सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल 19वें दिन, 9 किलो वजन घटा

Sonam Wangchuk Hunger Strike

सामाजिक कार्यकर्ता सोनम वांगचुक की भूख हड़ताल लगातार 19वें दिन भी जारी है। सोनम वांगचुक भूख हड़ताल के दौरान उनका वजन 9 किलोग्राम से अधिक घट चुका है। डॉक्टरों की टीम लगातार उनके स्वास्थ्य की निगरानी कर रही है। विशेषज्ञों ने लंबे उपवास के कारण बढ़ते स्वास्थ्य जोखिमों को लेकर चिंता जताई है।

डॉक्टर सतीश लांबा ने बताया कि लगातार उपवास से ब्लड शुगर का स्तर कम हो रहा है। यह स्थिति आगे चलकर गंभीर स्वास्थ्य समस्याएं पैदा कर सकती है। हालांकि, डॉक्टरों के अनुसार वांगचुक अभी भी सक्रिय हैं। उनकी नियमित मेडिकल जांच की जा रही है।

मुख्य बातें

  • भूख हड़ताल का आज 19वां दिन है।
  • सोनम वांगचुक का वजन 9 किलो से अधिक घटा।
  • डॉक्टर लगातार स्वास्थ्य की निगरानी कर रहे हैं।
  • ब्लड शुगर कम होने से स्वास्थ्य जोखिम बढ़ा।
  • मेडिकल टीम समय-समय पर जांच कर रही है।

सोनम वांगचुक भूख हड़ताल के बीच संसद मार्च की अपील

सोनम वांगचुक ने अपने एक्स अकाउंट पर एक वीडियो साझा किया। उन्होंने कहा कि उनकी तबीयत बहुत अच्छी नहीं है, लेकिन बहुत खराब भी नहीं है। सोनम वांगचुक भूख हड़ताल तब तक जारी रहेगी, जब तक उनकी प्रमुख मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती।

उन्होंने समर्थकों से 20 जुलाई को संसद तक प्रस्तावित शांतिपूर्ण मार्च में शामिल होने की अपील की। साथ ही उन्होंने लोगों से आंदोलन को मजबूत करने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि उनका उद्देश्य लोकतांत्रिक तरीके से अपनी बात सरकार तक पहुंचाना है।

स्वास्थ्य पर बनी हुई है नजर

डॉक्टरों के अनुसार, लंबे समय तक उपवास करने से शरीर में ऊर्जा की कमी हो सकती है। इसके अलावा ब्लड शुगर लगातार कम रहने से कई तरह की चिकित्सीय परेशानियां बढ़ सकती हैं। इसलिए मेडिकल टीम नियमित अंतराल पर उनकी जांच कर रही है। सोनम वांगचुक भूख हड़ताल को देखते हुए डॉक्टर स्थिति पर विशेष नजर बनाए हुए हैं।

एक नजर में

  • डॉक्टरों ने स्वास्थ्य जोखिमों की चेतावनी दी।
  • उपवास से ब्लड शुगर लगातार घट रहा है।
  • 20 जुलाई को संसद मार्च का आह्वान किया गया।
  • समर्थकों से शांतिपूर्ण तरीके से जुड़ने की अपील।
  • आंदोलन जारी रखने का फैसला दोहराया गया।

आंदोलन पर सबकी नजर

दिल्ली के जंतर-मंतर पर चल रहा यह आंदोलन लगातार चर्चा में बना हुआ है। सोनम वांगचुक भूख हड़ताल को लेकर सामाजिक संगठनों और समर्थकों की नजरें अब सरकार की अगली प्रतिक्रिया पर टिकी हैं। वहीं डॉक्टरों का कहना है कि यदि उपवास लंबा चला, तो स्वास्थ्य संबंधी जोखिम और बढ़ सकते हैं। इसलिए मेडिकल निगरानी लगातार जारी रहेगी।

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