओं की शुरुआत हुई। इन परियोजनाओं से सौर और पवन ऊर्जा उत्पादन को मजबूत आधार मिलेगा। इसलिए राज्य की ऊर्जा क्षमता में भी उल्लेखनीय वृद्धि होने की उम्मीद है।
भोगापुरम हवाई अड्डा में शामिल हैं अत्याधुनिक तकनीकें
इस हवाई अड्डे में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, बिल्डिंग इन्फॉर्मेशन मॉडलिंग, एयरसाइड 4.0, एयरपोर्ट प्रेडिक्टिव ऑपरेशन सेंटर और बायोमेट्रिक यात्री प्रणाली जैसी आधुनिक सुविधाएं उपलब्ध कराई गई हैं। साथ ही इसका डिजाइन आंध्र प्रदेश की सांस्कृतिक विरासत और अराकू घाटी की प्राकृतिक सुंदरता से प्रेरित रखा गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि भोगापुरम हवाई अड्डा क्षेत्र में व्यापार, निर्यात और पर्यटन गतिविधियों को नई गति देगा। वहीं स्थानीय युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी बढ़ेंगे।
परियोजनाओं की प्रमुख जानकारी
- सेमीकंडक्टर निर्माण इकाई की आधारशिला रखी गई।
- नवीकरणीय ऊर्जा ट्रांसमिशन नेटवर्क का विस्तार होगा।
- बिजली परियोजनाओं पर हजारों करोड़ रुपये का निवेश।
- उद्योग, कौशल विकास और निर्यात को मिलेगा प्रोत्साहन।
- आधुनिक परिवहन सुविधाओं से क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था मजबूत होगी।
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