राष्ट्रीय सम्मान संशोधन विधेयक: वंदे मातरम् के अपमान पर 3 साल की सजा

राष्ट्रीय सम्मान संशोधन विधेयक

देश में राष्ट्रीय प्रतीकों के सम्मान से जुड़े कानून में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। राष्ट्रीय सम्मान संशोधन विधेयक के जरिए केंद्र सरकार ने पहली बार राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को भी राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के दायरे में लाने का प्रस्ताव किया है। लोकसभा और राज्यसभा से विधेयक पारित होने के बाद अब राष्ट्रपति की मंजूरी मिलने पर यह कानून लागू होगा।

मुख्य बातें

  • वंदे मातरम् को पहली बार कानूनी संरक्षण मिलेगा।
  • अपमान या गायन में बाधा डालने पर तीन साल तक की सजा संभव।
  • राष्ट्रीय सम्मान अधिनियम, 1971 की धारा 3 में संशोधन होगा।
  • राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद कानून लागू होगा।
  • राष्ट्रीय गान और राष्ट्रगीत दोनों को समान कानूनी सुरक्षा मिलेगी।

राष्ट्रीय सम्मान संशोधन विधेयक में क्या बदलेगा?

राष्ट्रीय सम्मान संशोधन विधेयक के अनुसार यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर राष्ट्रगीत वंदे मातरम् या राष्ट्रीय गान जन गण मन के गायन में बाधा उत्पन्न करता है, तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जा सकेगी।

ऐसे मामलों में अधिकतम तीन वर्ष का कारावास, जुर्माना या दोनों की सजा का प्रावधान रखा गया है। इससे पहले यह व्यवस्था केवल राष्ट्रीय गान पर लागू होती थी।

संशोधन की जरूरत क्यों पड़ी?

संविधान सभा ने 24 जनवरी 1950 को वंदे मातरम् को जन गण मन के समान सम्मान देने की बात कही थी। हालांकि, राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 में राष्ट्रगीत का उल्लेख नहीं था।

राष्ट्रीय सम्मान संशोधन विधेयक इसी कानूनी कमी को दूर करने के उद्देश्य से लाया गया है। सरकार का कहना है कि राष्ट्रगीत के सम्मान की रक्षा के लिए स्पष्ट कानूनी प्रावधान आवश्यक थे।

पहले कानून में क्या प्रावधान थे?

राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971 के तहत पहले तीन प्रमुख प्रावधान थे।

  • राष्ट्रीय ध्वज और संविधान के अपमान पर सजा।
  • राष्ट्रीय गान के गायन में बाधा डालने पर कार्रवाई।
  • दोबारा अपराध करने पर कठोर दंड।

लेकिन राष्ट्रगीत वंदे मातरम् इस कानून के दायरे से बाहर था। राष्ट्रीय सम्मान संशोधन विधेयक लागू होने के बाद यह स्थिति बदल जाएगी।

गृह मंत्रालय ने क्या दिशा-निर्देश जारी किए?

गृह मंत्रालय ने राष्ट्रीय गान और राष्ट्रगीत के गायन को लेकर विस्तृत दिशा-निर्देश जारी किए हैं। निर्देशों के अनुसार यदि किसी कार्यक्रम में दोनों प्रस्तुत किए जाएं, तो पहले वंदे मातरम् और उसके बाद जन गण मन गाया जाएगा।

इसके अलावा अधिकृत शब्द, सही उच्चारण और निर्धारित क्रम का पालन करना अनिवार्य होगा। सभी राज्यों और सरकारी संस्थानों को इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने को कहा गया है।

एक नजर में

  • कानून: राष्ट्रीय सम्मान अपमान निवारण अधिनियम, 1971
  • नया संशोधन: राष्ट्रगीत वंदे मातरम् को कानूनी संरक्षण
  • अधिकतम सजा: 3 वर्ष की जेल
  • दंड: कारावास, जुर्माना या दोनों
  • स्थिति: राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद लागू

वंदे मातरम् का ऐतिहासिक महत्व

राष्ट्रीय सम्मान संशोधन विधेयक की चर्चा के साथ वंदे मातरम् का ऐतिहासिक महत्व भी सामने आया है। इस गीत की रचना बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय ने की थी। स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान यह गीत देशभक्ति का प्रमुख प्रतीक बना। वर्ष 2025 में इसकी रचना के 150 वर्ष भी पूरे हुए, जिसके बाद इसे लेकर राष्ट्रीय स्तर पर कई कार्यक्रम आयोजित किए गए।

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