बस्तर बिजली परियोजना: पूर्व नक्सल प्रभावित गांवों तक बिजली पहुंचाने की मांग

विष्णुदेव साय

छत्तीसगढ़ सरकार ने बस्तर के दूरस्थ और पूर्व नक्सल प्रभावित क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाएं मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने नई दिल्ली में केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम से मुलाकात कर बस्तर बिजली परियोजना के लिए विशेष वित्तीय सहायता का अनुरोध किया।

मुख्यमंत्री ने बताया कि धरती आबा ग्राम उत्कर्ष योजना के अंतर्गत बस्तर संभाग के सात जिलों के 461 गांवों तक स्थायी ग्रिड बिजली पहुंचाने का लक्ष्य रखा गया है। इसके लिए केंद्र सरकार से 435 करोड़ रुपये की सहायता मांगी गई है। यह परियोजना उन गांवों तक विकास पहुंचाने का प्रयास है, जहां वर्षों तक नक्सल हिंसा के कारण आधारभूत सुविधाएं नहीं पहुंच सकीं।

मुख्य बातें

  • 461 पूर्व नक्सल प्रभावित गांवों तक ग्रिड बिजली पहुंचाने की योजना।
  • परियोजना की कुल लागत 973 करोड़ रुपये।
  • केंद्र सरकार से 435 करोड़ रुपये की विशेष सहायता का अनुरोध।
  • संविधान के अनुच्छेद 275(1) के तहत शीघ्र स्वीकृति की मांग।
  • केंद्रीय मंत्री जुएल ओराम ने सकारात्मक आश्वासन दिया।

बस्तर बिजली परियोजना से आदिवासी क्षेत्रों में विकास को मिलेगा बल

मुख्यमंत्री ने कहा कि बिजली केवल एक सुविधा नहीं है। यह शिक्षा, स्वास्थ्य, रोजगार और स्थानीय उद्योगों के विकास का आधार भी है। इसलिए बस्तर बिजली परियोजना राज्य सरकार की प्राथमिक योजनाओं में शामिल है।

उन्होंने बताया कि परियोजना की लागत 973 करोड़ रुपये निर्धारित की गई है। इसमें वर्ष 2026-27 से 2028-29 तक तीन चरणों में केंद्र सरकार से आर्थिक सहयोग का प्रस्ताव रखा गया है। शेष राशि राज्य सरकार अपने संसाधनों से उपलब्ध कराएगी।

बस्तर बिजली परियोजना से बदलेगी दूरस्थ गांवों की तस्वीर

मुख्यमंत्री ने संविधान के अनुच्छेद 275(1) के अंतर्गत इस प्रस्ताव को विशेष प्रकरण मानते हुए जल्द मंजूरी देने का आग्रह किया। उनका कहना है कि बस्तर बिजली परियोजना से दूरस्थ आदिवासी गांव विकास की मुख्यधारा से जुड़ेंगे।

केंद्रीय जनजातीय कार्य मंत्री जुएल ओराम ने आश्वासन दिया कि प्रस्ताव प्राप्त होते ही स्वीकृति प्रक्रिया शुरू की जाएगी। उन्होंने कहा कि धनराशि की कमी इस योजना में बाधा नहीं बनने दी जाएगी। इससे बस्तर में विकास कार्यों को नई गति मिलने की उम्मीद है।

योजना से संभावित लाभ

  • आदिवासी परिवारों को स्थायी बिजली सुविधा मिलेगी।
  • शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं तक पहुंच बेहतर होगी।
  • ग्रामीण रोजगार और छोटे उद्योगों को बढ़ावा मिलेगा।
  • दूरस्थ क्षेत्रों में विकास कार्यों की गति तेज होगी।
  • पूर्व नक्सल प्रभावित गांव मुख्यधारा से जुड़ सकेंगे।

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