भारत के ई-कॉमर्स सेक्टर से जुड़े चर्चित Amazon Future Deal मामले में सुप्रीम कोर्ट ने बड़ा फैसला सुनाते हुए अमेजन को राहत दी है। अदालत ने भारतीय प्रतिस्पर्धा आयोग (CCI) द्वारा लगाए गए 202 करोड़ रुपये के जुर्माने को रद्द कर दिया। इसके साथ ही नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के आदेश को भी निरस्त कर दिया गया।
बुधवार को न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति संदीप मेहता की पीठ ने यह फैसला सुनाया। कोर्ट ने कहा कि मामले में सभी तथ्यों और परिस्थितियों को देखते हुए अमेजन की अपील स्वीकार की जाती है। इसी बीच अदालत ने यह भी निर्देश दिया कि अमेजन से वसूली गई या जमा कराई गई राशि आठ सप्ताह के भीतर वापस की जाए।
क्या था Amazon Future Deal विवाद?
दरअसल, Amazon Future Deal विवाद की शुरुआत साल 2019 में हुई थी, जब अमेजन ने फ्यूचर कूपन्स प्राइवेट लिमिटेड (FCPL) में 49 प्रतिशत हिस्सेदारी खरीदने का फैसला किया था। इस सौदे को CCI ने नवंबर 2019 में मंजूरी दे दी थी। हालांकि बाद में आयोग ने आरोप लगाया कि अमेजन ने सौदे से जुड़ी कुछ महत्वपूर्ण जानकारियां छिपाई थीं।
इसके अलावा CCI का कहना था कि अमेजन का उद्देश्य केवल गिफ्ट कार्ड और पेमेंट कारोबार तक सीमित नहीं था, बल्कि कंपनी भारत के ऑफलाइन रिटेल सेक्टर में भी रणनीतिक पकड़ मजबूत करना चाहती थी। इसलिए आयोग ने 17 दिसंबर 2021 को मंजूरी निलंबित करते हुए कंपनी पर 202 करोड़ रुपये का जुर्माना लगाया था।
सुप्रीम कोर्ट ने क्यों दी राहत?
Supreme Court ने सुनवाई के दौरान पाया कि NCLAT और CCI के आदेशों में कई कानूनी पहलुओं पर पुनर्विचार की आवश्यकता थी। इसलिए अदालत ने दोनों आदेशों को रद्द कर दिया। वहीं यह फैसला Amazon Future Deal मामले में अमेजन के लिए बड़ी कानूनी जीत माना जा रहा है।
इसके बाद अब कंपनी को न केवल आर्थिक राहत मिलेगी, बल्कि लंबे समय से चल रही कानूनी अनिश्चितता भी कम होगी। विशेषज्ञों का मानना है कि यह फैसला भारत के ई-कॉमर्स और प्रतिस्पर्धा कानून से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण उदाहरण बन सकता है।
CCI ने क्या लगाए थे आरोप?
CCI ने अमेजन के आंतरिक दस्तावेजों का हवाला देते हुए कहा था कि कंपनी ने अपने वास्तविक कारोबारी उद्देश्य को छिपाया। दस्तावेजों में फ्यूचर रिटेल के स्टोर नेटवर्क, तेज डिलीवरी सिस्टम और प्राइवेट लेबल कारोबार को लेकर रणनीतिक योजनाओं का उल्लेख था।
हालांकि, अमेजन लगातार इन आरोपों का विरोध करता रहा। कंपनी का कहना था कि Amazon Future Deal पूरी तरह नियमों के अनुरूप था और उसने सभी जरूरी जानकारियां आयोग को उपलब्ध कराई थीं।
ई-कॉमर्स सेक्टर पर क्या पड़ेगा असर?
विशेषज्ञों के अनुसार, Amazon Future Deal पर आया यह फैसला आने वाले समय में विदेशी निवेश और ई-कॉमर्स सेक्टर से जुड़े बड़े सौदों के लिए महत्वपूर्ण साबित हो सकता है। वहीं इससे भारत में प्रतिस्पर्धा कानूनों की व्याख्या को लेकर नई बहस भी शुरू हो सकती है।
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