सुशासन तिहार के तहत बीजापुर जिले के कोण्डापल्ली गांव पहुंचे मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने बीजापुर-पूवर्ती मार्ग पर निर्मित बेली ब्रिज का निरीक्षण किया। इस दौरान उन्होंने अधिकारियों से पुल की तकनीकी विशेषताओं और स्थानीय लोगों को मिलने वाले लाभों की जानकारी ली।
मुख्यमंत्री ने कहा कि ऐसे निर्माण कार्य केवल आवागमन को आसान नहीं बनाते, बल्कि शिक्षा, स्वास्थ्य और रोजगार के अवसरों को भी गांवों तक पहुंचाते हैं।
दूरस्थ क्षेत्रों को मिल रही नई कनेक्टिविटी
दुर्गम वनांचल क्षेत्रों में सड़क और पुलों का निर्माण लंबे समय से चुनौती रहा है। ऐसे में बेली ब्रिज जैसी आधुनिक तकनीक ने विकास कार्यों को नई गति दी है। इस पुल के निर्माण से बीजापुर और आसपास के कई गांवों के बीच संपर्क बेहतर हुआ है।
स्थानीय लोगों को अब यात्रा में कम समय लगता है और आवश्यक सेवाओं तक पहुंच पहले की तुलना में अधिक आसान हो गई है।
कम लागत और कम समय में तैयार होता है बेली ब्रिज
भारतीय सीमा सड़क संगठन (BRO) द्वारा निर्मित यह बेली ब्रिज अपनी तकनीकी विशेषताओं के कारण विशेष महत्व रखता है। अधिकारियों के अनुसार, इस प्रकार के पुल पारंपरिक पुलों की तुलना में काफी कम लागत में तैयार किए जा सकते हैं।
इसके अलावा इनका निर्माण अपेक्षाकृत कम समय में पूरा हो जाता है, जिससे संवेदनशील और दूरस्थ क्षेत्रों में कनेक्टिविटी स्थापित करने में मदद मिलती है।
बीजापुर में 21 बेली ब्रिज बने विकास की रीढ़
बीजापुर जिले में अब तक 21 बेली ब्रिज बनाए जा चुके हैं। इन पुलों ने ग्रामीण क्षेत्रों के लोगों के जीवन में बड़ा बदलाव लाया है। स्वास्थ्य सेवाओं, स्कूलों और सरकारी सुविधाओं तक पहुंच आसान होने से सामाजिक और आर्थिक गतिविधियों को भी बढ़ावा मिला है।
विशेषज्ञों का मानना है कि बेहतर कनेक्टिविटी किसी भी क्षेत्र के विकास की बुनियाद होती है और ये पुल उसी दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने श्रमिकों के योगदान को सराहा
निरीक्षण के दौरान मुख्यमंत्री ने पुल निर्माण में लगे श्रमिकों और इंजीनियरों के कार्य की प्रशंसा की। उन्होंने कहा कि राज्य के युवा और श्रमिक विकास यात्रा के वास्तविक नायक हैं।
मुख्यमंत्री ने श्रमिकों से बातचीत कर उनके अनुभव भी जाने और उन्हें बेहतर कार्य के लिए प्रोत्साहित किया।
बदलते बस्तर की नई पहचान बना बेली ब्रिज
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि बेली ब्रिज केवल एक अधोसंरचना परियोजना नहीं है, बल्कि यह विकास, विश्वास और सुशासन का प्रतीक है। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का लक्ष्य अंतिम व्यक्ति तक विकास पहुंचाना है और ऐसे पुल उस लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं।
आज यह बेली ब्रिज बदलते बस्तर की नई पहचान बन चुका है, जो दूरस्थ गांवों को मुख्यधारा से जोड़ रहा है।
बीजापुर-पूवर्ती मार्ग पर निर्मित बेली ब्रिज ने क्षेत्र में विकास की नई संभावनाओं को जन्म दिया है। बेहतर कनेक्टिविटी, तेज आवागमन और आवश्यक सेवाओं तक आसान पहुंच ने स्थानीय लोगों के जीवन को प्रभावित किया है। यह पुल न केवल इंजीनियरिंग का उदाहरण है, बल्कि विकास और सुशासन के प्रति सरकार की प्रतिबद्धता का भी प्रतीक बनकर उभरा है।
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